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Jharkhand: 11वीं से 13वीं संयुक्त JPSC मेंस परीक्षा परिणाम पर फिर हाईकोर्ट में सुनवाई, अदालत ने दिए ये निर्देश
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
Published by: राँची ब्यूरो
Updated Wed, 21 Jan 2026 04:13 PM IST
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सार
Ranchi News: 11वीं से 13वीं संयुक्त JPSC मेंस परीक्षा परिणाम को चुनौती देने वाली अपील पर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। अदालत ने नियुक्ति पत्र पा चुके 342 अभ्यर्थियों को पक्षकार बनाने का निर्देश दिया। मामले की आगे सुनवाई जारी रहेगी।
झारखंड हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
11वीं से 13वीं संयुक्त JPSC मेंस परीक्षा के परिणाम को लेकर दाखिल याचिकाओं का मामला एक बार फिर झारखंड हाईकोर्ट पहुंच गया है। एकल पीठ द्वारा याचिका खारिज किए जाने के बाद याचिकाकर्ताओं ने उस आदेश को चुनौती देते हुए डिवीजन बेंच में अपील दाखिल की है। बुधवार को इस अपील पर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई।
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खंडपीठ के समक्ष मामला और अदालत की टिप्पणी
मामले की सुनवाई जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ के समक्ष हुई। अदालत ने कहा कि इस प्रकरण के अंतिम निर्णय का सीधा प्रभाव उन अभ्यर्थियों पर पड़ेगा, जिन्हें पहले ही नियुक्ति पत्र जारी किए जा चुके हैं। इसी तथ्य को ध्यान में रखते हुए अदालत ने आवश्यक निर्देश जारी किए।
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चयनित 342 अभ्यर्थियों को पक्षकार बनाने का आदेश
हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता को निर्देश दिया कि JPSC द्वारा नियुक्ति पत्र प्राप्त कर चुके 342 अभ्यर्थियों को दो सप्ताह के भीतर अपील में प्रतिवादी बनाया जाए। अदालत का मानना है कि यदि चयनित अभ्यर्थियों को पक्षकार नहीं बनाया गया, तो अंतिम फैसला एकतरफा हो सकता है और इससे उनके अधिकार प्रभावित होंगे।
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आयोग और अपीलकर्ताओं की ओर से दलीलें
सुनवाई के दौरान झारखंड लोक सेवा आयोग की ओर से महाधिवक्ता राजीव रंजन, अधिवक्ता संजय पिपरवाल और प्रिंस कुमार ने आयोग का पक्ष रखा। वहीं अपीलकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता सुभाशीष रसिक सोरेन और शोभा लकड़ा ने दलीलें पेश कीं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि मूल्यांकन प्रक्रिया में निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया गया, जिसके आधार पर परीक्षा परिणाम को चुनौती दी गई है।
एकल पीठ के पूर्व आदेश का संदर्भ
गौरतलब है कि अक्तूबर 2025 में हाईकोर्ट की एकल पीठ, जिसकी अध्यक्षता जस्टिस दीपक रोशन कर रहे थे, ने इस मामले में दायर रिट याचिका को खारिज कर दिया था। उस आदेश में कहा गया था कि याचिकाकर्ताओं ने मूल्यांकन प्रक्रिया पर समय रहते आपत्ति दर्ज नहीं कराई और परिणाम घोषित होने के बाद उठाए गए सवाल कानूनी रूप से स्वीकार्य नहीं हैं। जांच में ऐसा कोई तथ्य सामने नहीं आया था, जिससे परिणाम रद्द करने का आधार बनता हो। अब इसी आदेश के खिलाफ डिवीजन बेंच में अपील दाखिल की गई है, जिस पर आगे सुनवाई जारी रहेगी।
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