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Jammu News: मकर संक्रांति पर मंदिरों में उमड़ा आस्था का सैलाब
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श्रद्धालुओं ने पवित्र सरोवरों में स्नान कर की पूजा-अर्चना
नौनाथ आश्रम में सत्संग कर सुभाष शास्त्री ने बांटा ज्ञान
संवाद न्यूज एजेंसी
सांबा। मकर संक्रांति के पावन पर्व पर जिले में आस्था और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला। भोर से ही धार्मिक स्थलों में बने सरोवरों में पुण्य स्नान के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गईं। श्रद्धालुओं ने मंदिरों में माथा टेककर पूजा-अर्चना की। नौनाथ श्री अखंड परमधाम आश्रम में सत्संग करवाया गया। डुग्गर प्रदेश के आत्मवेत्ता संत सुभाष शास्त्री ने संगत को बताया कि मकर संक्रांति पर धार्मिक महीने की शुरुआत होती है। इसका आध्यात्मिक मतलब इस दिन सूर्यदेव मकर राशि में प्रवेश करते हैं। इस संक्रांति पर दान पुण्य का विशेष महत्व होता है जो व्यक्ति इस दिन दान पुण्य करता है वह पापों से मुक्त हो जाता है। सत्संग सुनने से मन तृप्त होता है। सुभाष शास्त्री ने कहा कि यदि हम पाशविक विचारों को त्याग सकें तो दैवी विचारधारा खुद-बखुद हममें प्रवाहित होने लगेगी। अपने विचार, शब्द, कर्म, चरित्र और मन पर सदैव नजर रखो। बुदि्ध के द्वार बंद मत रखो। अज्ञान का पर्दा हटा दो, दैवी विचारधारा में स्नान करो तो स्थायी शांति को उपलब्ध हो जाओगे। शास्त्री ने कहा कि प्रभु में बिना शर्त विश्वास रखो। बिना अहंकार के सेवा करने से ईश्वर प्रसन्न होते हैं। पवित्र हृदय ईश्वर का मंदिर होता है। ईश्वर प्रेम है और जहां प्रेम है वहीं ईश्वर मौजूद हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
सांबा। मकर संक्रांति के पावन पर्व पर जिले में आस्था और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला। भोर से ही धार्मिक स्थलों में बने सरोवरों में पुण्य स्नान के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गईं। श्रद्धालुओं ने मंदिरों में माथा टेककर पूजा-अर्चना की। नौनाथ श्री अखंड परमधाम आश्रम में सत्संग करवाया गया। डुग्गर प्रदेश के आत्मवेत्ता संत सुभाष शास्त्री ने संगत को बताया कि मकर संक्रांति पर धार्मिक महीने की शुरुआत होती है। इसका आध्यात्मिक मतलब इस दिन सूर्यदेव मकर राशि में प्रवेश करते हैं। इस संक्रांति पर दान पुण्य का विशेष महत्व होता है जो व्यक्ति इस दिन दान पुण्य करता है वह पापों से मुक्त हो जाता है। सत्संग सुनने से मन तृप्त होता है। सुभाष शास्त्री ने कहा कि यदि हम पाशविक विचारों को त्याग सकें तो दैवी विचारधारा खुद-बखुद हममें प्रवाहित होने लगेगी। अपने विचार, शब्द, कर्म, चरित्र और मन पर सदैव नजर रखो। बुदि्ध के द्वार बंद मत रखो। अज्ञान का पर्दा हटा दो, दैवी विचारधारा में स्नान करो तो स्थायी शांति को उपलब्ध हो जाओगे। शास्त्री ने कहा कि प्रभु में बिना शर्त विश्वास रखो। बिना अहंकार के सेवा करने से ईश्वर प्रसन्न होते हैं। पवित्र हृदय ईश्वर का मंदिर होता है। ईश्वर प्रेम है और जहां प्रेम है वहीं ईश्वर मौजूद हैं।