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Jharkhand: हाथियों के बढ़ते हमलों पर सख्त हुए CM हेमंत, 12 दिन में मुआवजा व तेज रेस्क्यू सिस्टम के दिए निर्देश

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची Published by: राँची ब्यूरो Updated Sat, 14 Feb 2026 10:24 PM IST
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सार

झारखंड में बढ़ते मानव-हाथी संघर्ष को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उच्चस्तरीय बैठक कर वन विभाग को सख्त निर्देश दिए। उन्होंने जान-माल की सुरक्षा, त्वरित मुआवजा और प्रभावी एलीफेंट रेस्क्यू सिस्टम विकसित करने पर जोर दिया।

CM Hemant Soren held high-level meeting regarding increasing human-elephant conflict in Jhar
CM हेमंत सोरेन ने उच्चस्तरीय बैठक कर वन विभाग को सख्त निर्देश दिए। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन शनिवार को कांके रोड स्थित मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय में वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की। बैठक में उन्होंने राज्य में जंगली हाथियों के बढ़ते हमलों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए आम जनमानस की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश दिए।

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मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि हाथियों के हमलों से एक भी व्यक्ति की मृत्यु न हो, यह वन विभाग हर हाल में सुनिश्चित करे। उन्होंने निर्देश दिया कि जिन क्षेत्रों में हाथियों द्वारा लगातार जान-माल की क्षति पहुंचाई जा रही है, वहां तत्काल प्रभाव से प्रभावी बचाव एवं सुरक्षा उपाय किए जाएं।

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27 लोगों की मौत, कई जिले प्रभावित
मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले कुछ महीनों में रामगढ़, बोकारो, हजारीबाग, चाईबासा, जमशेदपुर, लोहरदगा, गुमला और दुमका सहित कई जिलों में हाथियों के हमलों से लगभग 27 लोगों की मृत्यु हो चुकी है, जो अत्यंत गंभीर विषय है। उन्होंने अधिकारियों से पूछा कि जब झारखंड में बड़ी संख्या में हाथी विचरण करते हैं और कई बार भटककर ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंच जाते हैं, तो अब तक प्रभावी तंत्र क्यों विकसित नहीं किया गया।

एलीफेंट रेस्क्यू टीम और क्विक रिस्पांस सिस्टम
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि प्रभावित क्षेत्रों के ग्रामीणों को विशेष तकनीकी प्रशिक्षण देकर ‘एलीफेंट रेस्क्यू टीम’ तैयार की जाए। ग्रामीण क्षेत्रों से हाथियों को सुरक्षित तरीके से हटाने के लिए ठोस रणनीति बनाई जाए। उन्होंने मशाल जलाने के लिए डीजल, किरासन तेल, पुराने टायर, टॉर्च, सोलर सायरन आदि उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए, ताकि ग्रामीणों को हाथियों को भगाने में सुविधा हो।

वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि हाथी रेस्क्यू के लिए एक बेहतर क्विक रिस्पांस मैकेनिज्म तैयार किया जा रहा है। इसके तहत छह कुनकी हाथी मंगाए जा रहे हैं, जिनकी मदद से ट्रैकिंग सिस्टम को मजबूत किया जाएगा। साथ ही एलीफेंट रेस्क्यू विशेषज्ञों की सेवाएं भी ली जाएंगी।

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12 दिन में मुआवजा देने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिया कि किसी भी प्रकार की जान-माल की क्षति की स्थिति में मुआवजा देने में विलंब न हो। यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है, तो घटना के 12 दिनों के भीतर पीड़ित परिवार को पूरी मुआवजा राशि उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा कि एनिमल अटैक से संबंधित मौजूदा मुआवजा नियमों की समीक्षा कर आवश्यक संशोधन किए जाएं, ताकि प्रभावित परिवारों को शीघ्र राहत मिल सके। उन्होंने जोर दिया कि केवल नियमों के तहत राहत देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है।

एलिफेंट कॉरिडोर की मैपिंग के निर्देश
मुख्यमंत्री ने पिछले पांच वर्षों में हुई मौतों और दिए गए मुआवजों का विस्तृत डेटा उपलब्ध कराने को कहा। साथ ही राज्य के सभी एलिफेंट कॉरिडोर की मैपिंग कराने का निर्देश दिया, ताकि मानव-हाथी संघर्ष को कम करने की दीर्घकालिक रणनीति बनाई जा सके।

बैठक में वन विभाग ने जानकारी दी कि हजारीबाग क्षेत्र में पांच हाथियों का एक झुंड अत्यधिक आक्रामक है। इनके हमलों को रोकने के लिए विभाग ने 70 सदस्यीय टीम तैनात की है और क्षेत्र में अलर्ट मोड पर कार्य किया जा रहा है।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि मानव-हाथी संघर्ष के मामलों को गंभीरता से लेते हुए सरकार पीड़ितों को त्वरित एवं न्यायसंगत सहायता देने के लिए प्रतिबद्ध है।

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