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Jharkhand: नशा मुक्त अभियान को लेकर प्रोजेक्ट भवन में आयोजित की गई कार्यशाला, 10 जून से 26 जून तक चलेगा अभियान

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची Published by: शबाहत हुसैन Updated Tue, 10 Jun 2025 08:06 PM IST
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सार

Jharkhand: स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवाओं और लोगों को नशे की लत से बाहर निकालना है। आज से इस अभियान की शुरुआत हो रही है। अभियान के तहत सभी जिलों में प्रचार वाहन जाएंगे, स्कूलों और कॉलजों में जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे।

Jharkhand: Workshop organized in Project Bhawan regarding drug-free campaign
शपथ लेते सभी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने झारखंड को नशा मुक्त बनाने का संकल्प लिया है और हमलोग उनके इस संकल्प को पूरा करने के लिए दिन रात लगे हुए हैं। इसी के तहत यह नशा मुक्ति अभियान चलाया जा रहा है, जो 10 जून से शुरू हो चुका है और इसका भव्य समापन 26 जून को मोरहाबादी मैदान में किया जाएगा। इसी के तहत इस कार्यशाला का भी आयोजन किया जा रहा है।
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उन्होंने कहा कि सभी जिलों में जागरूकता लाने के उद्देश्य से जागरूकता प्रचार वाहनों को भी रवाना किया जा रहा है, जो सभी जिलों में जाकर लोगों को नशा के दुष्प्रभाव के बारे में जागरूक करेगा। डॉ अंसारी मंगलवार को प्रोजेक्ट भवन में नशा मुक्ति अभियान के तहत आयोजित कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने गृह विभाग और सूचना जनसंपर्क विभाग के सहयोग से तैयार मादक पदार्थों के दुरुपयोग से संबंधित पुस्तिका का विमोचन भी किया, साथ ही कार्य़शाला में स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी सहित उपस्थित पदाधिकारी एवं कर्मचारियों ने नशा मुक्त भारत बनाने हेतु शपथ ली। डॉ अंसारी ने कार्यक्रम के उपरांत प्रचार वाहनों को हरी झंडी दिखा कर रवाना भी किया । 
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नशा मुक्ति अभियान का उद्देश्य युवाओं को नशे की लत से बाहर निकालना
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवाओं और लोगों को नशे की लत से बाहर निकालना है। आज से इस अभियान की शुरुआत हो रही है। अभियान के तहत सभी जिलों में प्रचार वाहन जाएंगे, स्कूलों और कॉलजों में जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे। झारखंड के विभिन्न जिलों खासकर रांची,खूंटी में अफीम की खेती की रोकथाम हेतु कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा कि निषिद्ध मादक पदार्थों के दुरुपयोग पर रोक लगाना बहुत जरूरी है। हमारा प्रयास जारी है और हमने काफी हद तक इसमें रोक लगाने में सफलता भी पाई है,लेकिन हमारा लक्ष्य अफीम की खेती को पूरी तरह से खत्म करना है। अफीम की खेती का बड़े पैमाने पर विनष्टीकरण किया गया है, यह सरकार की उपलब्धि है।नशा सामाजिक, मानसिक और आर्थिक रूप से लोगों को बर्बाद कर रहा है।

नशे के दुष्परिणाम के बारे में जागरूक करने की है जरूरत
डॉ इरफान अंसारी ने कहा कि राज्य में 10,134 मेडिकल स्टोर में 4,000 से अधिक स्टोरों में सीसीटीवी का प्रावधान किया जा चुका है, शेष में लगाने की प्रक्रिया चल रही है। झारखंड में  सबसे ज्यादा युवा नशे की चपेट में है। हमें झारखंड के लोगों को नशे की चपेट से बाहर निकलना है। उन्होंने गुटखा खाने के दुष्परिणाम के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि लोगों को नशे के दुष्परिणाम के बारे में जागरूक करने की जरूरत है। 

स्वास्थ्य इन्फ्रास्ट्रक्चर्स को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है हमारी सरकार
डॉ इरफान अंसारी ने कहा झारखंड को जल्द ही हम रिम्स 2 की सौगात देने जा रहे हैं। साथ ही यहां 6 नये मेडिकल कॉलेज और 2 टेस्टिंग लैब भी खुलेंगे। ताकि यहां के लोगों को बाहर इलाज के लिए परेशान न होना पड़े। उन्होंने कहा कि नशा सभी बीमारियों की जड़ है, नशे के चक्कर में पड़ कर युवा कम उम्र में ही इसकी गिरफ्त में पड़ कर अपनी जिंदगी बर्बाद कर रहे हैं। हमें उन्हें जागरूक करना होगा। यह सिर्फ 14 दिन का कार्यक्रम नहीं है बल्कि यह कार्यक्रम पूरे साल भर चलना चाहिए। । मीडिया से अनुरोध है कि जागरूकता अभियान को फोकस करें और लोगों को भी जागरूक करें। 

लोगों को जागरूक करने में मीडिया का रोल अहम
अपर मुख्य सचिव अजय कुमार ने कहा कि मादक पदार्थों का दुरुपयोग पूरे समाज में फैल गया है। युवा वर्ग इसके सेवन के आदी हो चुके हैं। ये कैंसर की तरह समाज में फैल रहा है, फिर भी हम इस खुल कर बात नहीं कर पा रहे। हमें लोगों को इसके दुष्परिणाम के बारे में बताना होगा। जनजागरूकता के माध्यम से हमें उन युवाओं और बच्चों को समझाना है न कि डंडे के माध्यम से। हमें हाई स्कूल स्तर से ही इस दिशा में काम करने की जरूरत है। छोटी उम्र के बच्चों और युवाओं के बीच जागरूकता अभियान चलाना है।

उन्होंने बताया कि इस कार्यशाला के माध्यम से जानकारी दी जाएगी कि कैसे नशा मुक्ति से रोकने हेतु कार्य करना है। बड़े शहरों में जैसे रांची ,जमशेदपुर, धनबाद, पलामू,बोकारो आदि में ड्रग्स का कारोबार बढ़ रहा है, इनके नेटवर्क को तोड़ने की जरूरत है। जो सिर्फ थाना स्तर पर संभव नहीं है, इस पर जिला और मुख्यालय स्तर पर काम करने की जरूरत है। मीडिया का भी इसमें अहम रोल है ताकि ऐसे लोगों के चेहरों को उजागर किया जा सके, जो नशे के कारोबार में लिप्त हैं।

उन्होंने कहा कि ड्रग्स के संबंध में कानून के बारे में जानकारी दी जाएगी कि दवा दुकान से किन परिस्थिति में आपको ड्रग्स दी जाएगी। अभी दवा दुकानों में सीसीटीवी लगाने की कार्ययोजना है। जल्द ही विभाग एक पोर्टल तैयार करेगा जिसमें सभी रेगुलेटेड दवाओं की जानकारी समाहित रहेगी। ड्रग्स लेने वाले लोगों का ट्रीटमेंट भी किया जाएगा। राज्य के दो महत्वपूर्ण संस्थान जिसमें एक रिनपास और दूसरा सीआईपी में ऐसे लोगों का ट्रीटमेंट कराया जाता है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय पर कार्यशाला का आयोजन जिला और प्रखंड स्तर भी होगा। 
 
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अफीम की खेती के विनष्टीकरण में राज्य सरकार ने पाई है बड़ी सफलता
गृह विभाग की प्रधान सचिव वंदना दादेल ने कहा कि झारखंड में निषिद्ध मादक पदार्थों के दुरुपयोग की समस्या से हम सब परिचित हैं। नशा में पड़ कर लोग वित्तीय तनाव, घरेलू हिंसा और जैसी समस्याओं का सामना करने लगते हैं, इतना ही नहीं आपराधिक गतिविधियों में भी शामिल हो जाते हैं, जो समाज और कानून व्यवस्था के लिए चुनौती पैदा करती है। युवाओं में इसका सेवन अधिक देखने को मिलता है इस बारे में हमें खुल कर बात करनी होगी। हम सबों को एक साथ मिल कर इस समस्या को जड़ से उखाड़ फेंकने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अफीम की खेती मुख्य रूप से झारखंड के खूंटी,रांची, लातेहार एवं अन्य जिलों में होती है, प्रशासन के प्रयास से इस वर्ष पाँच गुना अधिक विनष्टीकरण किया है। दृढ़ संकल्प के कारण ही हमने इतनी बड़ी सफलता पाई है। सभी विभागों को एक साथ मिल कर इस क्षेत्र में काम करना होगा। शिक्षा विभाग के द्वारा स्कूलों में रैली, खेल विभाग द्वारा क्रीड़ा प्रशिक्षण केंद्र में और पर्यटन केंद्रों में भी जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। 

नशे के सौदागरों को डाला जाएगा जेल में
डीजीपी अनुराग गुप्ता ने कहा कि हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। जो खुशी की बात है। झारखंड में ड्रग्स की बात की जाए तो झारखंड अफीम के लिए एक बड़ा केंद्र बन चुका है। शहरी क्षेत्रों के बच्चे ब्राउन शुगर, हेरोइन एवं अन्य ड्रग्स की चपेट में आ चुके हैं, जो चिंता की बात है।  उन्होंने कहा कि हमें सबसे पहले सप्लाई रिडक्शन और  डिमांड रिडक्शन पर ध्यान देना है, क्योंकि अगर सप्लाई में कमी होगी तभी डिमांड को कम किया जा सकेगा। झारखंड से लगे राज्यों से गांजा एवं अन्य मादक पदार्थों का सप्लाई होती है, इस सप्लाई चेन को रोकने की आवश्यकता है। झारखंड में अप्रत्याशित अफीम की खेती को नष्ट करने का काम हमने किया है। अब अफीम की खेती करने वाले लोगों को सख्त सजा देने का समय आ गया है, ताकि लोग खेती करना बंद करें। 

स्कूलों एवं कॉलेजों में चलाया जाएगा जागरूकता अभियान
प्रधान सचिव उच्च शिक्षा राहुल पुरवार ने कहा कि स्कूलों एवं कॉलेजों के आस पास नशा के व्यापार  को पूरी तरह से बंद करने की जरूरत है। पिछले 2-3 सालों से गृह विभाग द्वारा नशा के खिलाफ जो आयोजन किये जा रहे हैं। उसका सकारात्मक प्रभाव दिख रहा है। हम एक्सेस, तकनीक और बिहेवियर चेंज के द्वारा इस सप्लाई चेन को रोक सकते हैं। इस बिहेवियर पैटर्न पर स्टडी करने की जरूरत है कि आखिर किन कारणों से बच्चे इसके सेवन के आदी हो जाते हैं। इस संबंध में हमें एजुकेशन प्रोग्राम चलाने की जरूरत है। नशे के कारोबार को बच्चों तक की पहुंच से रोकना होगा। 

नशे के कारोबार की पहुंच बच्चों तक रोकने के लिए सभी विभागों को मिलकर करना होगा काम
प्रधान सचिव नगर विकास सुनील कुमार ने कहा कि कई बच्चे मानसिक तनाव के कारण ,सामाजिक परिवेश के कारण भटक जाते हैं और नशे के आदी हो जाते हैं। हमें सभी विभागों के साथ समन्वय बनाते हुए इसके सभी डायमेंशन पर काम करने की जरूरत है। पुलिस विभाग अपना काम करता है। आज के इस कार्यशाला में हमलोग विचार कर रहे हैं कि लोगों को किस तरह जागरूक करना है, साथ ही सभी विभागों और इस क्षेत्र में काम कर रहे लोगों को भी जागरूक करने की आवश्यकता है और उन्हें बताने की जरूरत है कि इसकी रोकथाम के लिए आपकी सहभागिता बहुत जरूरी है। इसी उद्देश्य से इस कार्यशाला का आयोजन किया गया है।

मादक पदार्थों के सप्लाई चेन को होगा तोड़ना
अपराध अनुसंधान विभाग, पुलिस महानिरीक्षक, असीम विक्रांत मिंज ने पीपीटी के माध्यम से बताया कि मादक पदार्थों के दुरुपयोग के सिलसिले में झारखंड के किस जिले में सबसे अधिक युवा वर्ग नशा का उपयोग करते हैं। इसमें रांची, खूंटी, चाईबासा,चतरा,हजारीबाग, लातेहार और पलामू में सबसे ज्यादा युवा नशे में संलिप्त हुए हैं। अफीम के खेती में उन्होंने पीपीटी प्रेजेंटेशन के माध्यम से झारखंड के विभिन्न जिलों में आपराधिक मामलों और नशीले पदार्थों के दुरुपयोग के मामले ने दर्ज केस के बारे में जानकारी दी। अफीम के साथ-साथ गांजा ब्राउन सुगर के मामले भी गंभीर हैं।

पुलिस ने समय समय पर अभियान चला कर अफीम की खेती को नष्ट किया है। ब्राउन सुगर के साथ अपराधियों को गिरफ्तार किया है। उन्होंने झारखंड में नशीले पदार्थों की सप्लाई की रूप रेखा बतायी कि किन स्थानों से सप्लाई किया जाता है। उन्होंने बताया की अब तक कितने लोग जो नशे के कारोबार में लिप्त हैं उनकी गिरफ्तारी हुई है। अफीम सबसे मुख्य मादक पदार्थ है उसके बाद गांजा ,ब्राउन सुगर और अन्य मादक पदार्थ हैं।

खूंटी अफीम उत्पादन के क्षेत्र में सबसे आगे है। उसके बाद फिर अन्य जिले आते हैं। उन्होंने बताया कि अफीम की खेती का विनिष्टीकरण भी प्रशासन की ओर से लगातार की जा रही है और हमने कई एकड़ अफीम की खेती नष्ट की है। पूरे राज्य में 27015.035 एकड़ भूमि पर अवैध अफीम की खेती का विनष्टीकरण किया है। वहीं मादक पदार्थों की अवैध तस्करी करने वालों की सम्पत्ति जब्त करने का प्रावधान है और प्रशासन ने कई लोगों की सम्पत्ति जब्त की है। उन्होंने एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स के बारे में जानकारी दी। उन्होंने सभी जिलों में सभी विभाग ,एनजीओ और स्थानीय जनप्रतिनिधि के सहयोग से जागरूकता अभियान चलाने का निर्णय लिया है। 

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अफीम विनष्टीकरण के मामले में झारखंड ने बेहतर काम किया, केंद्र ने की सराहना
एनसीबी रांची जोनल अभिषेक आनंद ने बताया मादक पदार्थों का इतिहास हजारों वर्ष पुराना है। आज के परिपेक्ष्य में देखें तो इसका दुरुपयोग बढ़ता जा रहा है। दुनिया के सभी देशों ने इसकी विनाशकारी को देखते हुए कड़े कानून बनाने का निर्णय लिया है। झारखंड सरकार द्वारा अफ़ीम विनष्टीकरण के मामले में झारखंड में बेहतर काम किया है। केंद्र ने झारखंड के प्रयासों की सराहना भी की है। पूरे भारत में जितना ड्रग विनष्टीकरण किया गया है, उसमें झारखंड का अकेले 20 प्रतिशत हिस्सा है। जागरूकता लाना हमारा उद्धेश्य है। ताकि लोगों में नशा के प्रति घृणा का भाव उत्पन्न हो। 

रिनपास में नशा के आदी लोगों का इलाज कर नशा छुड़ाने में की जाती मदद
रिनपास के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ सजल आशीष नाग ने बताया कि कैसे और किन कारणों से युवा ड्रग्स की शुरुआत करते हैं। माहौल और गलत संगत के कारण,तनाव के कारण जरूरत से ज्यादा पैसों की डिमांड करते हैं, ताकि नशे के सामान ले सकें। आसानी से उपलब्धता के कारण और इसके नुकसान के प्रति जानकारी नहीं होने के कारण भी ड्रग्स के आदी हो जाते हैं । उन्होंने बताया कि नशा लेने के कारण उनके व्यवहार में बदलाव आ जाता है।पढ़ाई में मन नहीं लगता है और आगे जाकर सुसाइडल टेंडेंसी आ जाती है। उन्होंने नशा से बचने के उपायों के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि रिनपास में नशा के आदी लोगों का इलाज कर नशा छुड़ाने में मदद की जाती है।l
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