Amarnath Yatra 2026: अमरनाथ यात्रा से पहले हाईवे पर बड़ा इंतजाम, जाम और भूस्खलन से मिलेगी राहत
जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर जाम और भूस्खलन के जोखिम को कम करने के लिए एनएचएआई ने मरम्मत और सुरक्षा कार्य तेज कर दिए हैं।
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भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने जम्मू से श्रीनगर तक 260 किलोमीटर लंबे नेशनल हाईवे पर जाम और भूस्खलन के जोखिम को कम करने का काम तेज कर दिया है। श्री अमरनाथ यात्रा से पहले सभी मरम्मत कार्य पूरे होने हैं।
नेशनल हाईवे में चप्पे-चप्पे पर भारी मशीनरी तैनात की गई है। टोल बैरियर पर खड़ी एंबुलेंस को तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं। एंबुलेंस में आवश्यक सुधार कर इन्हें प्राथमिक उपचार देने के तौर पर तैयार किया जा रहा है। एनएचएआई नेशनल हाईवे पर किए जा रहे कार्याें की जानकारी लगातार केंद्र को भेज रहा है। अब तक पूरे किए गए कार्याें की सूची भी सड़क परिवहन मंत्रालय से साझा की जा रही है। हादसे के दौरान सबसे पहले मददगार साबित होने वाले नंबर 1033 के बोर्ड जगह-जगह लगाए गए हैं। एनएचएआई ने भारी मशीनों को भूस्खलन संभावित क्षेत्र पर पहुंचा दिया है। पूरी यात्रा के दौरान ये मशीनें यहीं खड़ी रहेंगी। नेशनल हाईवे निर्माण में जुटी कंपनियों को अतिरिक्त इंतजाम करने के निर्देश दिए गए हैं। उधमपुर-रामबन-बनिहाल-काजीगुंड तक अतिरिक्त मशीनें तैनात की जा रही हैं।
एनएचएआई प्रबंधन ने श्री अमरनाथ यात्रा की समीक्षा की है। तैयार प्लान को अमल में लाया जा रहा है। उधमपुर से बनिहाल के बीच आने वाली सुरंगों के मुख्य द्वार को भी रिपेयर कर लिया है। बीते साल मानसून के दौरान सुरंग के बाहर कई बार भूस्खलन होने से यातायात बाधित हुआ था। रामबन में अत्यधिक भूस्खलन संभावित क्षेत्र में रिपेयर का काम किया जा रहा है।
जहां खिसक सकती हैं चट्टानें, वहां कर रहे रिपेयर
एनएचएआई के क्षेत्रीय अधिकारी आरएस यादव ने बताया कि अमरनाथ यात्रा की तैयारी के मद्देनजर भूस्खलन प्रभावित इलाकों को चिह्नित किया गया है। इन इलाकों में पहले से ही भारी मशीनों को तैनात किया जा रहा है। जिन क्षेत्रों में बड़ी चट्टानें खिसकने की संभावना है, उन्हें दुरुस्त किया जा रहा है। इस क्रम में रामबन क्षेत्र में विशेष अभियान चलाया गया है। जबकि दूसरी जगहों पर भारी मशीनों को भेजा जा रहा है। एनएचएआई ने मशीनों को 10 से 15 किलोमीटर के दायरे में तैनात किया है, ताकि हादसा होने की स्थिति में 45 से 60 मिनट में ये मशीनें प्रभावित क्षेत्र तक पहुंच जाएं।