Faster Ageing: पहले की तुलना में अब तेजी से बुढ़ापे की ओर बढ़ रही युवा आबादी, आखिर क्या है इसके पीछे की वजह?
क्या आपने भी गौर किया है कि अब कम उम्र में गंभीर-क्रॉनिक स्वास्थ्य समस्याएं तेजी से बढ़ती जा रही हैं? इतना ही नहीं, विशेषज्ञों का मानना है कि युवा पीढ़ी अब कैलेंडर के हिसाब से नहीं, बल्कि शरीर के अंदर होने वाले बदलावों के हिसाब से पहले की तुलना में ज्यादा तेजी से बूढ़ी हो रही है। इसने कैंसर के खतरे के भी काफी बढ़ा दिया है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
लाइफस्टाइल-खानपान की गड़बड़ी के साथ पर्यावरणीय कारकों ने अब कई ऐसी बीमारियों को काफी आम बना दिया है, जो पहले उम्र बढ़ने के साथ देखी जाती रही थीं। क्या आपने भी ध्यान दिया है कि डायबिटीज हो या दिल की बीमारियां, हाई ब्लड प्रेशर की समस्या हो या फिर कैंसर के मामले, अब काफी ज्यादा रिपोर्ट किए जाने लगे हैं। पिछले एक दशक के ट्रेंड बताते हैं कि ब्रेस्ट कैंसर हो या आंत और अग्न्याशय का कैंसर, अब 20 से 50 साल के लोगों में पहले की तुलना में ज्यादा सामने आ रहे हैं।
इतना ही नहीं, विशेषज्ञों की टीम अब ये भी कह रही है कि पिछली पीढ़ियों की तुलना में अब की युवा आबादी तेजी से बूढ़ी भी होती जा रही है। सुनने में ये थोड़ा अजीब जरूर लग सकता है पर हालिया अध्ययनों में भी इसकी पुष्टि हो रही है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि आज की युवा पीढ़ी कैलेंडर के हिसाब से नहीं, बल्कि शरीर के अंदर होने वाले बदलावों के हिसाब से पहले की तुलना में ज्यादा तेजी से बूढ़ी हो रही है। यही बदलाव कम उम्र में कैंसर के बढ़ते मामलों के पीछे की भी एक बड़ी कड़ी साबित हो सकते हैं।
क्या इसके पीछे का कारण सिर्फ आधुनिक जीवनशैली है या फिर कुछ और?
युवा आबादी तेजी से हो रही है बूढ़ी
यूके और यूनाइटेड स्टेट्स के करीब 1.64 लाख लोगों के ब्लड सैंपल की रिपोर्ट्स पर आधारित इस बड़े अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया कि कई युवाओं की जैविक उम्र उनकी वास्तविक उम्र से अधिक दिखाई दे रही थी। यानी उनका शरीर ऐसी घिसावट के संकेत दे रहा था, जो आमतौर पर ज्यादा उम्र में देखने को मिलते हैं।
- युवा लोग पिछली पीढ़ियों की तुलना में न सिर्फ तेजी से बूढ़े हो रहे हैं, बल्कि इस वजह से उनमें कैंसर का खतरा भी बढ़ता जा रहा है।
- 20 से 49 साल के वयस्कों में ब्रेस्ट, आंत और पैंक्रियाटिक जैसे 11 तरह के कैंसर बढ़ रहे हैं। आम तौर पर यह बीमारी बढ़ती उम्र के साथ देखी जाती थी।
- इसके लिए कई थ्योरी सामने आई हैं जिनमें खराब खान-पान, मोटापा, स्मोकिंग और शराब पीना, गट माइक्रोबायोम में गड़बड़ी के साथ-साथ माइक्रोप्लास्टिक के संपर्क को प्रमुख कारण माना जा रहा था।
क्यों बढ़ती जा रही है बायोलॉजिकल एज?
नेचर मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित शोध अब एक अलग संभावना की ओर इशारा करती है। इसके अनुसार सिर्फ लाइफस्टाइल और पर्यावरणीय कारक ही नहीं, हमारी शरीर का अंदर से ही तेजी से बूढ़ा होता जा रहा है।
- वैज्ञानिक अब केवल व्यक्ति की वास्तविक उम्र (जन्म से अब तक के साल) नहीं देखते, बल्कि जैविक उम्र यानी बायोलॉजिकल एज पर भी ध्यान देते हैं। इसका मतलब है कि शरीर अंदर से कितना स्वस्थ है और कितनी तेजी से उम्र का असर झेल रहा है।
- यह खानपान, नींद, तनाव, शारीरिक फिटनेस, इन्फ्लेमेशन और शरीर के काम करने की क्षमता जैसे कई पहलुओं पर निर्भर करता है।
अध्ययन में क्या पता चला?
इसे समझने के लिए शोधकर्ताओं ने ब्रिटेन और अमेरिका के करीब 1.64 लाख लोगों के ब्लड सैंपल्स का अध्ययन किया। इसमें पाया गया कि अब 30-40 की उम्र के कई लोगों में शरीर के तेजी से बूढ़ा होने के संकेत दिखाई दे रहे हैं। उनके माता-पिता की पीढ़ी में ऐसा पैटर्न नहीं देखा गया था।
1965 से 1974 के बीच जन्मे लोगों की कोशिकाओं में उम्र बढ़ने के ऐसे संकेत मिले, जो उनसे लगभग 20 साल पहले जन्मे लोगों की तुलना में ज्यादा थे। यानी उनकी असली उम्र कुछ भी हो, लेकिन उनका शरीर अंदर से अपेक्षा से ज्यादा बूढ़ा दिखाई दे रहा था।
कैंसर का बढ़ता खतरा
शोधकर्ता कहते हैं, इस रिपोर्ट को सिर्फ कम उम्र में बढ़ती उम्र के संकेतों के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इसका सीधा असर युवाओं में बढ़ते कैंसर के मामलों से जुड़ा हो सकता है।
यह निष्कर्ष रक्त के नमूनों और अन्य स्वास्थ्य संबंधी आंकड़ों की तुलना करके निकाला गया। इसके बाद वैज्ञानिकों ने शरीर में वियर एंड टियर के संकेत भी ढूंढने शुरू किए। इसमें डीएनए को हुए नुकसान और लगातार बनी रहने वाली सूजन जैसे बदलावों पर गौर किया गया।
डीएनए हमारे शरीर का आनुवंशिक ब्लूप्रिंट होता है और इसमें नुकसान होने से कोशिकाएं गलत तरीके से काम कर सकती हैं। ऐसी समस्याएं अक्सर अस्वस्थ जीवनशैली या प्रदूषण के संपर्क से जुड़ी होती हैं।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
विशेषज्ञों ने पाया कि अभी जिन लोगों की उम्र करीब 50 साल है, उनमें युवावस्था के दौरान शरीर के तेजी से बूढ़ा होने की रफ्तार 70 की उम्र वालों की तुलना में 23 प्रतिशत ज्यादा पाई गई। अध्ययन के लेखक और वाशिंगटन स्कूल ऑफ मेडिसिन के शोधकर्ता यिन काओ कहते हैं, जैविक उम्र केवल जन्मदिनों की संख्या नहीं बताती, बल्कि यह दर्शाती है कि शरीर की कोशिकाओं और ऊतकों में समय के साथ कितना नुकसान जमा हो चुका है।
- अब लोगों में क्रॉनिक इंफ्लेमेशन,इम्यून सिस्टम की गड़बड़ी और कोशिकाओं में क्षति जैसी स्थितियां ज्यादा देखी जा रही हैं।
- कुछ वयस्कों में ये बदलाव सामान्य से पहले शुरू हो रहे हैं और यही आने वाली पीढ़ियों में कम उम्र में बढ़ते कैंसर के मामलों की एक वजह हो सकती है।
यूके के बार्ट्स कैंसर इंस्टीट्यूट के विशेषज्ञ डॉ. जॉन रिचेस कहते हैं, अध्ययन इस बात को भी मजबूत करता है कि हमारा वातावरण, जीवनशैली और समग्र स्वास्थ्य लंबे समय तक शरीर की जैविक प्रक्रियाओं को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि ये साबित नहीं होता कि तेजी से जैविक उम्र बढ़ना सीधे कैंसर का कारण है, लेकिन भविष्य के शोध के लिए यह एक मजबूत आधार जरूर तैयार करता है।
--------------
स्रोत:
Biological aging and generational shifts in early-onset cancer risk
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।