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Jharkhand: 'पलाश ब्रांड' ने बदली किसानों की तकदीर, झारखंड का आम पहुंचा दुबई-लंदन, जानें कितना हुआ कारोबार?
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
Published by: राँची ब्यूरो
Updated Thu, 18 Jun 2026 02:14 PM IST
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सार
झारखंड का ‘पलाश’ मैंगो मार्केटिंग इनिशिएटिव ग्रामीण महिलाओं और किसानों के लिए आजीविका का मजबूत माध्यम बनकर उभरा है। बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत तैयार आम अब देश के बड़े बाजारों के साथ दुबई और लंदन जैसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच रहे हैं।
झारखण्ड मैंगो मार्केटिंग इनिशिएटिव से ग्रामीण महिलाओं की बदल रही तकदीर।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पलाश ब्रांड के तहत झारखण्ड मैंगो मार्केटिंग इनिशिएटिव ने ग्रामीण महिलाओं और किसानों की तकदीर बदल रही है। आज झारखण्ड के आम न केवल देश के बड़े रिटेल चेन पर बल्कि सात समंदर पार अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी अपनी मिठास घोल रहा है।
बता दें कि राज्य के करीब 1.86 लाख एकड़ क्षेत्र में आम के बगीचे लहलहा रहे हैं, जिससे लगभग 2.15 लाख ग्रामीण परिवारों को सीधे तौर पर स्थायी आजीविका और रोज़गार के अवसर मिले हैं। वर्तमान में लगभग 52,000 एकड़ के बागान पूरी तरह से तुड़ाई के लिए तैयार हैं, जिससे इस सीजन में करीब 50,000 मीट्रिक टन आम के उत्पादन का अनुमान है।
दुबई और लंदन तक पहुंचा आम
ग्रामीण महिलाओं की श्रम शक्ति का सम्मान के नारे के साथ ये दीदियां आम के कलेक्शन, ग्रेडिंग और पैकेजिंग से लेकर उनकी बिक्री और मार्केटिंग की कमान खुद संभाल रही हैं। जेएसएलपीएस द्वारा किसानों को सक्रिय फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन्स से जोड़ा गया।
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गौरतलब है कि चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में राज्य ने निर्यात के क्षेत्र में बड़ी सफलता हासिल की है। सिमडेगा जिले से जेबी एक्सपोर्टर्स के माध्यम से 1,580 किलोग्राम प्रीमियम आम सीधे लंदन (यूके) भेजे गए हैं। वहीं, रामगढ़ क्लस्टर से 1,500 मीट्रिक टन से अधिक आम दुबई (यूएई) निर्यात किए गए हैं। इस वैश्विक निर्यात पहल में सिमडेगा, रामगढ़ और पूर्वी सिंहभूम जैसे ज़िले अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। आम की गुणवत्ता और अंतरराष्ट्रीय मानकों को बनाए रखने के लिए ICAR-RCER, पलांडू द्वारा तकनीकी मार्गदर्शन और क्वालिटी प्रोटोकॉल प्रदान किया जा रहा है।
सुव्यवस्थित बाजार और रिटेल लिंकेज
आमों की गुणवत्ता के आधार पर बाजार को तीन श्रेणियों में विभाजित कर सुव्यवस्थित किया गया है, ताकि किसानों को अधिकतम लाभ मिल सके। ग्रेड-ए प्रीमियम क्वालिटी के इन आमों को APEDA प्रमाणित निर्यातकों के माध्यम से यूएई, सऊदी अरब और यूके जैसे देशों में निर्यात किया जा रहा है। साथ ही, घरेलू बाजार में इन्हें पलाश मार्ट और अपना मार्ट के आउटलेट्स पर 60 रुपये प्रति किलो की दर से सह-ब्रांडेड पैकेट में बेचा जा रहा है।
ये भी पढ़ें- झारखंड की विरासत को मिला कानूनी संरक्षण: प्रदेश के 11 उत्पादों को मिला जीआई टैग, वैश्विक पहचान की ओर बड़ा कदम
गुमला के FPOs ने अकेले अपना मार्ट को 2,000 किलो आम की आपूर्ति की है। ग्रेड-बी के तहत संगठित खुदरा बाजारों और पलाश के रिटेल चैनलों में बाजार दरों पर भेजा जा रहा है। ग्रेड-सी के तहत आम जनता तक पहुंच बनाने के लिए इन्हें स्थानीय बाजारों, पलाश कैनोपी कियोस्क, बस स्टैंडों, जिला मुख्यालयों और साप्ताहिक हाट-बाजारों के माध्यम से बेचा जा रहा है।
राज्य में सक्रिय लगभग 115 FPOs को पलाश मैंगो कैनोपी काउंटर्स से जोड़ा गया है, जो जिला-वार संग्रह और बिक्री का काम देख रहे हैं। इन काउंटर्स के माध्यम से अब तक झारखण्ड में लगभग 2,24,200 किलोग्राम आमों की बिक्री की जा चुकी है, जिससे ₹60.51 लाख से अधिक का कारोबार हुआ है। बाजार को और मजबूत करने के लिए ब्लॉक और जिला स्तर पर फार्मर्स मेला तथा बायर-सेलर मीट आयोजित की जा रही हैं। इसके अलावा, बाजार विस्तार के लिए ब्लिंकिट, रिलायंस फ्रेश और कशिश मॉल जैसे कॉर्पोरेट के साथ भी बातचीत अंतिम चरण में है।
बता दें कि राज्य के करीब 1.86 लाख एकड़ क्षेत्र में आम के बगीचे लहलहा रहे हैं, जिससे लगभग 2.15 लाख ग्रामीण परिवारों को सीधे तौर पर स्थायी आजीविका और रोज़गार के अवसर मिले हैं। वर्तमान में लगभग 52,000 एकड़ के बागान पूरी तरह से तुड़ाई के लिए तैयार हैं, जिससे इस सीजन में करीब 50,000 मीट्रिक टन आम के उत्पादन का अनुमान है।
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दुबई और लंदन तक पहुंचा आम
ग्रामीण महिलाओं की श्रम शक्ति का सम्मान के नारे के साथ ये दीदियां आम के कलेक्शन, ग्रेडिंग और पैकेजिंग से लेकर उनकी बिक्री और मार्केटिंग की कमान खुद संभाल रही हैं। जेएसएलपीएस द्वारा किसानों को सक्रिय फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन्स से जोड़ा गया।
गौरतलब है कि चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में राज्य ने निर्यात के क्षेत्र में बड़ी सफलता हासिल की है। सिमडेगा जिले से जेबी एक्सपोर्टर्स के माध्यम से 1,580 किलोग्राम प्रीमियम आम सीधे लंदन (यूके) भेजे गए हैं। वहीं, रामगढ़ क्लस्टर से 1,500 मीट्रिक टन से अधिक आम दुबई (यूएई) निर्यात किए गए हैं। इस वैश्विक निर्यात पहल में सिमडेगा, रामगढ़ और पूर्वी सिंहभूम जैसे ज़िले अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। आम की गुणवत्ता और अंतरराष्ट्रीय मानकों को बनाए रखने के लिए ICAR-RCER, पलांडू द्वारा तकनीकी मार्गदर्शन और क्वालिटी प्रोटोकॉल प्रदान किया जा रहा है।
सुव्यवस्थित बाजार और रिटेल लिंकेज
आमों की गुणवत्ता के आधार पर बाजार को तीन श्रेणियों में विभाजित कर सुव्यवस्थित किया गया है, ताकि किसानों को अधिकतम लाभ मिल सके। ग्रेड-ए प्रीमियम क्वालिटी के इन आमों को APEDA प्रमाणित निर्यातकों के माध्यम से यूएई, सऊदी अरब और यूके जैसे देशों में निर्यात किया जा रहा है। साथ ही, घरेलू बाजार में इन्हें पलाश मार्ट और अपना मार्ट के आउटलेट्स पर 60 रुपये प्रति किलो की दर से सह-ब्रांडेड पैकेट में बेचा जा रहा है।
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गुमला के FPOs ने अकेले अपना मार्ट को 2,000 किलो आम की आपूर्ति की है। ग्रेड-बी के तहत संगठित खुदरा बाजारों और पलाश के रिटेल चैनलों में बाजार दरों पर भेजा जा रहा है। ग्रेड-सी के तहत आम जनता तक पहुंच बनाने के लिए इन्हें स्थानीय बाजारों, पलाश कैनोपी कियोस्क, बस स्टैंडों, जिला मुख्यालयों और साप्ताहिक हाट-बाजारों के माध्यम से बेचा जा रहा है।
राज्य में सक्रिय लगभग 115 FPOs को पलाश मैंगो कैनोपी काउंटर्स से जोड़ा गया है, जो जिला-वार संग्रह और बिक्री का काम देख रहे हैं। इन काउंटर्स के माध्यम से अब तक झारखण्ड में लगभग 2,24,200 किलोग्राम आमों की बिक्री की जा चुकी है, जिससे ₹60.51 लाख से अधिक का कारोबार हुआ है। बाजार को और मजबूत करने के लिए ब्लॉक और जिला स्तर पर फार्मर्स मेला तथा बायर-सेलर मीट आयोजित की जा रही हैं। इसके अलावा, बाजार विस्तार के लिए ब्लिंकिट, रिलायंस फ्रेश और कशिश मॉल जैसे कॉर्पोरेट के साथ भी बातचीत अंतिम चरण में है।