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प्रदेश की भूमि पर दशकों बाद हो रहा भाषाओं को पुनर्जीवित करने का कार्य : एलजी
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गणतंत्र दिवस पर अभिनव थिएटर में अखिल भारतीय हिंदी कवि सम्मेलन
जम्मू। एलजी मनोज सिन्हा ने कहा कि जम्मू कश्मीर की पवित्र भूमि पर दशकों बाद भाषाओं को पुनर्जीवित करने का कार्य हो रहा है। स्थानीय संस्कृति को ऊंचाई पर ले जाने के प्रयास 2020 से शुरू हुए। इस विरासत को स्मृति नहीं, बल्कि परंपरा के रूप में आगे बढ़ाना सामूहिक जिम्मेदारी है।
वे मंगलवार को अभिनव थिएटर में अखिल भारतीय हिंदी कवि सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। कवि सम्मेलन का आयोजन जम्मू-कश्मीर कला, संस्कृति और भाषा अकादमी की ओर से गणतंत्र दिवस समारोह के हिस्से के रूप में करवाया गया था।
मनोज सिन्हा ने कहा कि कवियों के पास असाधारण शक्ति होती है और वे समाज की अंदरूनी बनावट में सुधार कर सकते हैं। वैज्ञानिकों और कवियों के योगदान की आवश्यकता होती है। कविता मूर्त वस्तुओं को अलौकिक संसार से जोड़ने वाला गलियारा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सामंजस्यपूर्ण, प्रगतिशील और आत्मनिर्भर समाज के लिए आर्थिक सशक्तिकरण और आत्मिक संतुलन बेहद आवश्यक है।
इस दौरान एलजी ने प्रदेश के पास मौजूद असीमित प्राकृतिक संसाधनों और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की भी चर्चा की। इस दौरान प्रमुख सचिव डॉ. मनदीप भंडारी, प्रमुख सचिव संस्कृति बृज मोहन शर्मा मौजूद थे।
नए रंग में नजर आए एलजी
एलजी मनोज सिन्हा अभिनव थिएटर में नए रंग में नजर आए। उन्होंने विरही होगा पहला कवि आह से उपता होगा गान, उमड़कर आंख से चुपचाप बही होगी कविता अंजान...जैसी पंक्ति को स्वर देते हुए रामधारी सिंह दिनकर, सुमित्रा नंद पंत निराला आदि महान कवियों की पंक्तियों का भी पाठ किया।
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जम्मू। एलजी मनोज सिन्हा ने कहा कि जम्मू कश्मीर की पवित्र भूमि पर दशकों बाद भाषाओं को पुनर्जीवित करने का कार्य हो रहा है। स्थानीय संस्कृति को ऊंचाई पर ले जाने के प्रयास 2020 से शुरू हुए। इस विरासत को स्मृति नहीं, बल्कि परंपरा के रूप में आगे बढ़ाना सामूहिक जिम्मेदारी है।
वे मंगलवार को अभिनव थिएटर में अखिल भारतीय हिंदी कवि सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। कवि सम्मेलन का आयोजन जम्मू-कश्मीर कला, संस्कृति और भाषा अकादमी की ओर से गणतंत्र दिवस समारोह के हिस्से के रूप में करवाया गया था।
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मनोज सिन्हा ने कहा कि कवियों के पास असाधारण शक्ति होती है और वे समाज की अंदरूनी बनावट में सुधार कर सकते हैं। वैज्ञानिकों और कवियों के योगदान की आवश्यकता होती है। कविता मूर्त वस्तुओं को अलौकिक संसार से जोड़ने वाला गलियारा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सामंजस्यपूर्ण, प्रगतिशील और आत्मनिर्भर समाज के लिए आर्थिक सशक्तिकरण और आत्मिक संतुलन बेहद आवश्यक है।
इस दौरान एलजी ने प्रदेश के पास मौजूद असीमित प्राकृतिक संसाधनों और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की भी चर्चा की। इस दौरान प्रमुख सचिव डॉ. मनदीप भंडारी, प्रमुख सचिव संस्कृति बृज मोहन शर्मा मौजूद थे।
नए रंग में नजर आए एलजी
एलजी मनोज सिन्हा अभिनव थिएटर में नए रंग में नजर आए। उन्होंने विरही होगा पहला कवि आह से उपता होगा गान, उमड़कर आंख से चुपचाप बही होगी कविता अंजान...जैसी पंक्ति को स्वर देते हुए रामधारी सिंह दिनकर, सुमित्रा नंद पंत निराला आदि महान कवियों की पंक्तियों का भी पाठ किया।