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मुश्किल में उमर सरकार!: पीर पंजाल की अनदेखी, मुबारक गुल के समर्थकों के अल्टीमेटम पर गरमाई सियासत

Thu, 29 Oct 2026 09:08 AM IST
अनुज कुमार अमृतपाल सिंह बाली, श्रीनगर
अमृतपाल सिंह बाली, श्रीनगर Published by: अनुज कुमार Updated Thu, 29 Oct 2026 09:08 AM IST
सार

पीर पंजाल की अनदेखी और मुबारक गुल के समर्थकों के अल्टीमेटम से उमर सरकार की मुश्किलें बढ़ गई हैं। इस पर नेशनल कांफ्रेंस की सकीना इत्तू ने कहा कि पार्टी एक परिवार है और अंदरूनी मामले सुलझा लिए जाएंगे।

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Politics heats up over neglect of Pir Panjal by Omar cabinet
उमर सरकार के लिए बढ़ती मुश्किलें - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जम्मू-कश्मीर में मंत्रिपरिषद के विस्तार के बाद सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) के भीतर उपजा असंतोष अब थमने का नाम नहीं ले रहा है। कैबिनेट में क्षेत्रीय संतुलन बिगड़ने और महत्वपूर्ण क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व न मिलने के कारण पार्टी के भीतर विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। जहां एक ओर पीर पंजाल क्षेत्र में पहाड़ी समुदाय की अनदेखी को लेकर राजनीतिक उबाल आ गया है और समर्थन वापसी तक की चर्चाएं शुरू हो गई हैं, वहीं दूसरी ओर वरिष्ठ नेता मुबारक गुल को जगह न मिलने से उनके समर्थकों का गुस्सा सड़क पर फूट पड़ा है।
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कैबिनेट विस्तार में पीर पंजाल जैसे महत्वपूर्ण सीमावर्ती क्षेत्र को पूरी तरह नजरअंदाज किए जाने पर भारी राजनीतिक हलचल देखने को मिल रही है। राजोरी-पुंछ बेल्ट में इसको लेकर गहरी नाराजगी है। थन्नामंडी से निर्दलीय विधायक मुजफ्फर इकबाल खान ने इस फैसले पर कड़े सवाल खड़े करते हुए कहा है कि इस कैबिनेट फेरबदल ने समस्याओं का समाधान करने के बजाय सरकार के लिए नई मुश्किलें खड़ी कर दी हैं।
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विधायक मुजफ्फर इकबाल खान ने कहा कि पीर पंजाल की राजनीति कश्मीर घाटी से पूरी तरह अलग है और क्षेत्र के लोग, विशेषकर पहाड़ी समुदाय, कैबिनेट में प्रतिनिधित्व न मिलने से बेहद आहत हैं। उन्होंने कहा कि पहाड़ी समुदाय ने केंद्र सरकार द्वारा एसटी का दर्जा दिए जाने के बावजूद नेशनल कॉन्फ्रेंस गठबंधन के प्रत्याशियों को भारी मतों से जिताया था, लेकिन इसके बावजूद नई कैबिनेट में इस तबके को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया, जिससे जनता में भारी आक्रोश है।
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उन्होंने आरोप लगाया कि क्षेत्र की समस्याओं को लेकर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को पहले ही अवगत कराया गया था और उन्होंने एक महीने में सुधारात्मक कदम उठाने का आश्वासन दिया था, लेकिन इसके विपरीत जमीनी स्तर पर हालात और बिगड़ गए। जब उनसे सरकार से समर्थन वापस लेने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने स्पष्ट किया कि वे जनता के फैसले से बंधे हुए हैं लेकिन समर्थन वापस लेने के बारे में अभी कोई विचार नहीं किया गया है। इसके अलावा इस पूरे घटनाक्रम से वरिष्ठ नेता मियां अल्ताफ समेत कई अन्य प्रमुख चेहरे भी असहज बताए जा रहे हैं।

इस बीच कैबिनेट में जगह न मिलने के कारण छह बार के वरिष्ठ विधायक और ईदगाह निर्वाचन क्षेत्र के नेता मुबारक गुल का गुस्सा भी उग्र रूप ले चुका है। पार्टी मुख्यालय नवा-ए-सुबह कॉम्प्लेक्स में हंगामे के बाद, बुधवार को उनके समर्थकों ने सफेद कफन पहनकर श्रीनगर के प्रेस एन्क्लेव में जोरदार प्रदर्शन किया।

सड़क पर उतरे प्रदर्शनकारियों ने मुबारक गुल को अपनी शान बताते हुए कहा कि वे एक बेहद ईमानदार और निष्ठावान नेता हैं, जिन्होंने मुश्किल से मुश्किल राजनीतिक दौर में भी नेशनल कॉन्फ्रेंस का साथ नहीं छोड़ा। समर्थकों ने याद दिलाया कि जब 1984 में गुलाम मोहम्मद शाह ने फारूक अब्दुल्ला की सरकार गिरा दी थी, तब भी गुल पार्टी के साथ चट्टान की तरह खड़े रहे थे। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि पार्टी नेतृत्व ने 2 नवंबर तक इस पर कोई न्यायसंगत कदम नहीं उठाया तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन शुरू करने के लिए मजबूर होंगे।

लगातार कैबिनेट से पत्ता कटने के बाद खुद मुबारक गुल ने भी अपनी गहरी नाराजगी जाहिर की थी। हालांकि, बढ़ते असंतोष को शांत करने के लिए पार्टी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने उन्हें संगठन का महासचिव नियुक्त किया है लेकिन उनके समर्थक इस पद से बिल्कुल संतुष्ट नहीं हैं और साफ तौर पर कह रहे हैं कि सरकार में उनकी उचित नुमाइंदगी होनी ही चाहिए। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मुख्यमंत्री समेत नौ मंत्रियों के साथ मंत्रिमंडल अपनी अधिकतम सांविधानिक सीमा तक पहुंच चुका है। ऐसे में वर्तमान स्थिति में किसी नए चेहरे को कैबिनेट में शामिल करना तभी संभव है जब मौजूदा ढांचे में कोई बड़ा बदलाव किया जाए।

शपथ ग्रहण के दिन सामने आई थी बगावत: 11 विधायकों ने बनाई थी दूरी
इन ताजा घटनाक्रमों की पृष्ठभूमि में मंगलवार को हुए शपथ ग्रहण समारोह के दौरान का वो वाकया भी शामिल है जिसने पार्टी की अंदरूनी कलह को उजागर कर दिया था। मंत्रिपरिषद के विस्तार के साथ ही पार्टी के भीतर आंतरिक असंतोष इस हद तक बढ़ गया था कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के लगभग 11 विधायकों ने शपथ ग्रहण समारोह से पूरी तरह दूरी बना ली थी। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और मनमुताबिक पद न मिलने से नाराज इन विधायकों ने समारोह का बहिष्कार कर अपनी नाराजगी स्पष्ट की थी।

इसी फेरबदल में नजरअंदाज किए जाने पर वरिष्ठ विधायक अब्दुल मजीद लारमी का दर्द भी सामने आया था। उन्होंने अपनी वरिष्ठता, ईमानदारी और पार्टी के प्रति लंबी वफादारी का हवाला देते हुए कहा था कि उनका दिल जरूर दुखा है, हालांकि इसके बावजूद वे पार्टी नेतृत्व के फैसले का सम्मान करेंगे और पार्टी के लिए काम जारी रखेंगे।

- सकीना इत्तू का बचाव: 'नेकां एक परिवार है, अंदरूनी मामलों को सुलझा लिया जाएगा'
पार्टी के भीतर मचे इस घमासान और विरोध के बीच सरकार की मंत्री सकीना इत्तू ने डैमेज कंट्रोल करते हुए स्पष्टीकरण दिया है। उन्होंने नेशनल कॉन्फ्रेंस में किसी भी तरह की बड़ी नाराजगी की खबरों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि पार्टी एक परिवार की तरह है और अपनी बात रखना हर कार्यकर्ता का लोकतांत्रिक अधिकार है।

उन्होंने कहा कि अगर किसी परिवार में दस बच्चे हैं, तो माता-पिता भी एक ही समय में सभी बच्चों की हर मांग पूरी नहीं कर सकते, इसलिए यदि बच्चे अपनी शिकायत दर्ज कराते हैं, तो यह उनका पारिवारिक अधिकार है। सकीना इत्तू ने दावा किया कि जिन नेताओं या विधायकों ने अपनी नाराजगी व्यक्त की है, वे पार्टी के प्रति पूरी तरह वफादार हैं और यह उनका अंदरूनी मामला है, जिसे पार्टी के भीतर ही सुलझा लिया जाएगा। साथ ही उन्होंने विपक्ष पर कटाक्ष करते हुए कहा कि विपक्ष के पास कोई ठोस मुद्दा नहीं बचा है, इसलिए वे कैबिनेट फेरबदल की छोटी-मोटी बातों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर राजनीतिक रोटियां सेक रहे हैं।

सरकार के दो साल के कामकाज का ब्योरा देते हुए सकीना इत्तू ने विश्वास जताया कि प्रशासन ने व्यवस्था को दोबारा पटरी पर ला दिया है और आने वाले ढाई से तीन साल में जनता से किए गए सभी बचे हुए वादे भी पूरी तरह जमीन पर उतार दिए जाएंगे।

गौरतलब है कि फिलहाल एक तरफ जहां मंत्री डैमेज कंट्रोल में जुटे हैं, वहीं दूसरी तरफ मुबारक गुल के समर्थकों का अल्टीमेटम, पीर पंजाल के विधायकों की सुलगती नाराजगी और शपथ ग्रहण के दौरान विधायकों की दूरियों ने उमर अब्दुल्ला सरकार के लिए राजनीतिक असहजता पैदा कर दी है। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस का शीर्ष नेतृत्व इस आंतरिक असंतोष को थमाने के लिए क्या कदम उठाता है।

नेशनल कांफ्रेंस में फूट, जल्द टूटेगी सरकार: सुनील शर्मा का दावा
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर विधानसभा में विपक्ष के नेता (एलओपी) और भाजपा के वरिष्ठ नेता सुनील शर्मा ने बुधवार को दावा किया कि सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) में गंभीर आंतरिक कलह चल रही है। उन्होंने कहा कि पार्टी के भीतर एक असंतुष्ट गुट परिवारवाद और वंशवादी राजनीति को खत्म करने की मांग कर रहा है।


सुनील शर्मा ने कहा, यह नेशनल कॉन्फ्रेंस का अंदरूनी मामला है। मैंने पहले भी कहा था कि उनके भीतर भारी गुटबाजी है, जो अब खुलकर सामने आ रही है। पार्टी के भीतर एक नाराज वर्ग लगातार यह मांग कर रहा है कि अब परिवार का शासन और वंशवाद नहीं चलेगा। मंगलवार को शपथ ग्रहण समारोह के बाद जिस तरह से असंतुष्ट गुट के अलग-अलग बयान और प्रदर्शन सामने आए हैं, उससे यह साफ हो गया है।
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