Samwad 2026: 'कुछ बीमारियां खत्म, कुछ खत्म होने की कगार पर', स्वास्थ्य मंत्री ने दी उपलब्धियों की जानकारी
उत्तराखंड में आयोजित अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने बताया पहले बीमार पड़ो तब इलाज करो वाली सोच होती थी, अब हम प्रिवेंटिव हेल्थ की तरफ बढ़ रहे हैं। कई बीमारियों पर हमने पूरी तरह विजय प्राप्त कर ली है।
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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने देहरादून में आयोजित अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में, देश में हुए स्वास्थ्य सुधारों के बारे में जानकारी साझा की। उन्होंने कहा, कोई भी देश तभी प्रगति कर सकता है जब उसकी सेहत ठीक हो। सेहत अच्छी होगी तो इकॉनिमक डेवलपमेंट होगा, प्रोडक्टिविटी बढ़ेगी, इसलिए स्वास्थ्य पर ध्यान देना बहुत आवश्यकता है।
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया, 2017 में हमने हेल्थ पॉलिसी के ढांचे में बदलाव किया। पहले बीमार पड़ो तब इलाज कराओ वाली सोच होती थी, अब हम प्रिवेंटिव हेल्थ की तरफ बढ़ रहे हैं। हम उन उपायों पर ध्यान दे रहे हैं जिससे बीमारी के खतरे को पहले ही कम किया जा सके। क्रॉनिक बीमारियां हों या मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, हम हर दिशा में लगातार काम कर रहे हैं।
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया, भारत ने अपने व्यापक प्रयास से कई बीमारियों पर विजय प्राप्त कर ली है और कई बीमारियों से मुक्त होने की आखिरी सीढ़ी पर है।
2014 से पोलियो फ्री है भारत
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, भारत को साल 2014 में पोलियो मुक्त घोषित किया गया था, हम अब भी उस कामयाबी के साथ चल रहे हैं।
- भारत में हर साल 2 करोड़ बच्चे पैदा हो रहे हैं, ये कोई छोटा नंबर नहीं है। सभी बच्चों को पल्स पोलियो की मुफ्त खुराक उपलब्ध कराने और देश को पोलियो मुक्त बनाए रखने के लिए हम लगातार प्रयास कर रहे हैं।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, अमेरिका जैसे देशों में पोलियो के मामले सामने आने की जानकारियां मिली हैं। भारत जैसे बड़े देश में हम एक दशक से अधिक समय से पोलियो फ्री बने हुए हैं। पोलियो के अलावा कालाजार रोग पर भी हम विजय के करीब हैं। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) का सर्टिफिकेट मिलने में बस एक साल का समय रह गया है।
ट्रेकोमा-लेप्रोसी भी अब चिंता का विषय नहीं
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने बताया, कालाजार फ्री देश होने की तरफ हम बिल्कुल नजदीक हैं। भारत को मई 2015 में विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा आधिकारिक तौर पर मातृ और नवजात टेटनस (Neonatal Tetanus) मुक्त घोषित किया जा चुका है। ट्रेकोमा अब हमारे लिए चिंता का विषय नहीं रहा है। लेप्रोसी (कुष्ठ रोग) पर भी हम विजय प्राप्त करने के एकदम करीब हैं। इन बीमारियों के बारे में जान लीजिए।
- पोलियो: पोलियो रोग, पोलियोवायरस के कारण होने वाली अत्यधिक संक्रामक बीमारी है। ये तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करती है और स्थायी लकवा का कारण बनती है। बच्चों में इसका सबसे ज्यादा खतरा देखा जाता रहा है।
- मातृ और नवजात टेटनस: क्लोस्ट्रीडियम टेटानी बैक्टीरिया से होने वाली एक घातक बीमारी है। अस्वच्छ परिस्थितियों में प्रसव होने और शिशु की गर्भनाल को गंदे उपकरणों से काटने के कारण ये समस्या होती थी।
- ट्रेकोमा आंखों में संक्रमण की बीमारी है, जो 'क्लेमाइडिया ट्रैकोमैटिस' नामक बैक्टीरिया के संक्रमण से होती है। यह मुख्यरूप से आंख, पलकों और कॉर्निया को प्रभावित करती है और स्थायीअंधेपन का कारण बन सकती है।
- लेप्रोसी (कुष्ठ रोग) बैक्टीरियल संक्रमण है जो माइकोबैक्टीरियम लेप्री बैक्टीरिया के कारण होता है। यह मुख्य रूप से त्वचा, नसों और आंखों को प्रभावित करता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।