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Jammu News: श्री माता देविका वेद विद्यालय बना वैदिक संस्कृति और अनुशासन का केंद्र
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पुरमंडल में वेद विद्यालय के छात्र और आचार्य।
- फोटो : purmandal news
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पुरमंडल। पुरमंडल क्षेत्र के पावन तीर्थ स्थल पर स्थित श्री माता देविका वेद विद्यालय वीरवार को आधुनिक युग में भारतीय सनातन संस्कृति, वैदिक ज्ञान और संस्कारयुक्त शिक्षा का एक सशक्त केंद्र बनकर उभर रहा है। यह विद्यालय न केवल वेद, उपनिषद, श्रीमद्भगवद्गीता एवं संस्कृत भाषा की शिक्षा प्रदान करता है, बल्कि वैदिक पूजन पद्धति, यज्ञ, हवन और धार्मिक अनुष्ठानों का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी विद्यार्थियों को देता है।
विद्यालय की सबसे बड़ी विशेषता यहां जीवंत रूप में दिखाई देने वाली गुरु–शिष्य परंपरा है। आचार्य और शिष्य के बीच ज्ञान, श्रद्धा और अनुशासन का पवित्र संबंध स्थापित किया जाता है। अनुभवी एवं विद्वान आचार्यों द्वारा विद्यार्थियों को शुद्ध उच्चारण, अर्थ एवं भावार्थ सहित वैदिक शिक्षा दी जाती है, जिससे वे शास्त्रों की गहराई को सही रूप में समझ सकें।
श्री माता देविका वेद विद्यालय में विद्यार्थियों को कठोर अनुशासन और ब्रह्मचर्य का पालन कराया जाता है। विद्यार्थियों की दिनचर्या अत्यंत संयमित है। प्रातः 4:00 बजे जागरण और रात्रि 9:30 बजे विश्राम। दिनभर की दिनचर्या में वेद-पाठ, संस्कृत अध्ययन, पूजन अभ्यास, यज्ञ-हवन तथा सेवा कार्य शामिल रहते हैं। इस जीवनशैली से विद्यार्थियों में आत्मनियंत्रण, तपस्या और अनुशासन का विकास होता है।
संस्कारवान पीढ़ी निर्माण है विद्यालय का लक्ष्य
विद्यालय का उद्देश्य केवल शास्त्रज्ञ तैयार करना नहीं, बल्कि ऐसे संस्कारवान, चरित्रवान और समाजसेवी विद्यार्थी तैयार करना है, जो समाज में धर्म, शांति, नैतिकता और सद्भावना का संदेश फैलाएं। यहां विद्यार्थियों के नैतिक मूल्यों, सेवा भावना और सामाजिक उत्तरदायित्व पर विशेष बल दिया जाता है।
आज जब नई पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से दूर होती जा रही है तो ऐसे समय में श्री माता देविका वेद विद्यालय समाज के लिए एक प्रेरणास्रोत के रूप में सामने आ रहा है।
वैदिक धरोहर के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका
पुरमंडल जैसे ऐतिहासिक और पवित्र तीर्थ क्षेत्र में स्थित यह वेद विद्यालय भारतीय संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में निरंतर महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। यह संस्था आने वाली पीढ़ियों के लिए वैदिक ज्ञान की अमूल्य धरोहर को सुरक्षित रखते हुए सनातन संस्कृति को जीवंत बनाए रखने का कार्य कर रही है।
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श्री माता देविका वेद विद्यालय में विद्यार्थियों को कठोर अनुशासन और ब्रह्मचर्य का पालन कराया जाता है। विद्यार्थियों की दिनचर्या अत्यंत संयमित है। प्रातः 4:00 बजे जागरण और रात्रि 9:30 बजे विश्राम। दिनभर की दिनचर्या में वेद-पाठ, संस्कृत अध्ययन, पूजन अभ्यास, यज्ञ-हवन तथा सेवा कार्य शामिल रहते हैं। इस जीवनशैली से विद्यार्थियों में आत्मनियंत्रण, तपस्या और अनुशासन का विकास होता है।
संस्कारवान पीढ़ी निर्माण है विद्यालय का लक्ष्य
विद्यालय का उद्देश्य केवल शास्त्रज्ञ तैयार करना नहीं, बल्कि ऐसे संस्कारवान, चरित्रवान और समाजसेवी विद्यार्थी तैयार करना है, जो समाज में धर्म, शांति, नैतिकता और सद्भावना का संदेश फैलाएं। यहां विद्यार्थियों के नैतिक मूल्यों, सेवा भावना और सामाजिक उत्तरदायित्व पर विशेष बल दिया जाता है।
आज जब नई पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से दूर होती जा रही है तो ऐसे समय में श्री माता देविका वेद विद्यालय समाज के लिए एक प्रेरणास्रोत के रूप में सामने आ रहा है।
वैदिक धरोहर के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका
पुरमंडल जैसे ऐतिहासिक और पवित्र तीर्थ क्षेत्र में स्थित यह वेद विद्यालय भारतीय संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में निरंतर महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। यह संस्था आने वाली पीढ़ियों के लिए वैदिक ज्ञान की अमूल्य धरोहर को सुरक्षित रखते हुए सनातन संस्कृति को जीवंत बनाए रखने का कार्य कर रही है।