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Jammu News: नीलामी के बाद चुनिंदा शिकायतों के आधार पर आवंटन से इन्कार नहीं कर सकता प्रशासन
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गांधीनगर में शराब के दुकानों की बोली से जुड़ा मामला, हाईकोर्ट ने रद्द किया प्रशासनिक आदेश
जम्मू। जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने कहा कि नीलामी के बाद चुनिंदा शिकायतों के आधार पर प्रशासन दुकान आवंटन से इन्कार नहीं कर सकता। मामला गांधीनगर में शराब की दुकान के विवाद से जुड़ा है। कोर्ट ने उन प्रशासनिक आदेशों को रद्द कर दिया, जो असमान व्यवहार के आधार पर शराब की दुकान के लिए सफल बोली लगाने वाले को संचालन से रोक रहे थे।
जस्टिस संजय परिहार ने शराब की दुकान के विवाद से जुड़ी छह रिट याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए कहा कि निवासियों की आपत्तियों पर निष्पक्ष और समान रूप से विचार किया जाना चाहिए। शराब की किसी एक दुकान को निशाना नहीं बनाया जा सकता, जबकि उसी इलाके में वैसी ही शराब की दुकानें चलाई जा रही हों।
इसके साथ ही कोर्ट ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए सफल एच-1 बोली लगाने वाले के तौर पर सामने आए प्रीतम सिंह की रिट याचिका को मंजूरी देते हुए एडिशनल डिप्टी कमिश्नर की ओर से बीती 28 जनवरी को जारी आदेश रद्द कर दिया। इसके बाद आबकारी विभाग की ओर से छह मार्च को जारी आदेश को भी खारिज कर दिया।
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हाईकोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे प्रीतम सिंह के पक्ष में आगे की प्रक्रिया पूरी करें और उन्हें जम्मू-कश्मीर आबकारी नीति 2026-27 के अनुसार सफल बोली का लाभ उठाने दें। कोर्ट ने एक अन्य रिट याचिका को मंजूरी देते हुए बोली लगाने वाले के खिलाफ कार्रवाई का प्रस्ताव करने वाले बीती 23 मई के आदेश को भी रद्द कर दिया। जेएनएफ
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शराब पीकर हंगामे की आशंका संबंधी दलील खारिज की
कोर्ट ने कहा कि शराब पीकर लोग सड़क पर हंगामा कर सकते हैं, इस आशंका को बगैर किसी ठोस सबूत बोली लगाने वाले को नीलामी के लाभ से वंचित करने का एकमात्र आधार नहीं बनाया जा सकता।
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जम्मू। जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने कहा कि नीलामी के बाद चुनिंदा शिकायतों के आधार पर प्रशासन दुकान आवंटन से इन्कार नहीं कर सकता। मामला गांधीनगर में शराब की दुकान के विवाद से जुड़ा है। कोर्ट ने उन प्रशासनिक आदेशों को रद्द कर दिया, जो असमान व्यवहार के आधार पर शराब की दुकान के लिए सफल बोली लगाने वाले को संचालन से रोक रहे थे।
जस्टिस संजय परिहार ने शराब की दुकान के विवाद से जुड़ी छह रिट याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए कहा कि निवासियों की आपत्तियों पर निष्पक्ष और समान रूप से विचार किया जाना चाहिए। शराब की किसी एक दुकान को निशाना नहीं बनाया जा सकता, जबकि उसी इलाके में वैसी ही शराब की दुकानें चलाई जा रही हों।
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इसके साथ ही कोर्ट ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए सफल एच-1 बोली लगाने वाले के तौर पर सामने आए प्रीतम सिंह की रिट याचिका को मंजूरी देते हुए एडिशनल डिप्टी कमिश्नर की ओर से बीती 28 जनवरी को जारी आदेश रद्द कर दिया। इसके बाद आबकारी विभाग की ओर से छह मार्च को जारी आदेश को भी खारिज कर दिया।
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हाईकोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे प्रीतम सिंह के पक्ष में आगे की प्रक्रिया पूरी करें और उन्हें जम्मू-कश्मीर आबकारी नीति 2026-27 के अनुसार सफल बोली का लाभ उठाने दें। कोर्ट ने एक अन्य रिट याचिका को मंजूरी देते हुए बोली लगाने वाले के खिलाफ कार्रवाई का प्रस्ताव करने वाले बीती 23 मई के आदेश को भी रद्द कर दिया। जेएनएफ
शराब पीकर हंगामे की आशंका संबंधी दलील खारिज की
कोर्ट ने कहा कि शराब पीकर लोग सड़क पर हंगामा कर सकते हैं, इस आशंका को बगैर किसी ठोस सबूत बोली लगाने वाले को नीलामी के लाभ से वंचित करने का एकमात्र आधार नहीं बनाया जा सकता।