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शरीर को डिटाॅक्स करने के चक्कर में न करें ये गलतियां, अपनाएं 7 आसान स्वस्थ आदतें
Fri, 02 Oct 2026 05:09 PM IST
शिवानी अवस्थी
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिवानी अवस्थी
Updated Fri, 02 Oct 2026 05:09 PM IST
सार
Detox Mistakes You Should Avoid: हमारा शरीर खुद कई प्राकृतिक प्रक्रियाओं के जरिए अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालता है। इसलिए किसी क्विक डिटॉक्स के पीछे भागने के बजाय रोज की ऐसी आदतों पर ध्यान देना ज्यादा उपयोगी है, जो लंबे समय तक स्वास्थ्य को सपोर्ट करें।
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स्वस्थ आदतें
- फोटो : AI
विस्तार
आजकल डिटॉक्स’ शब्द काफी आम हो गया है। सोशल मीडिया पर कई तरह के डिटॉक्स ड्रिंक, जूस क्लीनज, लंबे उपवास और सप्लीमेंट्स को शरीर को साफ या रीसेट करने का तरीका बताया जाता है। लेकिन क्या स्वस्थ रहने के लिए बार-बार किसी खास डिटॉक्स प्लान की जरूरत होती है?
असल में हमारा शरीर खुद कई प्राकृतिक प्रक्रियाओं के जरिए अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालता है। इसलिए किसी क्विक डिटॉक्स के पीछे भागने के बजाय रोज की ऐसी आदतों पर ध्यान देना ज्यादा उपयोगी है, जो लंबे समय तक स्वास्थ्य को सपोर्ट करें।
अगर आप खुद को ज्यादा स्वस्थ और एक्टिव रखना चाहते हैं, तो अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में इन 7 आसान आदतों को शामिल कर सकते हैं।
1. डिटॉक्स ड्रिंक नहीं, पानी को दें प्राथमिकता
सुबह उठकर कोई खास डिटॉक्स ड्रिंक पीना जरूरी नहीं है। दिन की शुरुआत पानी से करना एक सरल आदत हो सकती है। दिनभर अपनी प्यास और शरीर की जरूरत के अनुसार पर्याप्त पानी पीते रहें। गर्म मौसम या ज्यादा शारीरिक गतिविधि के दौरान तरल पदार्थों की जरूरत बढ़ सकती है। हालांकि, कुछ स्वास्थ्य स्थितियों में पानी या अन्य तरल पदार्थों की मात्रा अलग हो सकती है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर की सलाह को प्राथमिकता दें।
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2. जूस क्लीनज के बजाय फाइबर वाली चीजें खाएं
सिर्फ जूस पीकर रहने से संतुलित पोषण मिलना मुश्किल हो सकता है। जूस की जगह अपने खाने में फल, सब्जियां, दालें, बीन्स और साबुत अनाज शामिल करें।
फाइबर पाचन तंत्र के सामान्य कामकाज के लिए जरूरी है। इसलिए खाने में अलग-अलग तरह के पौष्टिक खाद्य पदार्थ शामिल करना बेहतर आदत है।
स्वस्थ खाने का मतलब भूखे रहना नहीं है। शरीर को नियमित और संतुलित पोषण देना ज्यादा महत्वपूर्ण है।
3. एक्सरसाइज के लिए किसी खास दिन का इंतजार न करें
पूरे सप्ताह बैठे रहने और फिर एक दिन बहुत ज्यादा एक्सरसाइज करने के बजाय रोज थोड़ा-थोड़ा सक्रिय रहना आसान और व्यावहारिक हो सकता है। आप इसके लिए छोटी आदतें अपना सकते हैं,
4. नींद को भी दें उतनी ही अहमियत
अगर आप रोज देर रात तक जागते हैं और दिनभर की थकान को कॉफी या एनर्जी ड्रिंक से संभालने की कोशिश करते हैं, तो कोई डिटॉक्स प्लान इसका विकल्प नहीं बन सकता।
सोने और उठने का समय जितना संभव हो, नियमित रखें। सोने से पहले मोबाइल और दूसरी स्क्रीन का इस्तेमाल कम करने की कोशिश करें।
अच्छी नींद शरीर और दिमाग को आराम देने के लिए जरूरी है। इसलिए फिटनेस रूटीन में नींद को भी प्राथमिकता दें।
5. शरीर नहीं, अपनी दिनचर्या को ‘रीसेट’ करें
अगर आपकी रोज की आदतों में देर रात तक जागना, अनियमित खाना, कम शारीरिक गतिविधि और बहुत ज्यादा प्रोसेस्ड फूड शामिल है, तो कुछ दिनों का डिटॉक्स इन आदतों की जगह नहीं ले सकता।
इसके बजाय महीने में एक बार अपनी दिनचर्या का छोटा सा रूटीन ऑडिट करें। खुद से पूछें,
6. तनाव को भी गंभीरता से लें
स्वास्थ्य सिर्फ खान-पान और एक्सरसाइज का नाम नहीं है। लगातार तनाव नींद, खाने की आदतों और रोजमर्रा की गतिविधियों को प्रभावित कर सकता है। इसलिए दिन में कुछ समय खुद के लिए निकालें। आप गहरी सांस लेने, ध्यान, योग, संगीत सुनने, टहलने या कुछ समय स्क्रीन से दूर रहने जैसी गतिविधियों को आजमा सकते हैं। ये तरीके किसी बीमारी का इलाज नहीं हैं, लेकिन तनाव को संभालने वाली स्वस्थ दिनचर्या का हिस्सा हो सकते हैं।
7. ‘नेचुरल’ या ‘डिटॉक्स’ लिखा देखकर तुरंत भरोसा न करें
किसी उत्पाद पर नेचुरल, हर्बल या डिटॉक्स लिखा होना यह साबित नहीं करता कि वह हर व्यक्ति के लिए सुरक्षित है। कुछ हर्बल उत्पाद और सप्लीमेंट्स दवाओं के साथ प्रतिक्रिया कर सकते हैं या कुछ स्वास्थ्य स्थितियों में नुकसान पहुंचा सकते हैं।
अगर लगातार थकान, पाचन संबंधी परेशानी, अचानक वजन में बदलाव या कोई दूसरा चिंताजनक लक्षण है, तो इसे केवल ‘टॉक्सिन’ की समस्या मानकर खुद से डिटॉक्स शुरू न करें। लगातार लक्षण होने पर योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।
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असल में हमारा शरीर खुद कई प्राकृतिक प्रक्रियाओं के जरिए अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालता है। इसलिए किसी क्विक डिटॉक्स के पीछे भागने के बजाय रोज की ऐसी आदतों पर ध्यान देना ज्यादा उपयोगी है, जो लंबे समय तक स्वास्थ्य को सपोर्ट करें।
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अगर आप खुद को ज्यादा स्वस्थ और एक्टिव रखना चाहते हैं, तो अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में इन 7 आसान आदतों को शामिल कर सकते हैं।
1. डिटॉक्स ड्रिंक नहीं, पानी को दें प्राथमिकता
सुबह उठकर कोई खास डिटॉक्स ड्रिंक पीना जरूरी नहीं है। दिन की शुरुआत पानी से करना एक सरल आदत हो सकती है। दिनभर अपनी प्यास और शरीर की जरूरत के अनुसार पर्याप्त पानी पीते रहें। गर्म मौसम या ज्यादा शारीरिक गतिविधि के दौरान तरल पदार्थों की जरूरत बढ़ सकती है। हालांकि, कुछ स्वास्थ्य स्थितियों में पानी या अन्य तरल पदार्थों की मात्रा अलग हो सकती है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर की सलाह को प्राथमिकता दें।
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2. जूस क्लीनज के बजाय फाइबर वाली चीजें खाएं
सिर्फ जूस पीकर रहने से संतुलित पोषण मिलना मुश्किल हो सकता है। जूस की जगह अपने खाने में फल, सब्जियां, दालें, बीन्स और साबुत अनाज शामिल करें।
फाइबर पाचन तंत्र के सामान्य कामकाज के लिए जरूरी है। इसलिए खाने में अलग-अलग तरह के पौष्टिक खाद्य पदार्थ शामिल करना बेहतर आदत है।
स्वस्थ खाने का मतलब भूखे रहना नहीं है। शरीर को नियमित और संतुलित पोषण देना ज्यादा महत्वपूर्ण है।
3. एक्सरसाइज के लिए किसी खास दिन का इंतजार न करें
पूरे सप्ताह बैठे रहने और फिर एक दिन बहुत ज्यादा एक्सरसाइज करने के बजाय रोज थोड़ा-थोड़ा सक्रिय रहना आसान और व्यावहारिक हो सकता है। आप इसके लिए छोटी आदतें अपना सकते हैं,
- थोड़ी दूरी के लिए पैदल चलें।
- लंबे समय तक बैठने के बीच उठकर थोड़ा चलें।
- संभव हो तो सीढ़ियों का इस्तेमाल करें।
- सुबह या शाम नियमित वॉक करें।
- भोजन के बाद हल्की वॉक को रूटीन में शामिल करें।
4. नींद को भी दें उतनी ही अहमियत
अगर आप रोज देर रात तक जागते हैं और दिनभर की थकान को कॉफी या एनर्जी ड्रिंक से संभालने की कोशिश करते हैं, तो कोई डिटॉक्स प्लान इसका विकल्प नहीं बन सकता।
सोने और उठने का समय जितना संभव हो, नियमित रखें। सोने से पहले मोबाइल और दूसरी स्क्रीन का इस्तेमाल कम करने की कोशिश करें।
अच्छी नींद शरीर और दिमाग को आराम देने के लिए जरूरी है। इसलिए फिटनेस रूटीन में नींद को भी प्राथमिकता दें।
5. शरीर नहीं, अपनी दिनचर्या को ‘रीसेट’ करें
अगर आपकी रोज की आदतों में देर रात तक जागना, अनियमित खाना, कम शारीरिक गतिविधि और बहुत ज्यादा प्रोसेस्ड फूड शामिल है, तो कुछ दिनों का डिटॉक्स इन आदतों की जगह नहीं ले सकता।
इसके बजाय महीने में एक बार अपनी दिनचर्या का छोटा सा रूटीन ऑडिट करें। खुद से पूछें,
- मैं रोज कितनी देर सोता/सोती हूं?
- क्या मेरी डाइट संतुलित है?
- मैं दिनभर कितना सक्रिय रहता/रहती हूं?
- मैं लगातार कितनी देर स्क्रीन देखता/देखती हूं?
- क्या मुझे आराम और मानसिक शांति के लिए समय मिलता है?
6. तनाव को भी गंभीरता से लें
स्वास्थ्य सिर्फ खान-पान और एक्सरसाइज का नाम नहीं है। लगातार तनाव नींद, खाने की आदतों और रोजमर्रा की गतिविधियों को प्रभावित कर सकता है। इसलिए दिन में कुछ समय खुद के लिए निकालें। आप गहरी सांस लेने, ध्यान, योग, संगीत सुनने, टहलने या कुछ समय स्क्रीन से दूर रहने जैसी गतिविधियों को आजमा सकते हैं। ये तरीके किसी बीमारी का इलाज नहीं हैं, लेकिन तनाव को संभालने वाली स्वस्थ दिनचर्या का हिस्सा हो सकते हैं।
7. ‘नेचुरल’ या ‘डिटॉक्स’ लिखा देखकर तुरंत भरोसा न करें
किसी उत्पाद पर नेचुरल, हर्बल या डिटॉक्स लिखा होना यह साबित नहीं करता कि वह हर व्यक्ति के लिए सुरक्षित है। कुछ हर्बल उत्पाद और सप्लीमेंट्स दवाओं के साथ प्रतिक्रिया कर सकते हैं या कुछ स्वास्थ्य स्थितियों में नुकसान पहुंचा सकते हैं।
अगर लगातार थकान, पाचन संबंधी परेशानी, अचानक वजन में बदलाव या कोई दूसरा चिंताजनक लक्षण है, तो इसे केवल ‘टॉक्सिन’ की समस्या मानकर खुद से डिटॉक्स शुरू न करें। लगातार लक्षण होने पर योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।