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Hindi News ›   Jharkhand ›   Ranchi News ›   Strike by 108 ambulance staff averted following agreement on six demands; ultimatum set for November 18.

झारखंड: 108 एंबुलेंस कर्मचारियों की हड़ताल टली, छह मांगों पर बनी सहमति; 18 नवंबर तक का अल्टीमेटम

Sun, 25 Oct 2026 07:21 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची Published by: शबाहत हुसैन Updated Sun, 25 Oct 2026 07:21 PM IST
सार

झारखंड में स्वास्थ्य विभाग के साथ छह मांगों पर सकारात्मक सहमति के बाद 108 एंबुलेंस कर्मचारियों ने छठ पूजा तक हड़ताल टाल दी है। संघ ने चेतावनी दी कि 18 नवंबर तक समाधान नहीं होने पर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू होगी।

 

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Strike by 108 ambulance staff averted following agreement on six demands; ultimatum set for November 18.
सांकेतिक - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

स्वास्थ्य विभाग के साथ छह मांगों पर सकारात्मक सहमति बनने के बाद झारखंड में 108 एंबुलेंस कर्मचारियों की प्रस्तावित हड़ताल फिलहाल टल गई है। स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह के साथ हुई उच्चस्तरीय वार्ता के बाद झारखंड प्रदेश एंबुलेंस कर्मचारी संघ ने छठ पूजा तक अपना आंदोलन स्थगित करने का निर्णय लिया है। कर्मचारियों की सेवा सुरक्षा, पारदर्शी वेतन भुगतान और विभिन्न श्रम सुविधाओं को लेकर बनी इस सहमति से राज्य में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं सुचारू रहेंगी। हालांकि कर्मचारी संघ ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि तय समयसीमा के भीतर उनकी मांगों का स्थायी समाधान नहीं निकाला गया तो 18 नवंबर से राज्यव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी जाएगी।

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संघ के प्रदेश अध्यक्ष नीरज तिवारी के अनुसार स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ कर्मचारियों की लंबित समस्याओं और एंबुलेंस संचालन की खामियों पर विस्तार से चर्चा हुई थी। सरकार की ओर से समस्याओं के निपटारे के लिए आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी करने को कुछ समय मांगा गया था। इसके बाद संघ की बैठक में सरकार को एक और अवसर देने का निर्णय लेते हुए हड़ताल टालने की घोषणा की गई।

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मनमानी बर्खास्तगी पर रोक और जांच व्यवस्था
एंबुलेंस कर्मचारियों की सबसे महत्वपूर्ण मांग सेवा सुरक्षा से जुड़ी हुई थी। नए निर्णय के अनुसार अब किसी भी कर्मचारी को मनमाने तरीके से नौकरी से निष्कासित नहीं किया जा सकेगा। किसी भी प्रकार की शिकायत या अनियमितता की स्थिति में सबसे पहले मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। इस जांच समिति में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की राज्यस्तरीय टीम, संबंधित जिले के सिविल सर्जन और एंबुलेंस कर्मचारी संघ के प्रतिनिधि अनिवार्य रूप से शामिल रहेंगे।

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जांच प्रक्रिया में आरोप सिद्ध होने पर ही नियमों के तहत उचित कार्रवाई की जाएगी। इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य निजी संचालन कंपनियों द्वारा कर्मचारियों की जा रही एकतरफा व मनमानी बर्खास्तगी पर पूरी तरह से रोक लगाना है। इससे कर्मचारियों में सुरक्षा का भाव पैदा होगा और वे निर्भीक होकर अपनी सेवाएं दे सकेंगे।

एस्क्रो खाते से भुगतान और आर्थिक सुरक्षा
कर्मचारियों को वेतन भुगतान में पारदर्शिता लाने के लिए एस्क्रो खाते की व्यवस्था लागू करने पर सहमति बनी है। इस विशेष खाते के माध्यम से वेतन भुगतान की सीधी निगरानी स्वास्थ्य विभाग स्वयं कर सकेगा। पूर्व में कर्मचारियों को समय पर वेतन न मिलने और मनमाने ढंग से वेतन कटौती का सामना करना पड़ता था।

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि एंबुलेंस में तकनीकी खराबी आने या किसी पाली में मरीज का कोई मामला न मिलने पर कर्मचारियों का वेतन नहीं काटा जाएगा। संघ का तर्क था कि वाहनों की खराबी या मरीजों की संख्या कर्मचारियों के वश में नहीं होती, इसलिए इसका आर्थिक नुकसान कर्मचारियों पर डालना अनुचित है। इसके अलावा न्यूनतम मजदूरी, कर्मचारी भविष्य निधि, कर्मचारी राज्य बीमा निगम, वार्षिक अवकाश, जीवन बीमा और बोनस जैसी सभी वैधानिक सुविधाएं समय पर देने पर भी सहमति बनी है। सभी एंबुलेंसों में बायोमीट्रिक उपस्थिति उपकरण लगाने और नई नियुक्तियों से पहले राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की स्वीकृति अनिवार्य करने का भी निर्णय लिया गया है।

टेंडर प्रक्रिया में सुधार और चेतावनी

कर्मचारियों की समस्याओं के स्थायी समाधान के उद्देश्य से वर्तमान एंबुलेंस संचालन टेंडर में आवश्यक संशोधन करने याइसे रद्द कर नए सिरे से टेंडर आमंत्रित करने के विकल्प पर भी विचार किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव ने इस कानूनी व प्रशासनिक प्रक्रिया को पूरा करने के लिए संघ से कुछ दिनों का समय मांगा है।

संघ ने चेतावनी दी है कि आंदोलन स्थगित करने का अर्थ मांगों से पीछे हटना बिल्कुल नहीं है। यदि इस बीच एंबुलेंस संचालक कंपनी किसी भी कर्मचारी के विरुद्ध अनुचित या दमनात्मक कार्रवाई करती है तो संघ मात्र 72 घंटे के भीतर आपात बैठक बुलाकर राज्यव्यापी आंदोलन की रणनीति बनाएगा। इसके साथ ही 18 नवंबर तक सभी छह मांगों का संतोषजनक समाधान न होने की स्थिति में राज्यभर में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी जाएगी।

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