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Jharkhand News: ‘विकसित भारत@2047 की यात्रा एक समुद्री सफर’, बोले- नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची Published by: हिमांशु प्रियदर्शी Updated Fri, 23 Jan 2026 09:45 PM IST
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सार

Ranchi News: नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी ने रांची में विकसित भारत@2047 को समुद्री सफर बताया। उन्होंने बताया कि 95% भारतीय व्यापार समुद्र से होता है। साथ ही उन्होंने नीली अर्थव्यवस्था बढ़ाने पर जोर दिया।

Jharkhand News Navy Chief Admiral Dinesh Kumar Tripathi says journey to Viksit Bharat@2047 is maritime voyage
नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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भारतीय नौसेना के प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी ने विकसित भारत@2047 की महत्वाकांक्षा को एक समुद्री सफर के रूप में चित्रित किया है। उन्होंने जोर दिया कि विश्व की अर्थव्यवस्थाएं, जिसमें भारत शामिल है, व्यापार और विकास के लिए महासागरों पर अत्यधिक निर्भर हैं।

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समुद्री मार्गों का महत्व
सीसीएल के दरभंगा हाउस सम्मेलन कक्ष में छात्रों को संबोधित करते हुए एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि विश्व के 90 प्रतिशत एक्सिम व्यापार समुद्र के माध्यम से होता है। भारत के व्यापार की मात्रा का 95 प्रतिशत समुद्री मार्गों से होता है, जिससे महासागर विकसित भारत@2047 हासिल करने का प्रमुख माध्यम बन जाते हैं। उन्होंने कहा कि विकसित भारत@2047 अब केवल नीति नहीं रह गया है, बल्कि वास्तविकता बन चुका है और इसके लिए स्पष्ट माइलस्टोन निर्धारित किए गए हैं।
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भौगोलिक लाभ और जिम्मेदारी
एडमिरल त्रिपाठी ने भारत की भौगोलिक स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि देश तीन तरफ से महासागरों से घिरा है, जो एक बड़ा लाभ है। उन्होंने जोर दिया कि समुद्रों को किसी भी बाधा से मुक्त रखना हमारी जिम्मेदारी है। भारतीय नौसेना भारतीय महासागर क्षेत्र में पहली प्रतिक्रिया देने वाली शक्ति है और विश्व स्तर पर इसे इसी रूप में मान्यता मिल रही है।
 
नीली अर्थव्यवस्था और ऊर्जा निर्भरता
नौसेना प्रमुख ने कहा कि वर्तमान में नीली अर्थव्यवस्था हमारे सकल घरेलू उत्पाद में मात्र 4 प्रतिशत योगदान दे रही है, जो बहुत कम है। इसे दहाई अंकों तक बढ़ाना होगा ताकि विकसित भारत की दृष्टि से मेल खाए। उन्होंने एक महत्वपूर्ण तथ्य साझा किया कि हमारी 88 प्रतिशत ऊर्जा आवश्यकताएं समुद्र से आती हैं। यदि क्रूड ऑयल की कीमत प्रति मेट्रिक टन में एक डॉलर बढ़ती है, तो भारत को अतिरिक्त 10,000 करोड़ रुपये चुकाने पड़ते हैं। यही कारण है कि समुद्री क्षेत्र की सुरक्षा इतनी महत्वपूर्ण है।
 
मानवीय सहायता और निवारक भूमिका
एडमिरल त्रिपाठी ने नौसेना की मानवीय सहायता की भूमिका का उदाहरण देते हुए कहा कि म्यांमार में भूकंप आने पर हम सबसे पहले 500 टन राहत सामग्री लेकर पहुंचे। इसी तरह श्रीलंका में 1,000 टन राहत सामग्री पहुंचाई गई। उन्होंने कहा कि नौसेना की मुख्य भूमिका युद्ध लड़ना है, लेकिन उससे पहले निवारक (डिटरेंस) सबसे पहले आता है। समुद्री मार्गों में छोटी-सी भी बाधा का बड़ा आर्थिक और रणनीतिक प्रभाव पड़ सकता है।
 
वैश्विक उदाहरण और डिजिटल निर्भरता
इजराइल-हमास संघर्ष का जिक्र करते हुए उन्होंने यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा लाल सागर में की गई कार्रवाइयों का उल्लेख किया, जिससे वैश्विक कार्गो आवाजाही प्रभावित हुई। जहाज कंपनियों को स्वेज नहर से बचना पड़ा, जो एशिया से यूरोप का सबसे छोटा मार्ग है, और कुछ वैकल्पिक मार्गों पर शिपिंग लागत में लगभग 700 प्रतिशत की वृद्धि हुई। उन्होंने कहा कि आधुनिक डिजिटल जीवन भी सुरक्षित समुद्रों पर निर्भर है, क्योंकि वैश्विक इंटरनेट डेटा का लगभग 99 प्रतिशत अंडरसी फाइबर-ऑप्टिक केबलों से गुजरता है।
 
एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि यदि महासागर भारत के विकास के केंद्र में हैं, तो उन्हें खुला, सुरक्षित और सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी भारतीय नौसेना पर है। उन्होंने छात्रों से कौशल विकास, चरित्र निर्माण, नागरिक जिम्मेदारी और आजीवन सीखने पर ध्यान केंद्रित करने की अपील की। विश्व आर्थिक मंच की भविष्यवाणी का हवाला देते हुए कहा कि भविष्य में डिग्री से अधिक कौशल मायने रखेंगे। विकसित भारत@2047, जिसमें 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य है, सामूहिक प्रयास और जन भागीदारी से ही हासिल होगा।

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विकसित भारत के अन्य लक्ष्य
उन्होंने कहा कि विकसित भारत@2047 में 30 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के अलावा 100 प्रतिशत साक्षरता, सार्वभौमिक स्वास्थ्य सुविधाएं, सभी के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, नवाचार में नेतृत्व और पूर्ण आत्मनिर्भरता जैसे लक्ष्य शामिल हैं। सुरक्षा और विकास साथ-साथ चलते हैं, और भारत की यात्रा निर्भरता से आत्मविश्वास तथा आयात से नवाचार की ओर है।
 
परिचालन मामलों पर उन्होंने कहा कि नौसेना की प्राथमिक भूमिका निवारक है और ऑपरेशन सिंदूर जारी है। आधुनिक युद्ध में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और साइबर युद्ध जैसी उभरती प्रौद्योगिकियां नौसेना में एकीकृत की जा चुकी हैं।


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