Baldness Treatment: गायब हो गए थे सिर के सारे बाल, 6 महीने में ठीक हो गया गंजापन; जानिए कैसे हुआ ये कमाल
शोधकर्ताओं ने एलोपेसिया एरीटा से जूझ रहे लोगों पर खास दवा का असर देखा है। इसमें शरीर की अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से बालों की जड़ों को ही डैमेज करने लगती है। इससे सिर पर गोल-गोल खाली पैच बनने और सिर के सारे बाल झड़ने तक की स्थिति पैदा हो सकती है। ऐसे मरीजों के लिए एक अच्छी खबर सामने आ रही है।
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बालों का झड़ना और गंजापन मौजूदा समय की तेजी से बढ़ती समस्याओं में से एक है। भारतीय आबादी भी इससे काफी परेशान देखी जा रही है। बाल झड़ना सिर्फ स्किन की समस्या भर नहीं है, ये आपके आत्मविश्वास पर भी नकारात्मक असर डालती है।
पूरे भारत में क्लिनिकल स्टडीज और बड़े पैमाने पर कंज्यूमर हेल्थ प्लेटफॉर्म्स से मिले डेटा से पता चलता है कि ये समस्या अब बहुत कम उम्र में ही शुरू हो रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसके लिए तनाव, लाइफस्टाइल में गड़बड़ी, अंदरूनी बीमारियों के अलावा कुछ मामलों में ऑटोइम्यूम बीमारियों को भी बड़ा कारण मानते आ रहे हैं। डेटा से पता चलता है कि 25 की उम्र में बालों के पतले और कमजोर होने की समस्या 50% से ज्यादा भारतीय पुरुषों में देखी जा रही है।
- भारत में बाल झड़ने के क्लिनिकल मामलों में से लगभग 40.7% मामले टेलोजन एफ्लुवियम के होते हैं। ये बालों के झड़ने की एक अस्थायी समस्या है। इसमें सिर के सामान्य से बहुत ज्यादा बाल एक साथ झड़ने लगते हैं। यह अक्सर गंभीर तनाव और पोषण की कमी से जुड़ा होता है। फीमेल पैटर्न हेयर लॉस के मामले लगभग 22.1% हैं।
हालांकि अब बालों की समस्या से परेशान लोगों के लिए राहत भरी खबर सामने आ रही है। विशेषज्ञों की टीम ने एक ऐसी दवा के बारे में बताया है जिसकी मदद से छह महीने में 80% तक बाल वापस आ सकते हैं। गठिया और आंतों से जुड़ी कुछ बीमारियों के इलाज में पहले से इस्तेमाल हो रही इस दवा को बालों की समस्याओं में भी बहुत फायदेमंद पाया गया है।
अगर आप भी बालों के झड़ने या गंजेपन से परेशान हैं तो आइए जान लेते हैं कि इससे कैसे छुटकारा पाया जा सकता है?
बाल झड़ने-गंजेपन की असरदार दवा
बालों से संबंधित परेशानियों के इलाज में इस्तेमाल की जा सकने वाली दवा उपाडासिटिनिब ने शोधकर्ताओं का ध्यान खींचा है। यह शरीर की उस अत्यधिक सक्रिय प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को शांत करने का काम करती है, जो बीमारी में स्वस्थ ऊतकों पर हमला कर रही होती है। करीब 1,400 लोगों पर हुए दो बड़े क्लीनिकल ट्रायल में इसके नतीजे काफी उम्मीद बढ़ाने वाले माने जा रहे हैं।
अमेरिकिन वैज्ञानिकों की टीम ने अध्ययन में पाया कि आर्थराइटिस और क्रोहन डिजीज जैसी बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली रोजाना की गोली उपाडासिटिनिब गंभीर रूप से झड़ चुके बालों को दोबारा उगाने में मदद कर सकती है।
- हालांकि यह बात खास तौर पर एलोपेसिया एरीटा नाम की बीमारी से जुड़े बालों के झड़ने के मामले में सामने आई है, न कि हर तरह के गंजेपन में।
- एलोपेसिया एरीटा एक ऑटोइम्यून बीमारी है जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से बालों की जड़ों (फॉलिकल्स) पर अटैक कर देती है। इसके कारण सिर, दाढ़ी या शरीर के अन्य हिस्सों पर सिक्के के आकार के गोल चिकने गंजे पैच बनने लगते हैं।
यहां समझना जरूरी है कि एलोपेसिया एरीटा सामान्य पैटर्न गंजेपन से बिल्कुल अलग है। पैटर्न गंजापन वह स्थिति है जिसमें उम्र और आनुवंशिक कारणों से धीरे-धीरे बाल कम होते जाते हैं। यह समस्या 50 साल की उम्र तक करीब 85 फीसदी पुरुषों में किसी न किसी स्तर पर दिखाई दे सकती है। जबकि एलोपेसिया एरीटा में छोटे-छोटे पैच के आकार में बाल जाने शुरू होते हैं।
अध्ययन में क्या पता चला?
उपाडासिटिनिब दवा को लेकर किए गए अध्ययन में पाया गया कि करीब छह महीने तक इसका इस्तेमाल करने वाले मरीज जिनके सिर पर काफी मात्रा में बाल चले गए थे, उनमें आधे से ज्यादा लोगों के 80 फीसदी बाल दोबारा उग आए। 30 मिलीग्राम दवा खुराक लेने वाले करीब 55 फीसदी मरीजों में इसके लाभ देखे गए। यह दवा शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली की अत्यधिक सक्रियता को कम करती है।
इससे पहले भी कुछ देशों में एलोपेसिया एरीटा के इलाज के लिए बैरीसिटिनिब जैसी गठिया की अन्य दवाओं को मंजूरी मिल चुकी है। अब शोधकर्ताओं का कहना है कि गंभीर रूप से बाल झड़ने की समस्या से जूझ रहे वयस्कों और किशोरों के लिए उपडासिटिनिब को संभावित इलाज के तौर पर देखा जाना चाहिए।
जेएएमए डर्मेटोलॉजी में प्रकाशित अध्ययन में प्रमुख लेखक और त्वचा रोग विशेषज्ञ प्रोफेसर अराश मोस्तागीमी कहते हैं, एलोपेसिया एरीटा मरीजों के मानसिक और सामाजिक जीवन पर गहरा असर डाल सकती है। कुछ मरीजों में सिर पर छोटे-छोटे गोल पैच बनते हैं और उन जगहों से बाल गायब हो जाते हैं। वहीं कुछ गंभीर मामलों में कुछ ही हफ्तों के भीतर सिर के साथ-साथ शरीर के लगभग सभी बाल झड़ सकते हैं।
80% तक वापस आ गए बाल
इस अध्ययन के लिए करीब 1,400 मरीजों (12 से 64 की उम्र) को शामिल किया गया। सभी को गंभीर एलोपेसिया एरियाटा था। कुछ मामलों में यह समस्या आठ साल तक पुरानी थी।
- मरीजों को अलग-अलग समूहों में बांटा गया। कुछ को रोजाना 15 मिलीग्राम उपाडासिटिनिब दी गई, कुछ को 30 मिलीग्राम और कुछ को प्लेसिबो यानी ऐसी गोली दी गई।
- 24 सप्ताह के बाद देखा गया कि 15 मिलीग्राम लेने वाले करीब 45 फीसदी और 30 मिलीग्राम लेने वाले करीब 55 फीसदी मरीजों के सिर पर कम से कम 80 फीसदी बाल वापस आ गए।
- प्लेसिबो लेने वाले मरीजों में यह आंकड़ा केवल 3.4 फीसदी था।
- ज्यादातर मरीजों को दवा शुरू करने के करीब दो महीने के भीतर ही बालों में बदलाव दिखाई देने लगा था।
इस दवा के इस्तेमाल के दौरान कुछ लोगों में मुंहासे, सांस की ऊपरी नली में संक्रमण और सर्दी-जुकाम जैसे साइड-इफेक्ट्स देखे गए। हालांकि अध्ययन में दवा से जुड़ी कोई गंभीर चिंता सामने नहीं आई।
हर किसी के लिए नहीं है ये दवा
अध्ययन की रिपोर्ट के आधार पर शोधकर्ता कहते हैं, गंभीर एलोपेसिया एरीटा वाले वयस्कों और किशोरों के लिए उपाडासिटिनिब एक प्रभावी उपचार विकल्प हो सकती है।
उपाडासिटिनिब को जेएके इनहिबिटर दवाओं के समूह में रखा जाता है। जेएके ऐसे प्रोटीन होते हैं जो शरीर में सूजन और प्रतिरक्षा प्रणाली से जुड़े संकेतों को आगे पहुंचाने का काम करती हैं। यह दवा इन संकेतों को रोकने में मदद करती है।
गठिया में इसका इस्तेमाल इसलिए किया जाता रहा है क्योंकि यह प्रतिरक्षा प्रणाली को जोड़ों पर हमला करने से भी रोकने में मदद करती है। एलोपेसिया एरियाटा में यही तरीका बालों की जड़ों पर होने वाले प्रतिरक्षा हमले को कम करने में मदद कर सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल इस दवा को लेकर और विस्तार से जांच की जा रही है। इसे खुद से लेने की गलती न करें, ये हमेशा विस्तृत जांच और विशेषज्ञ की सलाह पर ही दी जानी चाहिए। एलोपेसिया एरियाटा कुछ मामलों में थायरॉयड की बीमारी, विटिलिगो यानी सफेद दाग और टाइप-1 डायबिटीज जैसी दूसरी ऑटोइम्यून बीमारियों से भी संबंधित हो सकती है। उपाडासिटिनिब हर तरह के गंजेपन की दवा नहीं है।
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स्रोत:
Treatment of Crohn's Disease and Concomitant Alopecia Areata With Tofacitinib
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