{"_id":"69729992f0537e78ed021894","slug":"jkpsc-news-jammu-news-c-10-jmu1041-818704-2026-01-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"न्यायिक सेवा मुख्य परीक्षा निष्पक्ष, भेदभाव या हस्तक्षेप की कोई गुंजाइश नहीं : जेकेपीएससी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
न्यायिक सेवा मुख्य परीक्षा निष्पक्ष, भेदभाव या हस्तक्षेप की कोई गुंजाइश नहीं : जेकेपीएससी
विज्ञापन
विज्ञापन
- मौखिक परीक्षा के लिए अभ्यर्थियों को बुलाए जाने के बाद उठे आरोपों पर आयोग की सफाई
- कश्मीर केंद्रित दलों के नेताओं ने चयन प्रक्रिया पर लगाए थे क्षेत्रीय असंतुलन के आरोप
जम्मू। जम्मू-कश्मीर लोक सेवा आयोग (जेकेपीएससी) ने न्यायिक सेवा मुख्य परीक्षा, 2025 को लेकर उठ रहे आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि परीक्षा और चयन प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और तय नियमों के अनुसार रही है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि चयन में किसी भी तरह के भेदभाव, पक्षपात या बाहरी हस्तक्षेप की कोई गुंजाइश नहीं है।
मुख्य परीक्षा का परिणाम जारी होने और मौखिक परीक्षा के लिए अभ्यर्थियों को बुलाए जाने के बाद कश्मीर केंद्रित कुछ राजनीतिक दलों के नेताओं ने सोशल मीडिया पर चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे। इन नेताओं की ओर से दावा किया गया कि चयन सूची में क्षेत्रीय असंतुलन दिखाई दे रहा है। सोशल मीडिया पर यह आरोप लगाया गया कि कश्मीर संभाग से केवल 13 अभ्यर्थियों को चुना गया है, जबकि जम्मू संभाग से 124 अभ्यर्थियों का चयन हुआ है। अपनी पार्टी के प्रमुख अल्ताफ बुखारी ने भी इस मुद्दे को लेकर एक्स पर पोस्ट कर परीक्षा प्रक्रिया में भेदभाव के आरोप लगाए थे।
इन आरोपों के बीच आयोग ने बयान जारी कर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। आयोग ने कहा है कि उम्मीदवारों का चयन पूरी तरह योग्यता और नियमों के आधार पर किया जाता है। चयन प्रक्रिया में धर्म, क्षेत्र, भाषा या किसी अन्य आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जाता। उत्तर पुस्तिकाओं की जांच के दौरान उच्च स्तर की गोपनीयता और सुरक्षा सुनिश्चित की जाती है। मूल्यांकन प्रक्रिया इस तरह तैयार की गई है कि जांच करने वाला अधिकारी किसी भी स्तर पर यह नहीं जान सकता कि वह किस अभ्यर्थी की उत्तर पुस्तिका जांच रहा है। इससे चयन प्रक्रिया में किसी भी तरह के प्रभाव या दबाव की संभावना समाप्त हो जाती है।
आयोग ने अभ्यर्थियों और आम जनता से अपील की है कि वे अपुष्ट दावों और सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं पर भरोसा न करें और केवल आधिकारिक जानकारी को ही आधार बनाएं।
Trending Videos
- कश्मीर केंद्रित दलों के नेताओं ने चयन प्रक्रिया पर लगाए थे क्षेत्रीय असंतुलन के आरोप
जम्मू। जम्मू-कश्मीर लोक सेवा आयोग (जेकेपीएससी) ने न्यायिक सेवा मुख्य परीक्षा, 2025 को लेकर उठ रहे आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि परीक्षा और चयन प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और तय नियमों के अनुसार रही है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि चयन में किसी भी तरह के भेदभाव, पक्षपात या बाहरी हस्तक्षेप की कोई गुंजाइश नहीं है।
मुख्य परीक्षा का परिणाम जारी होने और मौखिक परीक्षा के लिए अभ्यर्थियों को बुलाए जाने के बाद कश्मीर केंद्रित कुछ राजनीतिक दलों के नेताओं ने सोशल मीडिया पर चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे। इन नेताओं की ओर से दावा किया गया कि चयन सूची में क्षेत्रीय असंतुलन दिखाई दे रहा है। सोशल मीडिया पर यह आरोप लगाया गया कि कश्मीर संभाग से केवल 13 अभ्यर्थियों को चुना गया है, जबकि जम्मू संभाग से 124 अभ्यर्थियों का चयन हुआ है। अपनी पार्टी के प्रमुख अल्ताफ बुखारी ने भी इस मुद्दे को लेकर एक्स पर पोस्ट कर परीक्षा प्रक्रिया में भेदभाव के आरोप लगाए थे।
विज्ञापन
विज्ञापन
इन आरोपों के बीच आयोग ने बयान जारी कर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। आयोग ने कहा है कि उम्मीदवारों का चयन पूरी तरह योग्यता और नियमों के आधार पर किया जाता है। चयन प्रक्रिया में धर्म, क्षेत्र, भाषा या किसी अन्य आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जाता। उत्तर पुस्तिकाओं की जांच के दौरान उच्च स्तर की गोपनीयता और सुरक्षा सुनिश्चित की जाती है। मूल्यांकन प्रक्रिया इस तरह तैयार की गई है कि जांच करने वाला अधिकारी किसी भी स्तर पर यह नहीं जान सकता कि वह किस अभ्यर्थी की उत्तर पुस्तिका जांच रहा है। इससे चयन प्रक्रिया में किसी भी तरह के प्रभाव या दबाव की संभावना समाप्त हो जाती है।
आयोग ने अभ्यर्थियों और आम जनता से अपील की है कि वे अपुष्ट दावों और सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं पर भरोसा न करें और केवल आधिकारिक जानकारी को ही आधार बनाएं।