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Jammu News: आयुर्वेद के इलाज को परखने का तरीका सीख रहे छात्र, शोध की बारीकियां समझीं
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डॉ. हरबंस सिंह के साथ अन्य शिक्षक व शोधार्थी स्रोत - स्वयं
- फोटो : Social Media
- आरएआरआई में संगोष्ठी, अध्ययन की रूपरेखा से लेकर आंकड़ों और शोध-पत्र तक की जानकारी
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। आयुर्वेद के किसी इलाज या दवा पर शोध करते समय सिर्फ पुराने ज्ञान और अनुभव के आधार पर नतीजा निकालना काफी नहीं है। इसके लिए सही तरीके से अध्ययन करना, जरूरी मंजूरी लेना, आंकड़ों को समझना और नतीजों की ठीक से जांच करना भी जरूरी है। मंगलवार को 11वें आयुर्वेद दिवस के मौके पर क्षेत्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान (आरएआरआई), जम्मू की ओर से ‘स्वास्थ्य अनुसंधान के मूलभूत सिद्धांत’ विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई।
इसमें छात्रों को बताया गया कि किसी शोध की शुरुआत कैसे करें, अध्ययन में कितने लोगों को शामिल किया जाए, जरूरी मंजूरी कैसे ली जाए और शोध से मिले आंकड़ों को किस तरह समझा जाए। शोध के नतीजे लिखने और उन्हें शोध-पत्र के रूप में सामने रखने की जानकारी भी दी गई। संस्थान प्रमुख डॉ. हरबंस सिंह ने कहा कि आयुर्वेद को आगे बढ़ाने के लिए मजबूत और भरोसेमंद शोध जरूरी है। उन्होंने छात्रों और युवा शोधकर्ताओं को शोध के जरूरी तरीके सीखने पर जोर दिया, ताकि आयुर्वेद से जुड़े अध्ययनों के नतीजे वैज्ञानिक कसौटी पर खरे उतरें। अनुसंधान अधिकारी डॉ. पूनम मोहोड़ ने कहा कि आयुर्वेद के पुराने ग्रंथों और इलाज के अनुभवों को आज के शोध के तरीकों से जांचना जरूरी है। अनुसंधान अधिकारी डॉ. आदित्य शाह ने कहा कि कई विद्यार्थी शोध करना चाहते हैं, लेकिन उन्हें अध्ययन की रूपरेखा, लोगों की संख्या तय करने और जरूरी मंजूरी लेने जैसी बातों में स्पष्टता की जरूरत होती है।
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। आयुर्वेद के किसी इलाज या दवा पर शोध करते समय सिर्फ पुराने ज्ञान और अनुभव के आधार पर नतीजा निकालना काफी नहीं है। इसके लिए सही तरीके से अध्ययन करना, जरूरी मंजूरी लेना, आंकड़ों को समझना और नतीजों की ठीक से जांच करना भी जरूरी है। मंगलवार को 11वें आयुर्वेद दिवस के मौके पर क्षेत्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान (आरएआरआई), जम्मू की ओर से ‘स्वास्थ्य अनुसंधान के मूलभूत सिद्धांत’ विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई।
इसमें छात्रों को बताया गया कि किसी शोध की शुरुआत कैसे करें, अध्ययन में कितने लोगों को शामिल किया जाए, जरूरी मंजूरी कैसे ली जाए और शोध से मिले आंकड़ों को किस तरह समझा जाए। शोध के नतीजे लिखने और उन्हें शोध-पत्र के रूप में सामने रखने की जानकारी भी दी गई। संस्थान प्रमुख डॉ. हरबंस सिंह ने कहा कि आयुर्वेद को आगे बढ़ाने के लिए मजबूत और भरोसेमंद शोध जरूरी है। उन्होंने छात्रों और युवा शोधकर्ताओं को शोध के जरूरी तरीके सीखने पर जोर दिया, ताकि आयुर्वेद से जुड़े अध्ययनों के नतीजे वैज्ञानिक कसौटी पर खरे उतरें। अनुसंधान अधिकारी डॉ. पूनम मोहोड़ ने कहा कि आयुर्वेद के पुराने ग्रंथों और इलाज के अनुभवों को आज के शोध के तरीकों से जांचना जरूरी है। अनुसंधान अधिकारी डॉ. आदित्य शाह ने कहा कि कई विद्यार्थी शोध करना चाहते हैं, लेकिन उन्हें अध्ययन की रूपरेखा, लोगों की संख्या तय करने और जरूरी मंजूरी लेने जैसी बातों में स्पष्टता की जरूरत होती है।
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