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हेमंत सरकार सख्त: सरकारी नौकरी मिली, लेकिन ड्यूटी से रहे गायब; झारखंड में 631 डॉक्टरों पर कार्रवाई की तैयारी

Sun, 25 Oct 2026 07:26 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची Published by: शबाहत हुसैन Updated Sun, 25 Oct 2026 07:26 PM IST
सार

झारखंड स्वास्थ्य विभाग 631 लंबे समय से अनुपस्थित चिकित्सकों को सेवा से हटाने की तैयारी कर रहा है। सभी को 15 दिनों में सेवा में होने का प्रमाण देने का निर्देश दिया गया है। अन्य 64 डॉक्टरों से भी स्पष्टीकरण मांगा गया है।

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Secured government jobs but remained absent from duty preparations underway take action against 631 doctors
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

झारखंड स्वास्थ्य विभाग लंबे समय से अनधिकृत रूप से ड्यूटी से गायब चल रहे 631 चिकित्सकों को सेवा से हटाने की कार्रवाई कर रहा है। राज्य सरकार ने जब स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत चिकित्सकों की राज्यस्तरीय वरीयता सूची जारी की और सभी जिलों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी, तो पता चला कि कुल 695 चिकित्सक लंबे समय से ड्यूटी से नदारद हैं। ये सभी चिकित्सक झारखंड लोक सेवा आयोग के माध्यम से अलग-अलग समय पर नियुक्त होकर सेवा में आए थे। स्वास्थ्य विभाग ने इनमें से 631 चिकित्सकों को नोटिस जारी कर 15 दिनों के भीतर सेवारत होने का प्रमाण के साथ दावा प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। सरकार द्वारा साक्ष्य प्राप्त न होने पर इन्हें सेवा से बर्खास्त करने की कार्रवाई की जाएगी।
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अनुपस्थित चिकित्सकों पर होगी कार्रवाई
जिलों से मिली रिपोर्ट के अनुसार ये 631 चिकित्सक वर्तमान में किसी भी स्वास्थ्य केंद्र पर कार्यरत नहीं हैं। यदि ये चिकित्सक 15 दिनों की अवधि में सेवा में होने का साक्ष्य के साथ दावा प्रस्तुत नहीं करते हैं, तो सरकार इन्हें सेवा से हटाने की कार्रवाई करेगी। चिकित्सकों को सेवा से बर्खास्त करने के इस प्रस्ताव पर झारखंड लोक सेवा आयोग के अनुमोदन के साथ-साथ राज्य कैबिनेट की स्वीकृति भी ली जाएगी। इसके अलावा, स्वास्थ्य विभाग ने 64 ऐसे डॉक्टरों की भी पहचान की है जो सेवा में तो हैं, लेकिन लंबे समय से अनधिकृत रूप से ड्यूटी से अनुपस्थित चल रहे हैं। विभाग ने इन 64 डॉक्टरों से भी 15 दिनों के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है। सरकार ने उनसे पूछा है कि अनधिकृत अनुपस्थिति के कारण उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों न की जाए।
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सरकारी सेवा में डॉक्टरों का संकट
राज्य में सरकारी स्वास्थ्य सेवा में चिकित्सकों के न टिकने की गंभीर समस्या शुरू से ही बनी हुई है। चिकित्सकों को सरकारी नियुक्ति में कई विशेष सुविधाएं मिलने के बाद भी स्थिति में सुधार नहीं हो रहा है। सरकार चिकित्सकों को सरकारी सेवा में बनाए रखने के लिए नियुक्ति के साथ ही एक साथ चार वेतन वृद्धि का वित्तीय लाभ देती है। इसके बावजूद चिकित्सक झारखंड लोक सेवा आयोग से चयनित होकर योगदान तो देते हैं, लेकिन पसंद की जगह पर पदस्थापन न होने की स्थिति में वहां या तो योगदान ही नहीं देते या फिर योगदान देकर ड्यूटी से गायब रहने लगते हैं। कई चिकित्सक नौकरी से औपचारिक रूप से त्यागपत्र भी नहीं देते हैं, जिसके बाद अंततः सरकार को ही उन्हें सेवा से हटाने की कार्रवाई करनी पड़ती है।
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संविदा और नई नियुक्ति का प्रयास
राज्य में डॉक्टरों की भारी कमी को दूर करने के लिए सरकार टेंडर के माध्यम से अनुबंध पर नियुक्ति का विकल्प अपना रही है। इसके तहत चिकित्सकों से बोली आमंत्रित कर उनकी नियुक्ति अधिकतम 3 लाख रुपये के मासिक वेतन पर की जाती है। संविदा पर आने वाले डॉक्टरों को उनके द्वारा दिए गए विकल्प के आधार पर ही पदस्थापन की सुविधा दी जाती है। हालांकि, इस व्यवस्था के बाद भी कई चिकित्सक कुछ समय बाद नौकरी छोड़ देते हैं। राज्य के अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए झारखंड सरकार अब दक्षिणी राज्यों से चिकित्सकों की नियुक्ति करने की विशेष तैयारी कर रही है।
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