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परंपराएं केवल रीति-रिवाज नहीं, पीढ़ियों तक ज्ञान पहुंचाने का माध्यम : शंकराश्रम
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- आईआईएम जम्मू में संप्रदाय विषय पर आध्यात्मिक व्याख्यान, छात्रों से भारतीय परंपराओं को समझने का आह्वान
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) जम्मू में शनिवार को संप्रदाय विषय पर आध्यात्मिक व्याख्यान आयोजित किया गया। व्याख्यान चित्रापुर मठ के आध्यात्मिक प्रमुख सद्योजात शंकराश्रम ने दिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि संप्रदाय केवल परंपराओं और रीति-रिवाजों का पालन नहीं है, बल्कि गुरु-शिष्य परंपरा के माध्यम से ज्ञान और मूल्यों को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचाने की प्रक्रिया है।
अध्यक्षता संस्थान के निदेशक प्रो. बीएस सहाय ने की। शंकराश्रम ने कहा कि उन्होंने कहा कि आधुनिक शिक्षा व्यक्ति को बाहरी दुनिया में आगे बढ़ने की क्षमता देती है, जबकि आध्यात्मिक परंपराएं जीवन में संतुलन और स्पष्ट सोच विकसित करती हैं। उन्होंने सांस से जुड़े कुछ सरल अभ्यास भी बताए। उनके अनुसार ऐसे अभ्यास मन को शांत करते हैं, एकाग्रता बढ़ाते हैं और व्यक्ति के भीतर संतुलन बनाए रखते हैं। उन्होंने युवाओं से भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं को समझने और उन्हें आगे बढ़ाने का आह्वान किया। आईआईएम के निदेशक प्रो. बीएस सहाय ने कहा कि संस्थान के लिए शंकराश्रम का मार्गदर्शन मिलना सम्मान की बात है। उन्होंने बताया कि छात्रों में मानसिक संतुलन और सकारात्मक सोच विकसित करने के उद्देश्य से संस्थान में आनंदम- द सेंटर फॉर हैप्पीनेस की शुरुआत की गई है।
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जम्मू। भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) जम्मू में शनिवार को संप्रदाय विषय पर आध्यात्मिक व्याख्यान आयोजित किया गया। व्याख्यान चित्रापुर मठ के आध्यात्मिक प्रमुख सद्योजात शंकराश्रम ने दिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि संप्रदाय केवल परंपराओं और रीति-रिवाजों का पालन नहीं है, बल्कि गुरु-शिष्य परंपरा के माध्यम से ज्ञान और मूल्यों को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचाने की प्रक्रिया है।
अध्यक्षता संस्थान के निदेशक प्रो. बीएस सहाय ने की। शंकराश्रम ने कहा कि उन्होंने कहा कि आधुनिक शिक्षा व्यक्ति को बाहरी दुनिया में आगे बढ़ने की क्षमता देती है, जबकि आध्यात्मिक परंपराएं जीवन में संतुलन और स्पष्ट सोच विकसित करती हैं। उन्होंने सांस से जुड़े कुछ सरल अभ्यास भी बताए। उनके अनुसार ऐसे अभ्यास मन को शांत करते हैं, एकाग्रता बढ़ाते हैं और व्यक्ति के भीतर संतुलन बनाए रखते हैं। उन्होंने युवाओं से भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं को समझने और उन्हें आगे बढ़ाने का आह्वान किया। आईआईएम के निदेशक प्रो. बीएस सहाय ने कहा कि संस्थान के लिए शंकराश्रम का मार्गदर्शन मिलना सम्मान की बात है। उन्होंने बताया कि छात्रों में मानसिक संतुलन और सकारात्मक सोच विकसित करने के उद्देश्य से संस्थान में आनंदम- द सेंटर फॉर हैप्पीनेस की शुरुआत की गई है।
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