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Ranchi: पूर्वजों की परंपरा के साथ फांसी टुंगरी में सरना झंडा गड़ी, सरहुल को लेकर रांची में उत्साह

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची Published by: राँची ब्यूरो Updated Sun, 15 Mar 2026 08:10 PM IST
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सार

Ranchi: रांची के फांसी टुंगरी में केंद्रीय सरना समिति द्वारा पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ 11वां सरना झंडा गड़ी कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर सैकड़ों सरना धर्मावलंबियों ने प्रार्थना सभा में भाग लेकर सरहुल महापर्व की तैयारियों की शुरुआत की।

Following the tradition of ancestors, Sarna flag was planted in Phansi Tungri, enthusiasm for Sarhul
सरना झंडा गड़ी सह प्रार्थना सभा में उपस्थित केंद्रीय सरना समिति के सदस्य
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विस्तार

राजधानी रांची में आगामी महापर्व सरहुल को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। इसी कड़ी में केंद्रीय सरना समिति के तत्वावधान में पहाड़ी मंदिर स्थित फांसी टुंगरी में 11वां विशाल सरना झंडा गड़ी सह प्रार्थना सभा का आयोजन पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ किया गया। कार्यक्रम में सैकड़ों की संख्या में सरना धर्मावलंबी शामिल हुए और ढोल-नगाड़ों के साथ पूजा-अर्चना कर पूर्वजों की परंपरा का निर्वाह किया।

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पाहन ने पहाड़ की चोटी पर गाड़ा सरना झंडा
केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष अजय तिर्की के नेतृत्व में पाहन द्वारा पहाड़ की चोटी पर सरना झंडा गाड़ा गया। इस दौरान मानव जाति, जीव-जंतु, वनस्पति जगत, पेड़-पौधे, नदी-नाला और पहाड़-पर्वत में रहने वाले सभी प्राणियों के सुख-समृद्धि, शांति और स्वास्थ्य की कामना की गई।
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पूर्वजों की परंपरा को निभा रहा आदिवासी समाज
अजय तिर्की ने कहा कि फांसी टुंगरी आदिवासी समाज के पूर्वजों का पूजा स्थल रहा है, जहां पहले स्वर्गीय बुधवा पाहन पूजा किया करते थे। आज भी आदिवासी समाज उनके पदचिन्हों पर चलते हुए इस परंपरा को निभा रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार से सरना धर्म कोड लागू करने की मांग दोहराते हुए कहा कि इससे आदिवासी समाज को अलग धार्मिक पहचान मिलेगी।

सरहुल में नशा से दूर रहने की अपील
इस अवसर पर सिरमटोली पहनाई अनिता हंस, अजय कच्छप और नीरज मुंडा ने कहा कि सरहुल महापर्व के दौरान आदिवासी समाज अपने घर-आंगन में सरना झंडा लगाए और पर्व को पारंपरिक तरीके से मनाए। उन्होंने लोगों से पर्व के दौरान नशा-पान से दूर रहने की अपील भी की।

परंपरागत रीति-रिवाजों को बचाने पर जोर
सरना समिति के पदाधिकारी गहना उरांव ने कहा कि आदिवासी समाज को अपने पर्व-त्योहार, पूजा-पाठ और रीति-रिवाजों को परंपरागत तरीके से निभाना चाहिए। साथ ही उन्होंने हर गुरुवार को सरना स्थल पर प्रार्थना करने और बच्चों को शिक्षित कर आर्थिक रूप से मजबूत बनने पर बल दिया।

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वर्षों पुरानी है सरना झंडा गाड़ी की परंपरा
राजीव पड़हा सरना प्रार्थना सभा के अध्यक्ष नीरज मुंडा ने कहा कि फांसी टुंगरी में सरना झंडा गाड़ी की परंपरा वर्षों पुरानी है। आज भले ही लोग इसे पहाड़ी मंदिर के नाम से जानते हैं, लेकिन आदिवासी समाज लंबे समय से इस पहाड़ की पूजा करता आ रहा है।

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