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Common Women Monsoon Diseases: मानसून में महिलाओं को किन इंफेक्शन का खतरा सबसे ज्यादा रहता है?
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Shruti Gaur
Updated Wed, 24 Jun 2026 05:26 PM IST
सार
Common Women Monsoon Diseases: बारिश का मौसम शुरू होने वाला है, ऐसे में हम आपको महिलाओं से जुड़ी उन दिक्कतों के बारे में जानकारी देंगे, जिनसे ज्यादातर महिलाएं परेशान रहती हैं।
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मानसून में महिलाओं को किन इंफेक्शन का खतरा सबसे ज्यादा रहता है?
- फोटो : AI
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Common Women Monsoon Diseases: बारिश का मौसम जहां गर्मी से राहत लेकर आता है, वहीं यह कई स्वास्थ्य समस्याओं का कारण भी बन सकता है। खासकर महिलाओं के लिए मानसून का समय अतिरिक्त सावधानी बरतने का होता है। इस मौसम में बढ़ी हुई नमी, गीले कपड़े, पसीना और बैक्टीरिया-फंगस की तेजी से बढ़ती संख्या कई तरह के संक्रमणों का खतरा बढ़ा देती है।
मानसून में महिलाओं को किन इंफेक्शन का खतरा सबसे ज्यादा रहता है?
- फोटो : Adobe stock photos
1. यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI)
मानसून के दौरान बढ़ी हुई नमी और बैक्टीरिया की सक्रियता महिलाओं में यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन का खतरा बढ़ा सकती है। यह संक्रमण मूत्राशय, मूत्रमार्ग या किडनी को प्रभावित कर सकता है। इसके सामान्य लक्षणों में पेशाब के दौरान जलन, बार-बार पेशाब आने की इच्छा, पेट के निचले हिस्से में दर्द और कभी-कभी बुखार शामिल हैं। यदि समय पर इलाज न किया जाए तो संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है।
बचाव के तरीके
- दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।
- पेशाब को लंबे समय तक न रोकें।
- टॉयलेट इस्तेमाल करने के बाद सफाई का विशेष ध्यान रखें।
- गीले कपड़े या अंडरगारमेंट्स तुरंत बदलें।
- कॉटन के अंडरगारमेंट्स पहनें।
मानसून में महिलाओं को किन इंफेक्शन का खतरा सबसे ज्यादा रहता है?
- फोटो : Adobe Stock
2. यीस्ट इंफेक्शन
बारिश के मौसम में नमी बढ़ने से फंगस तेजी से पनपता है, जिससे महिलाओं में यीस्ट इंफेक्शन की समस्या बढ़ सकती है। इससे प्राइवेट पार्ट में खुजली, जलन, लालिमा और सफेद डिस्चार्ज की शिकायत हो सकती है। टाइट कपड़े और लंबे समय तक गीले कपड़ों में रहना इसका बड़ा कारण बनता है।
बचाव के तरीके
बारिश के मौसम में नमी बढ़ने से फंगस तेजी से पनपता है, जिससे महिलाओं में यीस्ट इंफेक्शन की समस्या बढ़ सकती है। इससे प्राइवेट पार्ट में खुजली, जलन, लालिमा और सफेद डिस्चार्ज की शिकायत हो सकती है। टाइट कपड़े और लंबे समय तक गीले कपड़ों में रहना इसका बड़ा कारण बनता है।
बचाव के तरीके
- ढीले और सूती कपड़े पहनें।
- गीले कपड़ों में लंबे समय तक न रहें।
- निजी अंगों की स्वच्छता बनाए रखें।
- जरूरत से ज्यादा सुगंधित प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल न करें।
- पसीना आने पर कपड़े बदलें।
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मानसून में महिलाओं को किन इंफेक्शन का खतरा सबसे ज्यादा रहता है?
- फोटो : Adobe stock
3. फंगल स्किन इंफेक्शन
मानसून में त्वचा पर लंबे समय तक नमी बनी रहने से फंगल इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। दाद, खुजली, लाल चकत्ते और रैशेज इसके आम लक्षण हैं। यह समस्या गर्दन, बगल, कमर और त्वचा की सिलवटों वाले हिस्सों में अधिक देखने को मिलती है।
बचाव के तरीके
मानसून में त्वचा पर लंबे समय तक नमी बनी रहने से फंगल इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। दाद, खुजली, लाल चकत्ते और रैशेज इसके आम लक्षण हैं। यह समस्या गर्दन, बगल, कमर और त्वचा की सिलवटों वाले हिस्सों में अधिक देखने को मिलती है।
बचाव के तरीके
- त्वचा को सूखा और साफ रखें।
- नहाने के बाद शरीर को अच्छी तरह पोंछें।
- दूसरों के तौलिये या कपड़े इस्तेमाल न करें।
- पसीना आने पर कपड़े बदल लें।
- डॉक्टर की सलाह के बिना कोई क्रीम न लगाएं।
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मानसून में महिलाओं को किन इंफेक्शन का खतरा सबसे ज्यादा रहता है?
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4. बैक्टीरियल वेजिनोसिस
यह संक्रमण तब होता है जब प्राइवेट पार्ट में मौजूद अच्छे और बुरे बैक्टीरिया का संतुलन बिगड़ जाता है। इसके कारण दुर्गंध, असामान्य डिस्चार्ज और असहजता महसूस हो सकती है। मानसून में बढ़ी नमी इस समस्या के जोखिम को बढ़ा सकती है।
बचाव के तरीके
यह संक्रमण तब होता है जब प्राइवेट पार्ट में मौजूद अच्छे और बुरे बैक्टीरिया का संतुलन बिगड़ जाता है। इसके कारण दुर्गंध, असामान्य डिस्चार्ज और असहजता महसूस हो सकती है। मानसून में बढ़ी नमी इस समस्या के जोखिम को बढ़ा सकती है।
बचाव के तरीके
- निजी स्वच्छता का ध्यान रखें।
- अनावश्यक केमिकल युक्त उत्पादों से बचें।
- साफ और सूती अंडरगारमेंट्स पहनें।
- पर्याप्त पानी पिएं।
- किसी भी लक्षण को नजरअंदाज न करें और डॉक्टर से सलाह लें।