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झारखंड: एचईसी के 260 क्वार्टरों पर अवैध कब्जा, हर साल 2.19 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान

Mon, 26 Oct 2026 09:50 AM IST
आशुतोष प्रताप सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची Published by: आशुतोष प्रताप सिंह Updated Mon, 26 Oct 2026 09:50 AM IST
सार

रांची स्थित हैवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचईसी) के आवासीय परिसर में 260 बेहतर स्थिति वाले खाली क्वार्टरों पर अवैध कब्जा है। इन आवासों को किराये या लीज पर देने से संस्थान को सालाना करीब 2.19 करोड़ रुपये का राजस्व मिल सकता था।

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ranchi hec 260 quarters illegal occupation 2 19 crore annual revenue loss
(फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला =

विस्तार

आर्थिक संकट से जूझ रहे हैवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचईसी) के आवासीय परिसर में 260 बेहतर स्थिति वाले क्वार्टरों पर अवैध कब्जा है। इन आवासों को खाली कराकर किराये या लीज पर दिया जाता, तो संस्थान को सालाना करीब 2.19 करोड़ रुपये का राजस्व मिल सकता था। आरोप है कि प्रबंधन की लापरवाही के कारण कंपनी को हर साल इस संभावित आय से वंचित रहना पड़ रहा है।

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एचईसी के पास 3,177 आवास, 260 पर अनधिकृत कब्जा

एचईसी के आवासीय परिसर में कुल 11,109 क्वार्टर हैं। इनमें से 1,148 क्वार्टर राज्य सरकार को हस्तांतरित किए जा चुके हैं, जबकि 6,784 आवास दीर्घकालिक लीज पर दिए गए हैं। इस तरह संस्थान के पास 3,177 मकानों का अधिकार शेष है। इनमें विभिन्न श्रेणियों के 277 आवास खाली पड़े हैं। इनमें 17 एफ-टाइप क्वार्टर भी शामिल हैं, जो अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक (सीएमडी) और निदेशकों के लिए आरक्षित हैं। ये आवास पूरी तरह सुरक्षित बताए गए हैं। वहीं, शेष 260 बेहतर स्थिति वाले खाली क्वार्टरों पर अनधिकृत लोगों का कब्जा है। बताया जाता है कि कई आवासों पर पूर्व कर्मचारियों के सेवानिवृत्त होने या त्यागपत्र देने के बाद कब्जा किया गया। आरोप है कि कुछ लोगों ने ताले तोड़कर इन क्वार्टरों में रहना शुरू कर दिया, लेकिन इसकी जानकारी तक प्रबंधन को नहीं है।

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500 से अधिक जर्जर क्वार्टरों में भी अवैध रूप से रह रहे लोग

एचईसी परिसर में अवैध कब्जे की समस्या केवल बेहतर स्थिति वाले मकानों तक सीमित नहीं है। संस्थान की ओर से कंडम घोषित किए जा चुके 500 से अधिक जर्जर क्वार्टरों में भी लोग अवैध रूप से रह रहे हैं। इन असुरक्षित आवासों में रहने वालों की निगरानी नहीं हो पा रही है, जिससे परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। इससे पहले राजधानी रांची में एक बड़े कारोबारी के बेटे का अपहरण कर उसे एचईसी के ही एक क्वार्टर में छिपाकर रखने की आपराधिक घटना भी सामने आ चुकी है। ऐसे में परिसर के आवासों पर अनधिकृत कब्जे और निगरानी की कमी को लेकर चिंता जताई जा रही है।

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मजदूर यूनियनों ने प्रबंधन पर लगाए आरोप

हटिया कामगार यूनियन के उपाध्यक्ष लालदेव सिंह का कहना है कि संस्थान की स्थिति लावारिस जैसी हो गई है। उनका आरोप है कि जब लोग क्वार्टरों के ताले तोड़कर उनमें रहने लगते हैं, तो नगर प्रशासन विभाग के अधिकारी कथित तौर पर उनसे अवैध रूप से हर महीने किराया वसूलते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि 10 वर्षों के लिए आवंटित दुकानों की लीज और लीव लाइसेंस का नवीनीकरण भी बंद पड़ा है। इससे संस्थान की संपत्तियों के प्रबंधन और उनसे राजस्व जुटाने की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।

कर्मचारियों को दीर्घकालिक लीज पर आवास देने का सुझाव

एचईसी श्रमिक संघ के अध्यक्ष शनि सिंह का आरोप है कि चीफ ऑफ टाउनशिप को क्वार्टरों पर अवैध कब्जे की पूरी जानकारी है, लेकिन इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की जाती। उन्होंने बताया कि वर्ष 1991 से 1993 के बीच एक कर्मचारी को दो-दो आवास आवंटित किए गए थे। शनि सिंह ने सुझाव दिया कि इन मकानों को कर्मचारियों को ही दीर्घकालिक लीज पर आवंटित किया जाए। इससे खाली पड़े आवासों का उपयोग हो सकेगा और संस्थान को करोड़ों रुपये का राजस्व भी मिल सकता है। आर्थिक संकट से गुजर रहे एचईसी के लिए आवासों से होने वाली संभावित आय अहम साबित हो सकती है।

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