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Ranchi News: हादसे के बाद बंद पड़ी सरकारी एयर एम्बुलेंस, निजी कंपनियां वसूल रहीं मनमाना किराया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
Published by: राँची ब्यूरो
Updated Sun, 17 May 2026 03:05 PM IST
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सार
झारखंड में एयर एम्बुलेंस सेवा करीब तीन महीने से बंद है, जिससे गंभीर मरीजों को भारी परेशानी हो रही है। निजी कंपनियां मनमाना किराया वसूल रही हैं और रांची से दिल्ली तक खर्च लगभग 13 लाख रुपये तक पहुंच गया है। सरकार की चुप्पी पर सवाल उठ रहे हैं।
एयर एम्बुलेंस फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
झारखंड में गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों के लिए शुरू की गई सरकारी एयर एम्बुलेंस सेवा पिछले लगभग तीन महीने से ठप पड़ी है। 23 फरवरी को चतरा में हुई एयर एम्बुलेंस दुर्घटना के बाद से यह सेवा बंद है, जिससे मरीजों और उनके परिजनों की परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। सरकारी सेवा बंद होने का फायदा अब निजी एयर एम्बुलेंस कंपनियां उठा रही हैं और मरीजों से मनमाने पैसे वसूले जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पहल पर शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य गंभीर मरीजों को बेहतर इलाज के लिए दिल्ली, बेंगलुरु, मुंबई और हैदराबाद जैसे बड़े शहरों तक त्वरित पहुंच उपलब्ध कराना था। कैंसर, हार्ट, न्यूरो और ट्रॉमा के मरीजों के लिए यह सेवा जीवनदायिनी साबित हो रही थी। सरकारी व्यवस्था के तहत मरीजों को अपेक्षाकृत कम खर्च में एयर एम्बुलेंस सुविधा मिल जाती थी, लेकिन सेवा बंद होने के बाद अब आम लोगों की पहुंच इससे लगभग खत्म हो गई है।
जानकारी के अनुसार, रांची से दिल्ली तक एक मरीज को एयर एम्बुलेंस से ले जाने में अब करीब 13 लाख रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। पहले यही सेवा सरकारी सहयोग के कारण लगभग आधी लागत में उपलब्ध हो जाती थी। कई परिवारों को मरीज के इलाज के साथ-साथ एयर एम्बुलेंस के भारी खर्च के लिए जमीन बेचने और कर्ज लेने तक की नौबत आ रही है।
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रांची एयरपोर्ट से हर महीने औसतन 15 एयर एम्बुलेंस उड़ानें संचालित होती थीं। इनमें अधिकतर उड़ानें दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, हैदराबाद और बेंगलुरु के लिए होती थीं। लेकिन सरकारी सेवा बंद होने के बाद अब यह सुविधा केवल आर्थिक रूप से सक्षम लोगों तक सीमित होकर रह गई है।
वहीं, एयर एम्बुलेंस सेवा दोबारा कब शुरू होगी, इसे लेकर सरकार की ओर से भी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही है। सेवा से जुड़े टोल फ्री नंबरों पर संपर्क करने पर भी सिर्फ इतना बताया जा रहा है कि फिलहाल सेवा बहाल करने को लेकर कोई आधिकारिक सूचना उपलब्ध नहीं है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि एयर एम्बुलेंस जैसी आपातकालीन सेवा का लंबे समय तक बंद रहना राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था और आपदा प्रबंधन प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। ऐसे में जरूरत इस बात की है कि सरकार जल्द से जल्द इस सेवा को पुनः शुरू करे, ताकि गंभीर मरीजों को समय पर इलाज मिल सके।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पहल पर शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य गंभीर मरीजों को बेहतर इलाज के लिए दिल्ली, बेंगलुरु, मुंबई और हैदराबाद जैसे बड़े शहरों तक त्वरित पहुंच उपलब्ध कराना था। कैंसर, हार्ट, न्यूरो और ट्रॉमा के मरीजों के लिए यह सेवा जीवनदायिनी साबित हो रही थी। सरकारी व्यवस्था के तहत मरीजों को अपेक्षाकृत कम खर्च में एयर एम्बुलेंस सुविधा मिल जाती थी, लेकिन सेवा बंद होने के बाद अब आम लोगों की पहुंच इससे लगभग खत्म हो गई है।
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जानकारी के अनुसार, रांची से दिल्ली तक एक मरीज को एयर एम्बुलेंस से ले जाने में अब करीब 13 लाख रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। पहले यही सेवा सरकारी सहयोग के कारण लगभग आधी लागत में उपलब्ध हो जाती थी। कई परिवारों को मरीज के इलाज के साथ-साथ एयर एम्बुलेंस के भारी खर्च के लिए जमीन बेचने और कर्ज लेने तक की नौबत आ रही है।
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रांची एयरपोर्ट से हर महीने औसतन 15 एयर एम्बुलेंस उड़ानें संचालित होती थीं। इनमें अधिकतर उड़ानें दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, हैदराबाद और बेंगलुरु के लिए होती थीं। लेकिन सरकारी सेवा बंद होने के बाद अब यह सुविधा केवल आर्थिक रूप से सक्षम लोगों तक सीमित होकर रह गई है।
वहीं, एयर एम्बुलेंस सेवा दोबारा कब शुरू होगी, इसे लेकर सरकार की ओर से भी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही है। सेवा से जुड़े टोल फ्री नंबरों पर संपर्क करने पर भी सिर्फ इतना बताया जा रहा है कि फिलहाल सेवा बहाल करने को लेकर कोई आधिकारिक सूचना उपलब्ध नहीं है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि एयर एम्बुलेंस जैसी आपातकालीन सेवा का लंबे समय तक बंद रहना राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था और आपदा प्रबंधन प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। ऐसे में जरूरत इस बात की है कि सरकार जल्द से जल्द इस सेवा को पुनः शुरू करे, ताकि गंभीर मरीजों को समय पर इलाज मिल सके।