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Monsoon Health Tips: क्या बरसात में कम पानी पीना सही है? जानें एक्सपर्ट की राय
Thu, 13 Aug 2026 11:58 AM IST
Shruti Gaur
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Shruti Gaur
Updated Thu, 13 Aug 2026 11:58 AM IST
सार
Risk of Dehydration in Rainy Season: अक्सर आपने सुना होगा कि बरिश के मौसम में डिहाइड्रेशन नहीं होता। इस बात में कितनी सच्चाई है, आइए जानते हैं।
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क्या मानसून में भी डिहाइड्रेशन हो सकता है ?
- फोटो : AI
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Risk of Dehydration in Rainy Season: बारिश का मौसम आते ही गर्मी और लू से थोड़ी राहत जरूर मिलती है, लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि इस दौरान शरीर में पानी की कमी नहीं हो सकती। अक्सर लोग मानते हैं कि मानसून में मौसम ठंडा और नम रहता है, इसलिए डिहाइड्रेशन का खतरा खत्म हो जाता है। यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है।
क्या मानसून में भी डिहाइड्रेशन हो सकता है ?
- फोटो : Freepik.com
मानसून में क्यों हो सकता है डिहाइड्रेशन?
मानसून में तापमान भले ही कम महसूस हो, लेकिन हवा में नमी यानी ह्यूमिडिटी काफी ज्यादा हो सकती है। ज्यादा नमी में पसीने का वाष्पीकरण धीमा हो जाता है। इसका मतलब यह है कि शरीर पसीना तो निकाल रहा होता है, लेकिन पसीना त्वचा से आसानी से सूख नहीं पाता।
इससे शरीर को ठंडा रखने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है और पानी की कमी का खतरा बना रहता है। इसके अलावा बारिश के मौसम में कई लोगों की पानी पीने की आदत कम हो जाती है, क्योंकि गर्मी की तुलना में प्यास कम लगती है।
मानसून में तापमान भले ही कम महसूस हो, लेकिन हवा में नमी यानी ह्यूमिडिटी काफी ज्यादा हो सकती है। ज्यादा नमी में पसीने का वाष्पीकरण धीमा हो जाता है। इसका मतलब यह है कि शरीर पसीना तो निकाल रहा होता है, लेकिन पसीना त्वचा से आसानी से सूख नहीं पाता।
इससे शरीर को ठंडा रखने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है और पानी की कमी का खतरा बना रहता है। इसके अलावा बारिश के मौसम में कई लोगों की पानी पीने की आदत कम हो जाती है, क्योंकि गर्मी की तुलना में प्यास कम लगती है।
क्या मानसून में भी डिहाइड्रेशन हो सकता है ?
- फोटो : Freepik.com
दस्त और उल्टी से बढ़ सकता है खतरा
मानसून में दूषित पानी या भोजन के कारण पेट से जुड़ी समस्याएं बढ़ सकती हैं। दस्त और उल्टी होने पर शरीर से पानी के साथ सोडियम, पोटैशियम और दूसरे इलेक्ट्रोलाइट्स भी बाहर निकल सकते हैं। अगर इनकी भरपाई नहीं की जाए तो डिहाइड्रेशन हो सकता है। WHO के अनुसार दस्त के दौरान होने वाला डिहाइड्रेशन शरीर के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
मानसून में दूषित पानी या भोजन के कारण पेट से जुड़ी समस्याएं बढ़ सकती हैं। दस्त और उल्टी होने पर शरीर से पानी के साथ सोडियम, पोटैशियम और दूसरे इलेक्ट्रोलाइट्स भी बाहर निकल सकते हैं। अगर इनकी भरपाई नहीं की जाए तो डिहाइड्रेशन हो सकता है। WHO के अनुसार दस्त के दौरान होने वाला डिहाइड्रेशन शरीर के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
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क्या मानसून में भी डिहाइड्रेशन हो सकता है ?
- फोटो : Freepik.com
डिहाइड्रेशन के इन संकेतों को न करें नजरअंदाज
बारिश के मौसम में अगर आपको लगातार प्यास लग रही है, मुंह या जीभ सूख रही है, पेशाब कम आ रहा है या उसका रंग सामान्य से ज्यादा गहरा है, कमजोरी या चक्कर महसूस हो रहे हैं, तो शरीर में पानी की कमी का संकेत हो सकता है। गंभीर स्थिति में अत्यधिक सुस्ती, भ्रम, बहुत कम पेशाब आना या पानी पीने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। ऐसे लक्षणों में तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
बारिश के मौसम में अगर आपको लगातार प्यास लग रही है, मुंह या जीभ सूख रही है, पेशाब कम आ रहा है या उसका रंग सामान्य से ज्यादा गहरा है, कमजोरी या चक्कर महसूस हो रहे हैं, तो शरीर में पानी की कमी का संकेत हो सकता है। गंभीर स्थिति में अत्यधिक सुस्ती, भ्रम, बहुत कम पेशाब आना या पानी पीने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। ऐसे लक्षणों में तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
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क्या मानसून में भी डिहाइड्रेशन हो सकता है ?
- फोटो : Freepik.com
मानसून में खुद को हाइड्रेटेड कैसे रखें?
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
- प्यास कम लगने पर भी नियमित अंतराल पर पानी पीते रहें।
- बाहर जाते समय पानी की बोतल साथ रखें।
- दस्त या उल्टी होने पर डॉक्टर की सलाह के अनुसार ORS जैसे उचित इलेक्ट्रोलाइट घोल का इस्तेमाल करें।
- नारियल पानी, सूप जैसे तरल विकल्प भी डाइट में शामिल किए जा सकते हैं।
- साफ और सुरक्षित पानी ही पिएं।
- बहुत ज्यादा मीठे पेय को पानी का विकल्प न बनाएं।
- अगर लगातार उल्टी-दस्त या तेज बुखार है, तो केवल पानी पर निर्भर रहने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लें।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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