डोडा का दर्दनाक हादसा: हादसे का सबसे बड़ा विलेन बनी यह चीज, ढलान पर बिखर गए 10 जवानों के परिवारों के अरमान
Doda Accident Death Toll: सफेद चादर ओढ़े पहाड़ों और कम विजिबिलिटी के बीच बचाव कार्य भी बेहद कठिन रहा। खाई की गहराई और मलबे के बीच फंसे जवानों को निकालने के लिए स्थानीय लोगों और आपदा प्रबंधन टीमों को भारी मशक्कत करनी पड़ी। घायलों को तुरंत एयरलिफ्ट कर उधमपुर के सैन्य अस्पताल भेजा गया है।
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डोडा जिले में खन्नी टॉप की बर्फीली ढलान ने वीरवार (गुरुवार) को 10 घरों का चिराग बुझा दिया। जब पूरा देश कड़ाके की ठंड से ठिठुर रहा था तब देश की रक्षा में तैनात ये जांबाज अपनी ड्यूटी की ओर बढ़ रहे थे लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। खन्नी टॉप इलाके में उनका वाहन हादसे का शिकार हो गया। यह हादसा महज एक दुर्घटना नहीं बल्कि उन पहाड़ी रास्तों की बेबसी की कहानी भी है जहां एक चूक और सुरक्षा इंतजामों की कमी जिंदगी पर भारी पड़ जाती है। खन्नी टॉप ऊंचाई पर स्थित है, जहां सर्दियों में तापमान लगातार शून्य से नीचे रहता है। रात के समय सड़क पर पानी जमकर बर्फ की परत बन जाता है। इस बर्फ को ब्लैक आइस कहा जाता है।
न पैराफिट, न संकेतक काश! वहां एक दीवार होती
डोडा जिले भद्रवाह में प्रकृति की मार और दुर्गम भौगोलिक स्थिति ने वीरवार को सेना के बुलेटप्रूफ वाहन को भीषण सड़क हादसे में धकेल दिया। हादसे वाली जगह का मंजर देख हर आंख नम थी। सड़क के उस खौफनाक मोड़ पर न तो कोई सुरक्षा दीवार (पैराफिट) थी और न ही कोई चेतावनी बोर्ड।
जानकारों का कहना है कि अगर सड़क के किनारे मजबूत कंक्रीट का पैराफिट होता तो अनियंत्रित होकर गिरते हुए वाहन को शायद रोका जा सकता था। सड़क की हालत भी बेहद जर्जर थी जहां संकरे रास्तों पर भारी वाहनों का गुजरना हर पल जोखिम भरा रहता है। न तो वहां क्रैश बैरियर थे और न ही रात के वक्त चमकने वाले रिफ्लेक्टर जो ड्राइवर को खाई की गहराई का अंदाजा दे पाते।
ब्लैक आइस... सड़क पर बिछी मौत की अदृश्य चादर
हादसे का सबसे बड़ा विलेन भीषण ठंड में सड़क पर जमा पानी और पाला बना है। भद्रवाह की इन ऊंची चोटियों पर रात का तापमान शून्य से कई डिग्री नीचे चला जाता है। बुधवार की रात में यहां का तापमान माइनस 1.5 डिग्री सेल्सियस था। पहाड़ों से रिसता हुआ पानी सड़क पर जमकर ब्लैक आइस बन जाता है जो कांच की तरह फिसलन भरा होता है।
एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि जहां पर हादसा हुआ वहां एक छोटा नाला है। इस नाले का कुछ पानी सड़क पर भी आ गया था। पानी और रात में गिरे पाला ने रास्ते पर कांच जैसी परत बना ली थी। इस कारण से हादसे वाले स्थान पर काफी अधिक फिसलन थी।
अधिकारियों के मुताबिक, मोड़ पर वाहन ने जैसे ही ब्रेक लगाने की कोशिश की टायरों ने सड़क से संपर्क खो दिया। दोपहर होने के बावजूद धूप की कमी के कारण वह नमी नहीं पिघली थी जिसने बुलेटप्रूफ वाहन को भी बेबस कर दिया।
नुकीले पत्थरों से टकराते हुए टुकड़ों में बिखर गया बुलेटप्रूफ कैस्पर वाहन
भद्रवाह के खन्नी टॉप क्षेत्र की पहाड़ियां ऊबड़-खाबड़ और ढलान वाली हैं। इन्हीं दुर्गम परिस्थितियों में मंजिल की ओर बढ़ा सेना का वाहन हादसे का शिकार हो गया। हादसा रोंगटे खड़े कर देने वाला है। रपटीले रास्ते से फिसलता हुआ वाहन 200 फीट गहरी खाई की ढलान पर पड़े नुकीले पत्थरों से टकराते हुए टुकड़ों में बिखर गया।
हादसा इतना भयानक था कि सेना का बुलेटप्रूफ कैस्पर वाहन के पहिये टूटकर दूर-दूर तक जा गिरे। इसका कहीं एक्सल गिरा तो कहीं स्टेयरिंग पड़ा नजर आया। पूर वाहन के परखच्चे उड़ गए हैं। इन्हीं पत्थरों की चोटों ने जवानों को सबसे घातक नुकसान पहुंचाया।
देवदूत बनकर पहुंचे लोग
हादसे की चीखें जैसे ही वादियों में गूंजी, पास के गांवों के लोग कड़ाके की ठंड की परवाह किए बिना देवदूत बनकर मौके पर पहुंचे। सेना और पुलिस के पहुंचने से पहले स्थानीय युवाओं ने अपनी जान जोखिम में डालकर गहरी खाई में उतरना शुरू कर दिया। पथरीले रास्तों पर पीठ पर लादकर और चादरों का स्ट्रेचर बनाकर उन्होंने घायलों को ऊपर सड़क तक पहुंचाया।
गत वर्ष हुए बड़े हादसे
जनवरी: बांदीपोरा में सेना का ट्रक खाई में गिर गया था। 4 जवान बलिदान।
मईः रामबन जिले के बैटरी चश्मा में वाहन 600 मीटर गहरी खाई में गिर गया था। हादसे में तीन जवान बलिदान हो गए थे।
अगस्त: उधमपुर जिले के बसंतगढ़ में सीआरपीएफ जवानों की बंकर गाड़ी 200 फीट गहरी खाई में गिर गई। 3 जवान बलिदान, 15 घायल।
आसमान से उतरी उम्मीद पांच उड़ानों में हुआ रेस्क्यू
घायलों की गंभीर स्थिति को देखते हुए सेना ने तुरंत चीता और ध्रुव हेलिकॉप्टरों को मोर्चे पर लगाया। जानकारी के अनुसार सेना के चॉपर्स ने पांच उड़ानें भरीं। बेहद खराब मौसम और कम दृश्यता के बीच पायलटों ने जोखिम उठाकर भद्रवाह से उधमपुर कमान अस्पताल के लिए 11 घायलों को एयरलिफ्ट किया।