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फारूक अब्दुल्ला ने कहा: कश्मीरी पंडितों का घर घाटी में हमेशा खुला, कश्मीर लौटें... स्वागत है

अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: निकिता गुप्ता Updated Mon, 19 Jan 2026 03:04 PM IST
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सार

फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि कश्मीरी पंडित हमेशा घाटी लौट सकते हैं, लेकिन उनकी स्थायी वापसी मुश्किल है क्योंकि वे अब देश के अन्य हिस्सों में बस चुके हैं और उनके बच्चे पढ़ाई और रोजगार में व्यस्त हैं। 

Don't think Kashmiri Pandits want to live in Valley permanently said Farooq Abdullah
फारूक अब्दुल्ला - फोटो : एजेंसी
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विस्तार
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फारूक अब्दुल्ला ने सोमवार को कहा कि विस्थापित कश्मीरी पंडित हमेशा अपने घरों में वापस आने के लिए स्वागत योग्य हैं और उनकी घाटी में मौजूदगी जायज है।

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हालांकि, उन्होंने इस बात पर संशय जताया कि क्या आज जिस जगह पर उन्होंने नई जिंदगी बनाई है, वहां के हालात और उनके बच्चों की शिक्षा-रोजगार को देखते हुए वे पूरी तरह से कश्मीर लौटना चाहेंगे।
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विस्थापित कश्मीरी पंडित 19 जनवरी को 'होलोकॉस्ट डे' के रूप में मनाते हैं, ताकि 1990 में पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों द्वारा उत्पीड़न और हत्या के कारण उनकी घाटी से पलायन की याद को सम्मानित किया जा सके।

पत्रकारों से बातचीत में फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि कई कश्मीरी पंडित परिवार कभी घाटी नहीं छोड़े और आज भी अपने गांवों और मोहल्लों में शांति से रह रहे हैं।

वे कब लौटेंगे? कौन उन्हें रोक रहा है? कोई नहीं रोक रहा। उन्हें वापस आना चाहिए, यह उनका घर है। कई कश्मीरी पंडित आज भी घाटी में रह रहे हैं और अपने गांवों को नहीं छोड़ा।

इस बीच, 'युथ 4 पनुन कश्मीर' के तहत सैकड़ों कश्मीरी पंडितों ने रविवार शाम जगती कैंप के पास जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग जाम किया और घाटी में अपने लौटने के लिए अलग मातृभूमि की मांग की। साथ ही, उन्होंने संसद में अपने नरसंहार को मान्यता देने वाले बिल की पारित करने की भी मांग की।

विस्थापित समुदाय की मांगों के बारे में पूछे जाने पर अब्दुल्ला ने कहा कि उन्होंने उन्हें आश्वासन दिया था कि सरकार उनके लिए मकान बनाएगी और आवश्यक सहयोग प्रदान करेगी। उनकी सरकार के जाने के बाद यह प्रस्ताव लागू करना केंद्र सरकार के हाथ में है।

उन्होंने यह भी कहा कि समुदाय को पहले स्थिति का मूल्यांकन करना होगा, क्योंकि कई कश्मीरी पंडित अब देश के विभिन्न हिस्सों में बस चुके हैं।

वे बड़े हो चुके हैं, कई लोग इलाज करा रहे हैं, उनके बच्चे कॉलेजों, स्कूलों और विश्वविद्यालयों में पढ़ाई कर रहे हैं। वे आ सकते हैं, लेकिन मुझे नहीं लगता कि वे वहां स्थायी रूप से लौटेंगे।

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