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Jammu News: दांतों व भाषा की भी डॉक्टर... फ्री कैंप लगाने के साथ ही डोगरी को दे रहीं बढ़ावा
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- अब तक सौ से ज्यादा कैंप लगा चुकीं, वर्तमान में आईडीए जम्मू शाखा की उपाध्यक्ष हैं डॉ. हिमजा
जम्मू। डॉ. हिमजा मेंगी दांतों की डॉक्टर हैं। वे फ्री मेडिकल कैंप लगाती हैं। साथ ही डोगरी गायन और लेखन के जरिए लोक भाषा को भी बढ़ावा देने के काम में जुटी हैं।
कठुआ केंद्रीय विद्यालय पढ़ाई पूरी करके डॉ. हिमजा ने सुंदरनगर (हिमाचल प्रदेश) से बीडीएस किया। इसके बाद सिक्किम मणिपाल यूनिवर्सिटी से हेल्थ केयर में मास्टर्स की डिग्री ली। 2011 में दंत चिकित्सा की प्रैक्टिस शुरू की थी और आज वे हर माह मेडिकल कैंप लगाती हैं ताकि जो लोग पैसे न होने की वजह से दांतों का इलाज नहीं करा पाते, उनकी मदद हो सके। पलाक्षा फाउंडेशन के जरिए अब तक सौ से भी अधिक कैंप लगा चुकी हैं।
हिमजा बताती हैं कि स्कूली पढ़ाई के दौरान ही डोगरी गायन और गीत लिखने का शौक पैदा हुआ। वे सिंगिंग और डिबेट में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती थीं। डॉक्टरी के पेशे के बीच भी उन्होंने इस शौक को जिंदा रखा। रेडियो पर भी गाया। वर्तमान में इंडियन डेंटल एसोसिएशन जम्मू शाखा की उपाध्यक्ष के रूप में काम कर रहीं हिमजा के अनुसार कोरोना के दौरान डोगरी गीत जम्मू मेरी जान को खूब सराहा गया।
करवाचौथ पर पांच लाख लोगों तक पहुंचाई बात
डॉ. मेंगी के अनुसार करवाचौथ पर डोगरी में कही गई उनकी बात को बेटी ने रिकॉर्ड कर लिया। इसे सोशल मीडिया पर साझा किया, जहां पांच लाख लोगों ने इसे देखा। वहीं बुग्गा व्रत पर उनकी कही बात 30 हजार से अधिक लोगों को तक पहुंची। बकौल हिमजा जिस तरह की प्रतिक्रिया उनके डोगरी गायन और गीतों के लिए मिल रही है, उससे साफ जाहिर है कि आज के युवा अपनी जड़ों से जुड़ना चाहते हैं।
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जम्मू। डॉ. हिमजा मेंगी दांतों की डॉक्टर हैं। वे फ्री मेडिकल कैंप लगाती हैं। साथ ही डोगरी गायन और लेखन के जरिए लोक भाषा को भी बढ़ावा देने के काम में जुटी हैं।
कठुआ केंद्रीय विद्यालय पढ़ाई पूरी करके डॉ. हिमजा ने सुंदरनगर (हिमाचल प्रदेश) से बीडीएस किया। इसके बाद सिक्किम मणिपाल यूनिवर्सिटी से हेल्थ केयर में मास्टर्स की डिग्री ली। 2011 में दंत चिकित्सा की प्रैक्टिस शुरू की थी और आज वे हर माह मेडिकल कैंप लगाती हैं ताकि जो लोग पैसे न होने की वजह से दांतों का इलाज नहीं करा पाते, उनकी मदद हो सके। पलाक्षा फाउंडेशन के जरिए अब तक सौ से भी अधिक कैंप लगा चुकी हैं।
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हिमजा बताती हैं कि स्कूली पढ़ाई के दौरान ही डोगरी गायन और गीत लिखने का शौक पैदा हुआ। वे सिंगिंग और डिबेट में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती थीं। डॉक्टरी के पेशे के बीच भी उन्होंने इस शौक को जिंदा रखा। रेडियो पर भी गाया। वर्तमान में इंडियन डेंटल एसोसिएशन जम्मू शाखा की उपाध्यक्ष के रूप में काम कर रहीं हिमजा के अनुसार कोरोना के दौरान डोगरी गीत जम्मू मेरी जान को खूब सराहा गया।
करवाचौथ पर पांच लाख लोगों तक पहुंचाई बात
डॉ. मेंगी के अनुसार करवाचौथ पर डोगरी में कही गई उनकी बात को बेटी ने रिकॉर्ड कर लिया। इसे सोशल मीडिया पर साझा किया, जहां पांच लाख लोगों ने इसे देखा। वहीं बुग्गा व्रत पर उनकी कही बात 30 हजार से अधिक लोगों को तक पहुंची। बकौल हिमजा जिस तरह की प्रतिक्रिया उनके डोगरी गायन और गीतों के लिए मिल रही है, उससे साफ जाहिर है कि आज के युवा अपनी जड़ों से जुड़ना चाहते हैं।