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चारा घोटाला: 29 साल पहले जब्त एक करोड़ अधिक सरकारी खजाने में जाएंगे, सीबीआई कोर्ट ने दिया आदेश
Fri, 02 Oct 2026 11:19 AM IST
हिमांशु सिंह बघेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना/रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना/रांची
Published by: हिमांशु सिंह बघेल
Updated Fri, 02 Oct 2026 11:19 AM IST
सार
चारा घोटाले में सीबीआई की विशेष अदालत ने दीपेश चांडक से करीब 29 साल पहले जब्त 1 करोड़ 33 लाख 60 हजार रुपये झारखंड सरकार के खाते में जमा कराने का आदेश दिया है।
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सीबीआई
- फोटो : ANI
विस्तार
एकीकृत बिहार के बहुचर्चित चारा घोटाला मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। सीबीआई के विशेष न्यायाधीश अखिलेश कुमार तिवारी की अदालत ने चारा घोटाले के मुख्य आपूर्तिकर्ता (सप्लायर) दीपेश चांडक के ठिकानों से करीब 29 वर्ष पहले जब्त किए गए 1 करोड़ 33 लाख 60 हजार रुपये राज्य सरकार के खाते में जमा कराने का आदेश दिया है। यह राशि अब झारखंड सरकार के खजाने में जमा होगी।
सीबीआई ने चांडक के ठिकानों से बरामद इस नकद राशि को सरकारी खाते में जमा कराने के लिए विशेष अदालत के समक्ष याचिका दायर की थी। याचिका पर सुनवाई के बाद अदालत ने राशि को राज्य सरकार के खाते में हस्तांतरित करने का आदेश दिया। सीबीआई के अनुसार, यह राशि फिलहाल स्टेट बैंक में जमा है और आवश्यक कागजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद राज्य सरकार को हस्तांतरित की जाएगी।
सीबीआई की विशेष अदालत का फैसला
चारा घोटाले के दौरान एकीकृत बिहार के पशुपालन विभाग से फर्जी दस्तावेजों और जालसाजी के जरिए करोड़ों रुपये की अवैध निकासी की गई थी। इस बहुचर्चित आर्थिक घोटाले के विभिन्न मामलों में अदालतें तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव सहित कई अधिकारियों, राजनेताओं और कारोबारियों को दोषी ठहरा चुकी हैं। विशेष न्यायाधीश अखिलेश कुमार तिवारी की अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों, कानूनी पहलुओं और जांच से जुड़े तथ्यों पर सुनवाई के बाद दीपेश चांडक से जब्त राशि को राज्य सरकार के खाते में जमा कराने का आदेश दिया। रिपोर्ट के अनुसार, चांडक ने इस राशि पर अपना कोई दावा या आपत्ति पेश नहीं की थी।
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कोलकाता की आटा मिल में हुई थी छापेमारी
यह पूरा मामला करीब तीन दशक पुराना है। चारा घोटाले की जांच के शुरुआती दौर में सीबीआई की टीम ने पश्चिम बंगाल के कोलकाता स्थित दीपेश चांडक की आटा मिल समेत उनके विभिन्न ठिकानों पर छापेमारी की थी। इसी कार्रवाई के दौरान करीब 1.33 करोड़ रुपये की नकद राशि बरामद कर जब्त की गई थी।सीबीआई की जांच के दौरान चांडक को चारा घोटाले के प्रमुख सप्लायर के रूप में चिह्नित किया गया था। जांच एजेंसी ने उनके ठिकानों से बरामद राशि को मामले से जुड़ी वित्तीय अनियमितताओं के साक्ष्य के तौर पर जब्त किया था।
ये भी पढ़ें- झारखंड: हेमंत सोरेन पर आरोप तय, क्या अब बढ़ेगा सीएम पद से इस्तीफे का दबाव? भाजपा की मांग पर झामुमो का पलटवार
सरकारी गवाह बनने को लेकर हुई लंबी कानूनी प्रक्रिया
नकद राशि की बरामदगी के बाद दीपेश चांडक को चारा घोटाले में अप्रूवर यानी सरकारी गवाह बनाए जाने को लेकर भी लंबी कानूनी प्रक्रिया चली। उनके अप्रूवर बनने को लेकर अदालत में कानूनी विवाद हुआ था, हालांकि बाद में सीबीआई की प्रक्रिया को मंजूरी मिली। जांच के दौरान चांडक ने सीबीआई को घोटाले से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य और दस्तावेज उपलब्ध कराए थे। जांच में उनके बयान और दस्तावेजों को अहम साक्ष्य के तौर पर इस्तेमाल किया गया।
व्यक्तिगत डायरी से सामने आए थे अहम विवरण
जांच में सहयोग करते हुए दीपेश चांडक ने सीबीआई को चारा घोटाले से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज सौंपे थे। इसके अलावा उन्होंने जांच एजेंसी को एक व्यक्तिगत डायरी भी उपलब्ध कराई थी, जिसमें फर्जी दस्तावेज तैयार कर पशुपालन विभाग को चारा और उपकरणों की आपूर्ति दिखाए जाने से जुड़े विवरण दर्ज थे। इन दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की मदद से सीबीआई ने घोटाले में शामिल लोगों की भूमिका की जांच आगे बढ़ाई। अब अदालत के ताजा आदेश के बाद करीब 29 साल से जब्त 1.33 करोड़ रुपये राज्य सरकार के खाते में जमा होने का रास्ता साफ हो गया है।
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सीबीआई ने चांडक के ठिकानों से बरामद इस नकद राशि को सरकारी खाते में जमा कराने के लिए विशेष अदालत के समक्ष याचिका दायर की थी। याचिका पर सुनवाई के बाद अदालत ने राशि को राज्य सरकार के खाते में हस्तांतरित करने का आदेश दिया। सीबीआई के अनुसार, यह राशि फिलहाल स्टेट बैंक में जमा है और आवश्यक कागजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद राज्य सरकार को हस्तांतरित की जाएगी।
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सीबीआई की विशेष अदालत का फैसला
चारा घोटाले के दौरान एकीकृत बिहार के पशुपालन विभाग से फर्जी दस्तावेजों और जालसाजी के जरिए करोड़ों रुपये की अवैध निकासी की गई थी। इस बहुचर्चित आर्थिक घोटाले के विभिन्न मामलों में अदालतें तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव सहित कई अधिकारियों, राजनेताओं और कारोबारियों को दोषी ठहरा चुकी हैं। विशेष न्यायाधीश अखिलेश कुमार तिवारी की अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों, कानूनी पहलुओं और जांच से जुड़े तथ्यों पर सुनवाई के बाद दीपेश चांडक से जब्त राशि को राज्य सरकार के खाते में जमा कराने का आदेश दिया। रिपोर्ट के अनुसार, चांडक ने इस राशि पर अपना कोई दावा या आपत्ति पेश नहीं की थी।
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कोलकाता की आटा मिल में हुई थी छापेमारी
यह पूरा मामला करीब तीन दशक पुराना है। चारा घोटाले की जांच के शुरुआती दौर में सीबीआई की टीम ने पश्चिम बंगाल के कोलकाता स्थित दीपेश चांडक की आटा मिल समेत उनके विभिन्न ठिकानों पर छापेमारी की थी। इसी कार्रवाई के दौरान करीब 1.33 करोड़ रुपये की नकद राशि बरामद कर जब्त की गई थी।सीबीआई की जांच के दौरान चांडक को चारा घोटाले के प्रमुख सप्लायर के रूप में चिह्नित किया गया था। जांच एजेंसी ने उनके ठिकानों से बरामद राशि को मामले से जुड़ी वित्तीय अनियमितताओं के साक्ष्य के तौर पर जब्त किया था।
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सरकारी गवाह बनने को लेकर हुई लंबी कानूनी प्रक्रिया
नकद राशि की बरामदगी के बाद दीपेश चांडक को चारा घोटाले में अप्रूवर यानी सरकारी गवाह बनाए जाने को लेकर भी लंबी कानूनी प्रक्रिया चली। उनके अप्रूवर बनने को लेकर अदालत में कानूनी विवाद हुआ था, हालांकि बाद में सीबीआई की प्रक्रिया को मंजूरी मिली। जांच के दौरान चांडक ने सीबीआई को घोटाले से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य और दस्तावेज उपलब्ध कराए थे। जांच में उनके बयान और दस्तावेजों को अहम साक्ष्य के तौर पर इस्तेमाल किया गया।
व्यक्तिगत डायरी से सामने आए थे अहम विवरण
जांच में सहयोग करते हुए दीपेश चांडक ने सीबीआई को चारा घोटाले से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज सौंपे थे। इसके अलावा उन्होंने जांच एजेंसी को एक व्यक्तिगत डायरी भी उपलब्ध कराई थी, जिसमें फर्जी दस्तावेज तैयार कर पशुपालन विभाग को चारा और उपकरणों की आपूर्ति दिखाए जाने से जुड़े विवरण दर्ज थे। इन दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की मदद से सीबीआई ने घोटाले में शामिल लोगों की भूमिका की जांच आगे बढ़ाई। अब अदालत के ताजा आदेश के बाद करीब 29 साल से जब्त 1.33 करोड़ रुपये राज्य सरकार के खाते में जमा होने का रास्ता साफ हो गया है।