शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत द्वारा आयोजित देहरादून में चल रहा दून पुस्तक महोत्सव 2026 एक सशक्त मंच बन रहा है, जो पाठकों, विचारकों और कथाकारों को एक साथ लाकर विविध विषयों पर विचारों के समृद्ध आदान-प्रदान का अवसर उपलब्ध करव...और पढ़ें
कविताओं का शहर
मैं कल कविताओं के शहर गई थी।
गली-मोहल्ले, चौक-चौराहे
मॉल-दुकान झुग्गी-झोपड़ियांँ
सभी कविताएंँ इधर-उधर व्यस्त थीं।
चलती-फिरतीं, बैठती-सुस्तातीं,
भींगती-बचतीं
सारी की सारी...और पढ़ें
देहरादून में चल रहे 'दून पुस्तक महोत्सव 2026' के केंद्र में, राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत (एनबीटी) ने एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक पहल की शुरुआत की है—जिसके तहत गढ़वाली और कुमाऊँनी, दोनों भाषाओं में 13-13 पुस्तकों का विमोचन किया गया; यह उत्तराखंड...और पढ़ें
क्या इसलिए देखा था वह स्वराज का सपना?
आज भी स्वराज तो है, लेकिन सिर्फ किताबों में।
जनता तो झेल रही है राज मनमानी का,
भ्रष्टाचार बन गया है मामूली
कहीं बन न जाए यही देश की निशानी ।
ताज़ा ख़बर बस एक ढोंग है...और पढ़ें
23 मार्च को सिर्फ मालाएं चढ़ाना बंद करो,
अगर हिम्मत है तो सवाल उठाना शुरू करो!
क्योंकि
भगत सिंह ने किताबें नहीं, सोच बदली थी,
राजगुरु ने सिर्फ गोली नहीं, डर को मारा था,
सुखदेव ने खामोशी से भी
इंकलाब ल...और पढ़ें
देशभक्ति को भाव से
राष्ट्रीय पोवारी दिवस नाव मा।
अगर येला अंतरराष्ट्रीय कव्हबीन,
त् देशभक्ति व्यक्त न कर पावबीन।।
भारत को माटी की खूशबू से
राष्ट्रीय पोवारी दिवस नाव मा।
अगर येला अंतरराष्ट्रीय कव्हबीन...और पढ़ें
हे ! मेरे देश की अतुलनीय वीरांगनाएँ माताओं
अपने सामर्थ्य और शक्ति को लो पहचान
तुम्हें तो विशेष बनाए है भगवान
एक बार फिर देशभक्ति की बन जाओ मिसाल
ईश्वर ने स्त्री बना कर किया है आपका सम्मान
मेरे देश की माताओं! अपने सा...और पढ़ें
राष्ट्रीय से आमरी मातृभाषा
राष्ट्रीय रहें सदा मातृभाषा।
राष्ट्रीय से संस्कृति आमरी,
समाज आमरो राष्ट्रीय रहें सदा।।
भारत को माटी की
सुगंध से आमरी मातृभाषा मा।
सनातन संस्कृति को
संस्कार से आमरी म...और पढ़ें
हम हैं इस मिट्टी की पहचान
हमसे ही ऊँचा भारत का मान
सीने में तिरंगा दिल में अरमान
युवा है तो सम्भव हर अभियान
ना डरेंगे ना झुकेंगे
सत्य की राह पर ही चलेंगे
देश के लिए जो वक़्त पाए
हंसकर हर बलिदान...और पढ़ें
सुमधुर, सरस, सरल है जिनकी लेखनी
नमन करती उर्वशी और ध्रुवस्वामिनी,
प्रसाद तो हैं हिंदी साहित्य के प्रासाद,
तितली और इरावती करती हैं संवाद,
चन्द्रगुप्त, समुद्रगुप्त तो हैं अजय,
अजातशत्रु क़ो मिली है सदा विजय
काम...और पढ़ें