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Financial Burnout: दूसरों की मदद करते-करते खाली हो रही है जेब? ये स्मार्ट तरीका बचा सकता है आपका पैसा
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
Published by: शिवानी अवस्थी
Updated Wed, 24 Jun 2026 06:25 PM IST
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सार
money management tips: आप अगर दूसरों की आर्थिक परेशानी देखकर तुरंत अपनी सेविंग्स या महीने का बजट बिगाड़ लेती हैं तो संभल जाएं। यह आदत आपको कंगाल कर सकती है।
उधार देने से कैसे बचें
- फोटो : Ai
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विस्तार
मोनिका अग्रवाल
Lending Money Tips: दूसरों की मदद करना बहुत अच्छी बात है, लेकिन कई बार दूसरों का बजट संभालते-संभालते हमारे खुद का बजट बिगड़ जाता है। उधार देने की यह आदत जब मानसिक तनाव और रातों की नींद उड़ाने लगे, तो मेडिकल साइंस इसे ‘फाइनेंशियल बर्नआउट’ कहता है। ऐसे में आपको 'फाइनेंशियल हेल्पिंग बाउंड्री' (आर्थिक लक्ष्मण रेखा) बनानी होगी, ताकि आपकी मानसिक शांति और जेब में बैलेंस बना रहे।
‘इमोशनल टैक्स’ को समझें
अक्सर जब कोई बेहद परेशान होकर मदद मांगता है, तो हमारा दिमाग इमोशनल हाईजैक हो जाता है। न्यूरो-साइकोलॉजी के अनुसार, इस दौरान हमारे दिमाग का दर्द महसूस करने वाला हिस्सा एक्टिव हो जाता है। हमें लगता है कि मदद न करके हम कोई गुनाह कर रहे हैं। इसे ‘इमोशनल टैक्स’ कहते हैं। ऐसे में अगली बार जब कोई पैसा मांगे, तो तुरंत ‘हां’ या ‘न’ न कहें, बल्कि खुद को 24 घंटे का ‘कूलिंग-ऑफ पीरियड’ देकर फैसला लें।
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‘पॉकेट गार्जियन’ की मदद लें
आजकल ऐसे कई नए और स्मार्ट फिनटेक एप्स आ गई हैं, जो आपके खर्चों पर नजर रखते हैं। इनमें स्मार्ट लिंकिंग फीचर है, जो आपके बैंक अकाउंट से कनेक्ट रहता है। आप एप में एक इमरजेंसी हेल्प पूल बना सकती हैं (जैसे महीने का सिर्फ 5,000 रुपये)। अगर कोई आपसे उधार मांगता है, तो आप केवल इसी पूल से पैसा दे सकती हैं। जैसे ही आप इससे ज्यादा ट्रांसफर करने की कोशिश करेंगी, एप आपको लाल सिग्नल या ‘वार्निंग अलर्ट’ देगा।
बिना कड़वाहट के ‘न’ कहना
पैसा मांगने वाले को सीधे ‘न’ कहना कठिन लगता है न? साइकोलॉजिस्ट इस स्थिति में ‘सैंडविच मेथड’ अपनाने की सलाह देते हैं। इसमें पहले सामने वाले की परेशानी के प्रति सहानुभूति दिखाएं, फिर अपनी मजबूरी बताएं और अंत में एक छोटा विकल्प दें, जैसे- “तुम बैंक से मदद ले सकते हो” या “किसी और से बात करके देखो”।
डिजिटल एस्क्रो का इस्तेमाल
अगर उधार देना ही पड़े, तो पैसे देते समय पर्सनल एस्क्रो और पीयर-टू-पीयर पेमेंट टूल्स का इस्तेमाल करें। इसमें आप पैसे देते समय ही आपसी सहमति से वापसी की तारीख सेट कर सकती हैं। यह एप खुद-ब-खुद सामने वाले को बिना किसी कड़वाहट के बहुत ही प्रोफेशनल तरीके से रिमाइंडर भेजता रहता है। इससे आपको बार-बार पैसे मांगने की शर्मिंदगी नहीं उठानी पड़ती।
खुद से कमिटमेंट
आप अपने लिए कुछ नियम भी बनाएं, जैसे- उधार सिर्फ उतना ही दें, जितना अगर वापस न मिले तो दुख न हो। आपका बजट इसकी इजाजत नहीं देता, तो बिना किसी अपराधबोध के मना कर दें। याद रखें, अपनी सेविंग्स बचाना स्वार्थ नहीं, बल्कि आपकी मानसिक और शारीरिक सेहत के लिए एक जरूरी मेडिकल आवश्यकता है।