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Cancer & Depression: जिसे डिप्रेशन मान रहे हैं कहीं वो ओवेरियन कैंसर तो नहीं? डॉक्टर भी हो रहे हैं कंफ्यूज

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Sat, 20 Jun 2026 07:59 PM IST
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सार

हाल ही में सामने आई एक नई रिसर्च ने डॉक्टरों और मरीजों दोनों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। अध्ययन के मुताबिक, ओवेरियन कैंसर से पीड़ित कई महिलाओं में ऐसे शारीरिक लक्षण दिखाई देते हैं जो डिप्रेशन जैसे लगते हैं। नतीजा यह होता है कि असली बीमारी की पहचान देर से होती है और मरीज मानसिक स्वास्थ्य के इलाज की ओर बढ़ जाती है, जबकि उसके शरीर में कैंसर तेजी से बढ़ रहा होता है।

latest study found Symptoms of ovarian cancer may be incorrectly diagnosed as signs of depression
कैंसर और डिप्रेशन के लिंक को लेकर बड़ा खुलासा - फोटो : Amarujala.com/AI
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विस्तार

हमारा शरीर एक डिफेंस सिस्टम की तरह काम करता है, ये खुद में इतना शक्तिशाली तंत्र है जो कई गंभीर बीमारियों का मुकाबला करके उसे खत्म भी कर देता है और हमें इसका पता तक नहीं चलता। इतना ही नहीं शरीर हमें लगातार खतरे के संकेत भी देता रहता है, लेकिन हम उन्हें किसी और समस्या का नाम देकर नजरअंदाज कर देते हैं।



लगातार थकान, भूख और किसी काम में मन न लगने और बार-बार ध्यान भटकने को ज्यादातर लोग तनाव या डिप्रेशन समझ लेते हैं। लेकिन क्या हो अगर यही लक्षण एक जानलेवा कैंसर की ओर इशारा कर रहे हों?
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हाल ही में सामने आई एक ऐसी ही रिपोर्ट ने डॉक्टरों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है। अध्ययन में पाया गया है कि ओवेरियन कैंसर से पीड़ित कई महिलाओं में ऐसे शारीरिक लक्षण दिखाई दे सकते हैं जो बिल्कुल डिप्रेशन जैसे लगते हैं। ये मरीजों के साथ-साथ स्वास्थ्य विशेषज्ञों को भी भ्रमित करने वाला हो सकता है। इससे होता ये है कि असली बीमारी का पता ही नहीं चल पाता और जो समस्या नहीं है उसका इलाज हो रहा होता है। समय पर कैंसर का निदान न हो पाने से खतरनाक कोशिकाएं धीरे-धीरे कई अंगों को प्रभावित करने लग जाती हैं।
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ओवेरियन कैंसर को पहले से ही विशेषज्ञ साइलेंट किलर मानते रहे हैं, अब इस रिपोर्ट ने इस जानलेवा कैंसर को लेकर विशेषज्ञों को और भी अलर्ट कर दिया है।

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ओवेरियन कैंसर और डिप्रेशन के मिलते-जुलते लक्षण - फोटो : Freepik.com

ओवेरियन कैंसर और इसका खतरा

ओवेरियन कैंसर तब होता है जब ओवरी में असामान्य कोशिकाएं बेकाबू होकर बढ़ती हैं और ट्यूमर बना लेती हैं। इसके शुरुआती संकेत आमतौर पर अन्य समस्याओं से मिलते-जुलते हैं। इनमें होने वाली दिक्कतें जैसे पेट फूलना, थकान, भूख कम लगना, कमजोरी या ध्यान केंद्रित करने में परेशानी इतनी आम हैं कि लोग इन्हें गंभीरता से नहीं लेते। यही वजह है कि कई मामलों में बीमारी तब पकड़ में आती है जब वह काफी आगे बढ़ चुकी होती है।
 

  • एक नए अध्ययन में सामने आया है कि ओवेरियन या अंडाशय के कैंसर के कई लक्षण, बिल्कुल डिप्रेशन के जैसे हो सकते हैं, जिनको लेकर आमतौर पर लोगों में काफी कंफ्यूजन हो सकता है।
  • ओवेरियन कैंसर दुनियाभर में महिलाओं में होने वाला आठवां सबसे आम कैंसर है, जिससे हर साल दो लाख से ज्यादा मौतें होती हैं। 
  • समय रहते स्क्रीनिंग न होने के कारण, ज्यादातर मामलों का पता बीमारी के एडवांस स्टेज में चलता है, जिसके चलते मरीजों में पांच साल तक जीवित रहने की दर 50% से भी कम होती है।
  • हालांकि, यदि इस कैंसर का पता शुरुआती चरण में चल जाए तो लगभग 95 प्रतिशत महिलाएं पांच साल से अधिक समय तक जीवित रह पाती हैं।

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ओवेरियन कैंसर और इसके लक्षण - फोटो : Freepik.com

ओवेरियन कैंसर के डिप्रेशन जैसे लक्षण

विशेषज्ञों ने कहा, इस कैंसर को लेकर समस्या यह है कि शुरुआती दौर में इसके लक्षण अक्सर इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम (आईबीएस), तनाव, मेनोपॉज, बढ़ती उम्र या डिप्रेशन जैसी स्थितियों से जोड़कर नजरअंदाज कर दिए जाते हैं। इसी कारण समय पर इसकी पहचान करना मुश्किल हो जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस समानता के कारण कुछ महिलाओं का इलाज डिप्रेशन के लिए शुरू हो सकता है, जबकि वास्तव में उनके कैंसर से जुड़े शारीरिक लक्षणों को अधिक प्राथमिकता देने की जरूरत होती है। ऐसी स्थिति गंभीर जोखिम पैदा कर सकती है।

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ओवेरियन कैंसर के बढ़ते जोखिमों को लेकर अलर्ट - फोटो : Freepik.com

अध्ययन में क्या पता चला?

कैंसर जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने ओवेरियन कैंसर से पीड़ित 428 महिलाओं का विश्लेषण किया। इसमें समझने की कोशिश की गई कि कैंसर के कारण होने वाले शारीरिक लक्षण महिलाओं को वास्तविकता में डिप्रेशन का शिकार दिखा रहे थे, भले ही उनमें डिप्रेशन न रहा हो?
 

  • इसमें पाया गया कि कैंसर के निदान के समय कई महिलाओं ने ऊर्जा में कमी और थकान, भूख न लगने और अन्य ऐसे शारीरिक लक्षणों की शिकायत की जो आमतौर पर डिप्रेशन से जुड़े माने जाते हैं, जबकि उनमें वास्तविक डिप्रेशन का स्तर कम या बिल्कुल नहीं था।
  • अध्ययन की प्रमुख लेखिका रेचल टेल्स के अनुसार, इनमें से अधिकांश शारीरिक लक्षण एक साल बाद काफी हद तक खत्म हो गए थे।
  • इससे संकेत मिलता है कि ओवेरियन कैंसर के कारण होने वाले शारीरिक प्रभाव मरीजों में डिप्रेशन की स्थिति को वास्तविकता से ज्यादा गंभीर दिखा सकते हैं


विशेषज्ञों ने कहा, खतरा ये है कि डॉक्टर कुछ मामलों में डिप्रेशन न होने पर भी इसका निदान कर सकते हैं, जबकि समय बीतने या कैंसर के इलाज के बाद ये लक्षण अपने आप कम हो जाते हैं। कैंसर से जूझ रहे मरीजों में डिप्रेशन का मूल्यांकन करते समय ऐसी बेहतर पद्धतियों की जरूरत है, जो बीमारी से जुड़े शारीरिक प्रभावों को भी ध्यान में रखें।

शोधकर्ताओं ने सिफारिश की कि किसी मरीज में डिप्रेशन का निदान करते समय डॉक्टरों को ओवेरियन कैंसर के शारीरिक प्रभावों पर भी सावधानीपूर्वक विचार करना चाहिए, ताकि सही पहचान हो सके और मरीज को सबसे उपयुक्त उपचार मिल सके।





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स्रोत:
Association Between Depression Severity and Ovarian Cancer Among American Women: A Cross-Sectional Study


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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