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Jammu News: यूजीसी कानून के विरोध में प्रदर्शन, बंद की चेतावनी
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अखनूर में रोष रैली निकालते लोग।
- फोटो : akhnoor news
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अखनूर। यूजीसी कानून के विरोध में वीरवार को अखनूर में विभिन्न सामाजिक संगठनों ने जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार और यूजीसी के खिलाफ नारेबाजी करते हुए नियमों को “अस्पष्ट और असंतुलित” बताते हुए वापस लेने की मांग की।
प्रदर्शन की शुरुआत कामेश्वर मंदिर से हुई। यहां ब्राह्मण सभा अखनूर के अध्यक्ष सुदेश मगोत्रा की अगुवाई में बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हुए। इसके बाद रोष रैली कामेश्वर मंदिर से शुरू होकर निर्दोष चौक तक पहुंची। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर यूजीसी कानून के विरोध में आवाज बुलंद की।
सभा को संबोधित करते हुए सुदेश मगोत्रा ने कहा कि आंदोलन किसी भी समुदाय के खिलाफ नहीं है। सभी समुदाय समाज का अभिन्न हिस्सा हैं, लेकिन नए नियमों में समानता के नाम पर असंतुलन है। उनका आरोप था कि 15 जनवरी 2026 से लागू “उच्च शिक्षण संस्थानों में समान, सुरक्षित और सम्मानजनक शैक्षणिक माहौल सुनिश्चित करने” संबंधी नियम व्यावहारिक रूप से सभी वर्गों के लिए समान नहीं हैं। उन्होंने मांग की कि नियमों की समीक्षा कर स्पष्टता और पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।
राहुल लंगर (महाजन सभा) ने कहा कि शिक्षा से जुड़े निर्णय सामाजिक समरसता को प्रभावित नहीं करने चाहिए। उनका कहना था कि शिकायत तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही के स्पष्ट प्रावधान जरूरी हैं, ताकि किसी भी वर्ग के छात्रों को अन्याय की आशंका न रहे।
रघुवीर सिंह (राजपूत सभा) ने कहा कि किसी भी कानून में संतुलन आवश्यक है। उन्होंने कहा कि झूठी शिकायतों और दुरुपयोग की संभावनाओं पर भी विचार किया जाना चाहिए तथा सभी छात्रों को निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार मिलना चाहिए। वहीं दिलावर सिंह (युवा राजपूत सभा) ने प्रस्तावित “इक्विटी स्क्वाड्स” पर चिंता जताते हुए कहा कि इससे कैंपस में निगरानी का माहौल बन सकता है। उन्होंने मांग की कि छात्रों और शिक्षकों से व्यापक परामर्श के बाद ही नियमों को लागू किया जाए।
वक्ताओं ने कहा, “हम समानता के खिलाफ नहीं, बल्कि अस्पष्टता के खिलाफ हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि नियमों में पारदर्शिता की कमी से छात्रों में असमंजस और भय का वातावरण बन सकता है। प्रदर्शन के दौरान आयोजकों ने 1 फरवरी को अखनूर बंद की चेतावनी दी। उनका दावा है कि इस बंद में शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों की भागीदारी रहेगी। प्रदर्शन में जोगिंदर सिंह, बल्लू टकाईया, राजेंद्र शर्मा, छोटू, पवन गुप्ता, कन्नू शर्मा, मोहनी पंडित, सुजान सिंह, सुमित शर्मा, सुमित भाऊ, विनय शर्मा सहित बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय लोग मौजूद रहे। ब्राह्मण सभा, राजपूत सभा, महाजन सभा सहित विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी और प्रबुद्ध नागरिकों ने भी भाग लिया।
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प्रदर्शन की शुरुआत कामेश्वर मंदिर से हुई। यहां ब्राह्मण सभा अखनूर के अध्यक्ष सुदेश मगोत्रा की अगुवाई में बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हुए। इसके बाद रोष रैली कामेश्वर मंदिर से शुरू होकर निर्दोष चौक तक पहुंची। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर यूजीसी कानून के विरोध में आवाज बुलंद की।
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सभा को संबोधित करते हुए सुदेश मगोत्रा ने कहा कि आंदोलन किसी भी समुदाय के खिलाफ नहीं है। सभी समुदाय समाज का अभिन्न हिस्सा हैं, लेकिन नए नियमों में समानता के नाम पर असंतुलन है। उनका आरोप था कि 15 जनवरी 2026 से लागू “उच्च शिक्षण संस्थानों में समान, सुरक्षित और सम्मानजनक शैक्षणिक माहौल सुनिश्चित करने” संबंधी नियम व्यावहारिक रूप से सभी वर्गों के लिए समान नहीं हैं। उन्होंने मांग की कि नियमों की समीक्षा कर स्पष्टता और पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।
राहुल लंगर (महाजन सभा) ने कहा कि शिक्षा से जुड़े निर्णय सामाजिक समरसता को प्रभावित नहीं करने चाहिए। उनका कहना था कि शिकायत तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही के स्पष्ट प्रावधान जरूरी हैं, ताकि किसी भी वर्ग के छात्रों को अन्याय की आशंका न रहे।
रघुवीर सिंह (राजपूत सभा) ने कहा कि किसी भी कानून में संतुलन आवश्यक है। उन्होंने कहा कि झूठी शिकायतों और दुरुपयोग की संभावनाओं पर भी विचार किया जाना चाहिए तथा सभी छात्रों को निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार मिलना चाहिए। वहीं दिलावर सिंह (युवा राजपूत सभा) ने प्रस्तावित “इक्विटी स्क्वाड्स” पर चिंता जताते हुए कहा कि इससे कैंपस में निगरानी का माहौल बन सकता है। उन्होंने मांग की कि छात्रों और शिक्षकों से व्यापक परामर्श के बाद ही नियमों को लागू किया जाए।
वक्ताओं ने कहा, “हम समानता के खिलाफ नहीं, बल्कि अस्पष्टता के खिलाफ हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि नियमों में पारदर्शिता की कमी से छात्रों में असमंजस और भय का वातावरण बन सकता है। प्रदर्शन के दौरान आयोजकों ने 1 फरवरी को अखनूर बंद की चेतावनी दी। उनका दावा है कि इस बंद में शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों की भागीदारी रहेगी। प्रदर्शन में जोगिंदर सिंह, बल्लू टकाईया, राजेंद्र शर्मा, छोटू, पवन गुप्ता, कन्नू शर्मा, मोहनी पंडित, सुजान सिंह, सुमित शर्मा, सुमित भाऊ, विनय शर्मा सहित बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय लोग मौजूद रहे। ब्राह्मण सभा, राजपूत सभा, महाजन सभा सहित विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी और प्रबुद्ध नागरिकों ने भी भाग लिया।