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Jharkhand: साइंस से छात्रों का मोहभंग, फिजिक्स में 120 सीटों पर सिर्फ तीन आवेदन; कॉमर्स बना पहली पसंद
Fri, 24 Jul 2026 12:12 PM IST
राँची ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
Published by: राँची ब्यूरो
Updated Fri, 24 Jul 2026 12:12 PM IST
सार
रांची विश्वविद्यालय के यूजी सत्र 2026-30 में साइंस विषयों के प्रति छात्रों की रुचि में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। कई कॉलेजों में फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स की सीटें खाली हैं, जबकि कॉमर्स में सीटों से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं। विशेषज्ञ इसे छात्रों के रोजगारपरक और प्रोफेशनल पाठ्यक्रमों की ओर बढ़ते रुझान का संकेत मान रहे हैं।
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रांची यूनिवर्सिटी
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
रांची विश्वविद्यालय में कभी साइंस विषय में दाखिले के लिए छात्रों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा होती थी, लेकिन यूजी सत्र 2026-30 में तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। राजधानी के अधिकांश कॉलेजों में साइंस की सीटें खाली पड़ी हैं, जबकि कॉमर्स में छात्रों का उत्साह लगातार बढ़ रहा है। कई कॉलेजों में कॉमर्स की सीटों से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं। सबसे चिंताजनक स्थिति फिजिक्स विषय की है।
कॉलेज में फिजिक्स की 120-120 सीटें उपलब्ध हैं
रांची वीमेंस कॉलेज और डोरंडा कॉलेज में फिजिक्स की 120-120 सीटें उपलब्ध हैं, लेकिन दोनों कॉलेजों में अब तक केवल तीन-तीन आवेदन ही प्राप्त हुए हैं। केमिस्ट्री और मैथ्स में भी सीटों की तुलना में आवेदन काफी कम हैं। डोरंडा कॉलेज में केमिस्ट्री के लिए 36 और मैथ्स के लिए 61 आवेदन मिले हैं, जबकि रांची वीमेंस कॉलेज में केमिस्ट्री के लिए 86 और मैथ्स के लिए 97 आवेदन प्राप्त हुए हैं। मारवाड़ी कॉलेज की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है। यहां फिजिक्स में 74, केमिस्ट्री में 88, मैथ्स में 186 और लाइफ साइंस में सबसे अधिक 238 आवेदन प्राप्त हुए हैं। वहीं, रांची वीमेंस कॉलेज में लाइफ साइंस के लिए 233 और डोरंडा कॉलेज में 100 आवेदन आए हैं।
केवल तीन कॉलेजों में हो रही साइंस की पढ़ाई
इस सत्र में राजधानी में केवल तीन कॉलेज- मारवाड़ी कॉलेज, रांची वीमेंस कॉलेज और डोरंडा कॉलेज में ही साइंस की पढ़ाई हो रही है। रामलखन सिंह यादव कॉलेज, एसएस मेमोरियल कॉलेज और जेएन कॉलेज में साइंस की पढ़ाई पहले ही बंद हो चुकी है। इसके बावजूद प्रमुख विज्ञान विषयों में अपेक्षित संख्या में आवेदन नहीं मिलना विश्वविद्यालय प्रशासन के लिए चिंता का विषय बन गया है।
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विशेषज्ञों का मानना है कि छात्रों का झुकाव अब रोजगारपरक और प्रोफेशनल पाठ्यक्रमों की ओर बढ़ रहा है। यही वजह है कि पारंपरिक विज्ञान विषयों की तुलना में कॉमर्स और अन्य करियर-उन्मुख पाठ्यक्रम अधिक पसंद किए जा रहे हैं। विश्वविद्यालय के लिए यह बदलता रुझान भविष्य की शैक्षणिक योजना और विषयों के पुनर्गठन की आवश्यकता का भी संकेत माना जा रहा है।
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कॉलेज में फिजिक्स की 120-120 सीटें उपलब्ध हैं
रांची वीमेंस कॉलेज और डोरंडा कॉलेज में फिजिक्स की 120-120 सीटें उपलब्ध हैं, लेकिन दोनों कॉलेजों में अब तक केवल तीन-तीन आवेदन ही प्राप्त हुए हैं। केमिस्ट्री और मैथ्स में भी सीटों की तुलना में आवेदन काफी कम हैं। डोरंडा कॉलेज में केमिस्ट्री के लिए 36 और मैथ्स के लिए 61 आवेदन मिले हैं, जबकि रांची वीमेंस कॉलेज में केमिस्ट्री के लिए 86 और मैथ्स के लिए 97 आवेदन प्राप्त हुए हैं। मारवाड़ी कॉलेज की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है। यहां फिजिक्स में 74, केमिस्ट्री में 88, मैथ्स में 186 और लाइफ साइंस में सबसे अधिक 238 आवेदन प्राप्त हुए हैं। वहीं, रांची वीमेंस कॉलेज में लाइफ साइंस के लिए 233 और डोरंडा कॉलेज में 100 आवेदन आए हैं।
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केवल तीन कॉलेजों में हो रही साइंस की पढ़ाई
इस सत्र में राजधानी में केवल तीन कॉलेज- मारवाड़ी कॉलेज, रांची वीमेंस कॉलेज और डोरंडा कॉलेज में ही साइंस की पढ़ाई हो रही है। रामलखन सिंह यादव कॉलेज, एसएस मेमोरियल कॉलेज और जेएन कॉलेज में साइंस की पढ़ाई पहले ही बंद हो चुकी है। इसके बावजूद प्रमुख विज्ञान विषयों में अपेक्षित संख्या में आवेदन नहीं मिलना विश्वविद्यालय प्रशासन के लिए चिंता का विषय बन गया है।
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विशेषज्ञों का मानना है कि छात्रों का झुकाव अब रोजगारपरक और प्रोफेशनल पाठ्यक्रमों की ओर बढ़ रहा है। यही वजह है कि पारंपरिक विज्ञान विषयों की तुलना में कॉमर्स और अन्य करियर-उन्मुख पाठ्यक्रम अधिक पसंद किए जा रहे हैं। विश्वविद्यालय के लिए यह बदलता रुझान भविष्य की शैक्षणिक योजना और विषयों के पुनर्गठन की आवश्यकता का भी संकेत माना जा रहा है।