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Jammu News: जीवनशैली में बदलाव ही मधुमेह एकमात्र बचाव का उपाय

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- शारीरिक परिश्रम में कमी, अनियंत्रित खानपान, तनाव और नींद पूरी न होना मधुमेह का मुख्य कारण
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- इंसुलिन का उत्पादन कम होने पर बढ़ जाता है ग्लूकोज का स्तर
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। मधुमेह (डायबिटीज) एक गंभीर समस्या का रूप अख्तियार कर रही है। डायबिटीज की शुरूआत होने पर नजरअंदाज करना लोगों के लिए परेशानी का कारण बनाता जा रहा। प्री-डायबिटीज यानी मधुमेह के शुरुआती लक्षण को साइलेंट किलर का शिकार लापरवाही करने वाले हो रहे। इससे न केवल ब्लड शुगर बढ़ाता है, बल्कि किडनी, हृदय और आंखों को भी गंभीर नुकसान पहुंचाती है। विशेषज्ञों के अनुसार शारीरिक परिश्रम में कमी, अनियंत्रित खानपान, तनाव और नींद पूरी न होना इसका मुख्य कारण हैं। जब शरीर में इंसुलिन का उत्पादन कम हो जाता है या कोशिकाएं इसका सही उपयोग नहीं कर पातीं, तो ग्लूकोज का स्तर बढ़ जाता है। यह आगे चलकर लोगों को मधुमेह का रोगी बना देता है।

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इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
- अत्यधिक प्यास और बार-बार पेशाब आना।
- बिना कारण वजन कम होना।
- थकान और धुंधली दृष्टि।
- जख्म भरने में देरी।
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क्या करें, क्या न करें
नियमित व्यायाम : रोजाना कम से कम 30-45 मिनट तेज रफ्तार में पैदल चलना, साइकिल चलाना या योग करना शुगर लेवल को नियंत्रित रखने में सहायक है।
संतुलित आहार: मधुमेह को अपनी डाइट में बिना स्टार्च वाली सब्जियां (पालक, ब्रोकली), साबूत अनाज (ओट्स, ब्राउन राइस) और फाइबर युक्त फल का नियमित सेवन करना चाहिए।
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मीठे और जंक फूड से दूरी : चीनी, रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट और प्रोसेस्ड फूड का सेवन कम से कम करें।
वजन पर नियंत्रण : टाइप-2 डायबिटीज के जोखिम को कम करने के लिए वजन को संतुलित रखना सबसे कारगर तरीका है।
तनाव प्रबंधन और नींद : पर्याप्त नींद लें और मानसिक तनाव को कम करने का उपाय करें, क्योंकि तनाव सीधे तौर पर ब्लड शुगर को प्रभावित करता है।
-------साल में कम से कम दो बार एचबीए वन सी टेस्ट जरूर कराएं, खासकर यदि परिवार में मधुमेह का इतिहास रहा हो। कम से कम 7-8 घंटे की नींद लें। पुराना तनाव सीधे ब्लड शुगर लेवल को बढ़ाता है। मेथी दाना, दालचीनी का पानी, आंवला और जामुन के बीजों का चूर्ण ब्लड शुगर को प्राकृतिक रूप से नियंत्रित करने में मदद कर सकता है।

- डाॅ. परवीन जोगराज, पूर्व चिकित्सा अधीक्षक, गांधीनगर अस्पताल
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