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Congress Party : कांग्रेस विधायक दल के नेता को एक साल की सजा; 15 साल पुराने मामले में झारखंड कोर्ट का फैसला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
Published by: राँची ब्यूरो
Updated Mon, 04 May 2026 03:58 PM IST
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सार
Ranchi News: झारखंड के कांग्रेस विधायक प्रदीप यादव को 16 साल पुराने मामले में एक साल की सजा सुनाई गई है। हालांकि, अदालत ने उन्हें तुरंत सशर्त जमानत दे दी। वहीं, अन्य आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया। पढ़ें पूरी खबर...
कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
देशभर में जारी मतगणना के बीच झारखंड की राजनीति से बड़ी खबर सामने आई है। कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव को 16 साल पुराने मामले में अदालत ने दोषी करार देते हुए एक वर्ष की सजा सुनाई है। हालांकि, सजा सुनाए जाने के तुरंत बाद ही उन्हें सशर्त जमानत मिल गई, जिससे फिलहाल राहत मिल गई है।
विशेष अदालत ने सुनाया फैसला
यह फैसला दुमका एमपी-एमएलए विशेष अदालत ने सुनाया। मामला वर्ष 2010 का है, जब देवघर में सूखा संकट को लेकर आंदोलन और समाहरणालय घेराव किया गया था। उस प्रदर्शन में प्रदीप यादव की सक्रिय भूमिका बताई गई थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार, आंदोलन के दौरान प्रशासन ने कुछ कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया था, जिन्हें छुड़ाने की कोशिश की गई। इस दौरान सरकारी कार्य में बाधा उत्पन्न हुई, जिसके बाद देवघर नगर थाना में कांड संख्या 363/2010 दर्ज किया गया। इसी मामले में प्रदीप यादव समेत कई लोगों को आरोपी बनाया गया था।
सर्शत जमानत दी गई
अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 225 के तहत दोष सिद्ध पाते हुए उन्हें एक वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। यह फैसला विशेष न्यायाधीश मोहित चौधरी की अदालत ने दिया। हालांकि, सजा के तुरंत बाद ही उन्हें सशर्त जमानत प्रदान कर दी गई। उनके वकील ने फैसले के खिलाफ अपील और जमानत याचिका भी दायर कर दी है, जिससे आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। इस मामले में अन्य आरोपियों को राहत मिली है। साक्ष्य के अभाव में अदालत ने रणधीर सिंह समेत सभी अन्य आरोपियों को बरी कर दिया। अदालत ने माना कि उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं थे।
ये भी पढ़ें- Bihar News: मधुबनी में दर्दनाक हादसा; तालाब में डूबने से मासूम बच्ची की मौत, गांव में पसरा मातम
यह मामला लंबे समय से विचाराधीन था और अब इस पर फैसला आने के बाद राजनीतिक और कानूनी गलियारों में चर्चा तेज हो गई है।
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विशेष अदालत ने सुनाया फैसला
यह फैसला दुमका एमपी-एमएलए विशेष अदालत ने सुनाया। मामला वर्ष 2010 का है, जब देवघर में सूखा संकट को लेकर आंदोलन और समाहरणालय घेराव किया गया था। उस प्रदर्शन में प्रदीप यादव की सक्रिय भूमिका बताई गई थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार, आंदोलन के दौरान प्रशासन ने कुछ कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया था, जिन्हें छुड़ाने की कोशिश की गई। इस दौरान सरकारी कार्य में बाधा उत्पन्न हुई, जिसके बाद देवघर नगर थाना में कांड संख्या 363/2010 दर्ज किया गया। इसी मामले में प्रदीप यादव समेत कई लोगों को आरोपी बनाया गया था।
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सर्शत जमानत दी गई
अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 225 के तहत दोष सिद्ध पाते हुए उन्हें एक वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। यह फैसला विशेष न्यायाधीश मोहित चौधरी की अदालत ने दिया। हालांकि, सजा के तुरंत बाद ही उन्हें सशर्त जमानत प्रदान कर दी गई। उनके वकील ने फैसले के खिलाफ अपील और जमानत याचिका भी दायर कर दी है, जिससे आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। इस मामले में अन्य आरोपियों को राहत मिली है। साक्ष्य के अभाव में अदालत ने रणधीर सिंह समेत सभी अन्य आरोपियों को बरी कर दिया। अदालत ने माना कि उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं थे।
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यह मामला लंबे समय से विचाराधीन था और अब इस पर फैसला आने के बाद राजनीतिक और कानूनी गलियारों में चर्चा तेज हो गई है।
