जम्मू-कश्मीर: दिल्ली में युवाओं पर कार्रवाई से भड़के डिप्टी सीएम सुरिंदर चौधरी, सुप्रीम कोर्ट से लगाई गुहार
जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे युवाओं के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की निंदा करते हुए सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की।
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जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे युवाओं के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। उन्होंने प्रदर्शनकारी युवतियों के साथ दुर्व्यवहार और उन्हें हिरासत में लेने के तरीके पर सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप करने की अपील की। उन्होंने कहा कि युवाओं की मांगों को बल प्रयोग से दबाने के बजाय सरकार को उनसे बातचीत करनी चाहिए।
जम्मू में पत्रकारों से बातचीत के दौरान चौधरी ने कहा कि युवा देश का भविष्य हैं और वे भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव तथा चंद्रशेखर आजाद जैसे स्वतंत्रता सेनानियों की विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान युवाओं के साथ-साथ युवतियों को भी हिरासत में लिया जा रहा है और उनके साथ अनुचित व्यवहार किए जाने की शिकायतें सामने आई हैं।
उन्होंने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक परंपराएं और महात्मा गांधी तथा डॉ. भीमराव आंबेडकर के संवैधानिक आदर्श नागरिकों को अपने अधिकारों का इस्तेमाल करने की स्वतंत्रता देते हैं। ऐसे में प्रदर्शनकारियों की चिंताओं को सुनना और उनका समाधान करना जरूरी है।
चुनावी पारदर्शिता पर भी उठाए सवाल
उपमुख्यमंत्री ने नीट परीक्षा विवाद और मतदाता सूचियों तथा मतदान प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर उठ रहे सवालों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि युवाओं की ओर से पारदर्शिता को लेकर उठाई जा रही चिंताओं पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का उल्लेख करते हुए चौधरी ने कहा कि नैतिक आधार पर उनका इस्तीफा देना उचित होगा।
चौधरी ने केंद्र सरकार से अपील की कि वह प्रदर्शनकारियों की बात सुने और लाठीचार्ज या अन्य कठोर कदम उठाने के बजाय बातचीत के जरिए समाधान निकाले। उन्होंने कहा कि संविधान और नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा में सुप्रीम कोर्ट की अहम भूमिका है। उनके अनुसार, राष्ट्रपति और सुप्रीम कोर्ट जैसे संवैधानिक संस्थानों को लोकतांत्रिक व्यवस्था की रक्षा के लिए अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
जम्मू-कश्मीर में राज्य का दर्जा बहाल करना प्राथमिकता
मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ बताते हुए पत्रकारों से तथ्यों के आधार पर स्वतंत्र रिपोर्टिंग करने और सत्ता में बैठे लोगों को जवाबदेह बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि जब देश में कलम की आवाज दबा दी जाएगी, तो राष्ट्र का भविष्य प्रभावित होगा।
उपमुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जम्मू-कश्मीर में राज्य का दर्जा बहाल करना और क्षेत्र की विशिष्ट पहचान को बनाए रखना प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कैबिनेट में फेरबदल और नियुक्तियों जैसे राजनीतिक मुद्दों के बजाय इन महत्वपूर्ण विषयों पर ध्यान दिया जाना चाहिए।