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Jammu News: रैगिंग में जम्मू-कश्मीर की तस्वीर सुकून देने वाली
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- प्रदेश में 2025 में आईं 17 शिकायतें, पंजाब में 25, हरियाणा में 48 और उत्तराखंड में 49 मामले
- देशभर में भी बेहतर स्थिति में जम्मू-कश्मीर, यूपी, एमपी और बिहार में सबसे ज्यादा मामले
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। कई राज्यों में रैगिंग की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं लेकिन अब जम्मू-कश्मीर की तस्वीर अलग नजर आती है। बीते पांच वर्षों में प्रदेश में शिकायतों की संख्या लगभग स्थिर रही है। पड़ोसी राज्यों में हिमाचल प्रदेश को छोड़कर बाकी की तुलना में भी जम्मू-कश्मीर में कम मामले दर्ज हुए हैं। इस साल भी प्रदेश में 22 जुलाई तक मात्र छह शिकायतें दर्ज हुई हैं।
पिछले पांच साल के आंकड़ों पर नजर दाैड़ाएं तो प्रदेश में 2022 में 15, 2023 में 18, 2024 में 14 और 2025 में 17 शिकायतें दर्ज हुईं। वर्ष 2025 में ही उत्तराखंड में 49, पंजाब में 25, हरियाणा में 48 और हिमाचल प्रदेश में रैगिंग के 14 मामले सामने आए हैं। देशभर में सबसे ज्यादा शिकायतें उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्यप्रदेश से सामने आई हैं। वर्ष 2025 में उत्तर प्रदेश में 251, बिहार में 122 और मध्यप्रदेश में 117 शिकायतें दर्ज हुईं। गौरतलब है कि देशभर के सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में 24 घंटे एंटी रैगिंग हेल्पलाइन, ऑनलाइन अंडरटेकिंग, एंटी रैगिंग कमेटी और जागरूकता अभियान अनिवार्य हैं।
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नियम सख्त, सतर्कता फिर भी जरूरी
कश्मीर यूनिवर्सिटी की डीन स्टूडेंट वेलफेयर प्रो. सीमा सिंह का कहना है कि कम शिकायतें राहत की बात जरूर हैं लेकिन इससे यह नहीं माना जा सकता कि रैगिंग की घटनाएं पूरी तरह खत्म हो गई हैं। कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में एंटी रैगिंग व्यवस्था और निगरानी लगातार मजबूत बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने बताया कि जम्मू विश्वविद्यालय और कश्मीर विवि में यूजीसी के एंटी रैगिंग नियम लागू हैं। दाखिले के समय छात्रों और अभिभावकों से एंटी रैगिंग अंडरटेकिंग ली जाती है। दोनों विश्वविद्यालयों में एंटी रैगिंग कमेटी, एंटी रैगिंग स्क्वॉड और शिकायत निवारण व्यवस्था है। रैगिंग साबित होने पर निलंबन, हॉस्टल से निष्कासन, परीक्षा में बैठने पर रोक, प्रवेश रद्द करने और विश्वविद्यालय से निष्कासन तक की कार्रवाई की जा सकती है।
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जम्मू-कश्मीर और पड़ोसी राज्यों में रैगिंग की शिकायतें
राज्य │ 2022 │ 2023 │ 2024 │ 2025 │ 2026
जम्मू-कश्मीर │ 15 │ 18 │ 14 │ 17 │ 6
हिमाचल प्रदेश │ 5 │ 12 │ 9 │ 14 │ 4
पंजाब │ 18 │ 9 │ 22 │ 25 │ 13
हरियाणा │ 8 │ 22 │ 28 │ 48 │ 19
उत्तराखंड │ 19 │ 28 │ 25 │ 49 │ 21
नोट - आंकड़े 22 जुलाई, 2026 तक के हैं
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- देशभर में भी बेहतर स्थिति में जम्मू-कश्मीर, यूपी, एमपी और बिहार में सबसे ज्यादा मामले
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। कई राज्यों में रैगिंग की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं लेकिन अब जम्मू-कश्मीर की तस्वीर अलग नजर आती है। बीते पांच वर्षों में प्रदेश में शिकायतों की संख्या लगभग स्थिर रही है। पड़ोसी राज्यों में हिमाचल प्रदेश को छोड़कर बाकी की तुलना में भी जम्मू-कश्मीर में कम मामले दर्ज हुए हैं। इस साल भी प्रदेश में 22 जुलाई तक मात्र छह शिकायतें दर्ज हुई हैं।
पिछले पांच साल के आंकड़ों पर नजर दाैड़ाएं तो प्रदेश में 2022 में 15, 2023 में 18, 2024 में 14 और 2025 में 17 शिकायतें दर्ज हुईं। वर्ष 2025 में ही उत्तराखंड में 49, पंजाब में 25, हरियाणा में 48 और हिमाचल प्रदेश में रैगिंग के 14 मामले सामने आए हैं। देशभर में सबसे ज्यादा शिकायतें उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्यप्रदेश से सामने आई हैं। वर्ष 2025 में उत्तर प्रदेश में 251, बिहार में 122 और मध्यप्रदेश में 117 शिकायतें दर्ज हुईं। गौरतलब है कि देशभर के सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में 24 घंटे एंटी रैगिंग हेल्पलाइन, ऑनलाइन अंडरटेकिंग, एंटी रैगिंग कमेटी और जागरूकता अभियान अनिवार्य हैं।
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नियम सख्त, सतर्कता फिर भी जरूरी
कश्मीर यूनिवर्सिटी की डीन स्टूडेंट वेलफेयर प्रो. सीमा सिंह का कहना है कि कम शिकायतें राहत की बात जरूर हैं लेकिन इससे यह नहीं माना जा सकता कि रैगिंग की घटनाएं पूरी तरह खत्म हो गई हैं। कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में एंटी रैगिंग व्यवस्था और निगरानी लगातार मजबूत बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने बताया कि जम्मू विश्वविद्यालय और कश्मीर विवि में यूजीसी के एंटी रैगिंग नियम लागू हैं। दाखिले के समय छात्रों और अभिभावकों से एंटी रैगिंग अंडरटेकिंग ली जाती है। दोनों विश्वविद्यालयों में एंटी रैगिंग कमेटी, एंटी रैगिंग स्क्वॉड और शिकायत निवारण व्यवस्था है। रैगिंग साबित होने पर निलंबन, हॉस्टल से निष्कासन, परीक्षा में बैठने पर रोक, प्रवेश रद्द करने और विश्वविद्यालय से निष्कासन तक की कार्रवाई की जा सकती है।
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जम्मू-कश्मीर और पड़ोसी राज्यों में रैगिंग की शिकायतें
राज्य │ 2022 │ 2023 │ 2024 │ 2025 │ 2026
जम्मू-कश्मीर │ 15 │ 18 │ 14 │ 17 │ 6
हिमाचल प्रदेश │ 5 │ 12 │ 9 │ 14 │ 4
पंजाब │ 18 │ 9 │ 22 │ 25 │ 13
हरियाणा │ 8 │ 22 │ 28 │ 48 │ 19
उत्तराखंड │ 19 │ 28 │ 25 │ 49 │ 21
नोट - आंकड़े 22 जुलाई, 2026 तक के हैं