फारूक अब्दुल्ला अटैक केस में बड़ा अपडेट: कोर्ट ने आरोपी कमल जम्वाल को भेजा जेल, छह तक न्यायिक हिरासत में
जम्मू में फारूक अब्दुल्ला पर हमले के आरोपी कमल जम्वाल को अदालत ने जांच अधूरी होने के चलते 6 अप्रैल तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
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जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला पर हमले के आरोपी कमल सिंह जम्वाल को छह अप्रैल तक की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। आरोपी को सोमवार को डिप्टी एसपी और एसआईटी सदस्य अरविंद कुमार संब्याल ने जम्मू के सब-जज (न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी) जीवन कुमार शर्मा की अदालत में पेश किया। पुलिस ने मामले की जांच अभी अधूरी हाेने का हवाला देते हुए उसके लिए न्यायिक हिरासत की मांग की थी।
रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री पर विचार करने के बाद सब-जज जीवन कुमार शर्मा ने टिप्पणी की कि मामले की जांच अभी पूरी नहीं हुई है और आरोपी को जमानत पर रिहा नहीं किया गया है। ऐसे में अदालत ने पुलिस के आवेदन को स्वीकार करते हुए आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेजे जाने और जम्मू जिला जेल में रखे जाने के आदेश दिए। अदालत ने आगे जिला जेल अधीक्षक को रिमांड अवधि के दौरान आरोपी को सभी बुनियादी सुविधाएं प्रदान करने और उसकी नियमित चिकित्सकीय जांच कराने के भी निर्देश दिए। साथ ही आरोपी कमल को छह अप्रैल या उससे पहले सक्षम मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किए जाने के लिए भी कहा है।
बता दें कि डॉ. फारूक पर जम्मू में एक शादी समारोह शामिल होने के दौरान आरोपी ने फायरिंग की थी। पुरानी मंडी के रहने वाले आरोपी कमल जम्वाल को 11 मार्च को मौके पर गिरफ्तार कर अदालत के समक्ष पेश किया गया था। गंग्याल पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया था।
आतंक से जुड़े मामले में जब्त कार की कस्टडी देने से कोर्ट का इन्कार
जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने आतंकवाद से जुड़े मामले में जब्त कार की कस्टडी देने से इन्कार कर दिया है। आरोप है कि इस कार को हथियार और गोला-बारूद ले जाने के लिए इस्तेमाल किया गया था। कोर्ट ने कहा कि अपीलकर्ता पहले ही वाहन का कब्जा पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिये किसी और को सौंप चुका था। ऐसे में उसे कस्टडी मांगने का कोई अधिकार नहीं।
न्यायमूर्ति सिंधु शर्मा और न्यायमूर्ति शहजाद अजीम की डिवीजन बेंच ने यह फैसला रुबीना बेगम की ओर से दायर याचिका पर सुनाया है। यह याचिका कुपवाड़ा की विशेष अदालत के आदेश के खिलाफ दायर की गई थी। इसमें आर्म्स एक्ट और यूएपीए के प्रावधानों के तहत जब्त वाहन को छोड़ने की उनकी अर्जी खारिज कर दी गई थी।
अदालत ने वाहन के आतंकी गतिविधियों से हुई कमाई के मुद्दे पर भी विचार किया। टिप्पणी की कि जांच एजेंसी को यूएपीए के अध्याय-5 के तहत तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए थी। कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के इस विचार को भी सही ठहराया कि यह अर्जी रजिस्टर्ड मालिक के जरिये वाहन को छुड़ाने का एक गलत प्रयास था।
इससे अभियोजन पक्ष के मामले को नुकसान पहुंच सकता था। यह मानते हुए कि अपीलकर्ता के पास अपील करने का अधिकार नहीं। हाईकोर्ट ने अपील के साथ ही उससे जुड़ी अन्य अर्जियों को भी खारिज कर दिया। कोर्ट ने इस मामले में आदेश की प्रति एसएसपी कुपवाड़ा को भी अनुपालन के लिए भेजे जाने के निर्देश दिए। जेएनएफ