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Health Alert: शराब या सिगरेट, कौन सी आदत नंबर 1 किलर? आप खुद ही तो नहीं दे रहे मौत को न्योता

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Sun, 12 Apr 2026 08:51 PM IST
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सार

धूम्रपान आपके लिए सचमुच बहुत बुरा है, ज्यादातर लोग यह जानते हैं। यहां तक कि धूम्रपान करने वाले भी मानते हैं कि ये सेहत के लिए हानिकारक है फिर भी दुनियाभर में बड़ी संख्या में लोग इसकी चपेट में हैं। आखिर कैसे बनेगी दुनिया टोबैको-फ्री? पढ़िए पूरा विश्लेषण।

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अल्कोहल और धूम्रपान के नुकसान - फोटो : Amarujala.com
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विस्तार

क्रॉनिक बीमारियां हर साल लाखों लोगों की मौत का कारण बन रही हैं। डायबिटीज, हृदय रोग हो या कैंसर, ज्यादातर बीमारियों के लिए हमारी दिनचर्या की गड़बड़ आदतों को ही मुख्य कारण माना जाता है। मसलन हमारी ही खराब आदतें शरीर को अंदर ही अंदर खोखला बनाती जा रही हैं।  

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जब भी शरीर को धीरे-धीरे खत्म करने वाली आदतों की बात होती है तो-तंबाकू और शराब को सबसे खतरनाक माना जाता है। दोनों को ही स्वास्थ्य विशेषज्ञ साइलेंट किलर मानते हैं क्योंकि ये शरीर को ऐसे नुकसान पहुंचाती हैं जिसका असर कई बार तब दिखता है जब बहुत देर हो चुकी होती है। लेकिन सवाल ये है कि हमें सबसे ज्यादा नुकसान किस वजह से हो रहा है, कौन सी आदत सबसे बड़ी किलर है?
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इसी सवाल का जवाब तलाशती एक हालिया रिपोर्ट में विशेषज्ञों ने बताया कि किसी कभी रूप में तंबाकू का इस्तेमाल करना हमारे लिए सबसे अधिक जानलेवा है। हर साल लाखों लोग धूम्रपान की आदत के कारण मारे जा रहे हैं।

विशेषज्ञों ने कहा, धूम्रपान आपके लिए सचमुच बहुत बुरा है, ज्यादातर लोग यह जानते भी हैं। यहां तक कि धूम्रपान करने वाले भी मानते हैं कि ये सेहत के लिए हानिकारक है। फिर भी ये आदत छूट नहीं रही।

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शराब-धूम्रपान से होने वाले नुकसान - फोटो : Freepik.com

सेहत और अर्थव्यवस्था दोनों को नुकसान पहुंचा रहा धूम्रपान

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि संयुक्त राज्य अमेरिका में हर साल शराब, अवैध नशीले पदार्थों के सेवन, कार दुर्घटनाओं, आत्महत्या से होने वाली मौतों को मिलाकर होने वाली मौतों से भी ज्यादा जानें तंबाकू और धूम्रपान के कारण जाती हैं। मेडिकल एक्सपर्ट्स कहते हैं, अमेरिका और पूरी दुनिया में, धूम्रपान मौत और बीमारियों का सबसे बड़ा ऐसा कारण है जिसे रोका जा सकता है, हालांकि अब भी हर साल ये घातक साबित होता जा रहा है। 
 

  • इतना ही नहीं सिगरेट के कारण होने वाली बीमारियों के कारण सालाना स्वास्थ्य देखभाल पर  लगभग 240 अरब अमेरिकी डॉलर का खर्च आता है।
  • इससे न केवल धूम्रपान करने वालों को, बल्कि धूम्रपान न करने वाले समुदायों और अर्थव्यवस्था को भी नुकसान पहुंचता है। 


अमेरिका में धूम्रपान करने वालों की संख्या में पहले की तुलना में थोड़ा सुधार जरूर आया है। 1944 में 41 प्रतिशत से घटकर ये 2024 में 11 प्रतिशत रह गई है फिर भी, 2.5 करोड़ से ज्यादा अमेरिकी आज भी इस जानलेवा आदत का शिकार हैं। अमेरिका के अलावा दुनिया के सभी देशों में कमोबेश स्थिति ऐसी ही बनी हुई है।

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धूम्रपान रोकथाम के लिए प्रयास - फोटो : Adobe Stock Photos

तंबाकू रोकथाम के लिए किए गए कई प्रयास, पर कितना हुआ असर?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं अमेरिका में धूम्रपान करने वालों में आई कुछ हद तक कमी पिछले 50 वर्षों में लागू किए गए धूम्रपान से जुड़े कई कानूनों का नतीजा है। इनमें टेलीविजन और रेडियो पर सिगरेट के विज्ञापन पर देशव्यापी रोक (1971), कमर्शियल उड़ानों में धूम्रपान पर रोक (2000), फल या कैंडी के स्वाद वाली सिगरेट की बिक्री पर रोक (2009) और 18 से 20 साल के लोगों को सिगरेट बेचने पर रोक (2019) शामिल हैं।

अन्य देशों को भी सख्ती के साथ ऐसे तरीकों को बढ़ावा देने की जरूरत है।

तंबाकू और इसके कारण होने वाले खतरों को देखते हुए इस पीढ़ी को टोबैको-फ्री बनाने का विचार सबसे पहले साल 2010 में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने पेश किया था। साल 2021 में, मैसाचुसेट्स के ब्रुकलाइन शहर ने इसे अपनाने वाला पहला अमेरिकी समुदाय बनने का गौरव हासिल किया। 
 

  • ब्रुकलाइन के नियम के मुताबिक 1 जनवरी 2000 या उसके बाद पैदा हुए किसी भी व्यक्ति को तंबाकू और वेप बेचना मना है। 
  • न्यूजीलैंड में भी तंबाकू रोकथाम को लेकर साल 2022 में एक नियम की शुरुआत हुई थी लेकिन 2024 में उसे रद्द कर दिया गया। 

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धूम्रपान के नुकसान - फोटो : Freepik.com

सिगरेट के इतने खतरे, फिर इसे हल्के में क्यों लेते हैं लोग?


आंकड़े बताते हैं कि अकेले अमेरिका में हर साल 4.80 लाख लोगों की धूम्रपान से मौत हो जाती है। हर सिगरेट आपकी जिंदगी को 20 मिनट तक कम भी करती जा रही है।

मेडिकल एक्सपर्ट्स मानते हैं कि धूम्रपान कितना घातक है, इसे जानते हुए भी लोग इसके खतरों को कम आंकते हैं। इसका एक संभावित कारण तंबाकू उद्योग द्वारा किया गया प्रचार है, जिसने दशकों तक यह दावा किया कि सिगरेट सुरक्षित हैं। भले ही तंबाकू उद्योग के वैज्ञानिक 1953 में ही यह जानते थे कि धूम्रपान से फेफड़ों का कैंसर होता है।
 

  • एक और वजह है फिल्मों में सिगरेट को ग्लैमरस बनाकर दिखाना। 
  • 2024 में रिलीज हुई टॉप फिल्मों में से आधी फिल्मों में तंबाकू से जुड़ी चीजें दिखाई गईं, जिनमें ज्यादातर सिगरेट ही थी। 
  • रिसर्च से पता चलता है कि किशोर और युवा फिल्मों में लोगों को सिगरेट पीते हुए देखते हैं, ऐसे में उनमें खुद भी सिगरेट पीने की इच्छा ज्यादा हो सकती है।

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धूम्रपान के नुकसान और पैसिव स्मोकिंग का खतरा - फोटो : Adobe stock

आप पैसिव स्मोकिंग का शिकार तो नहीं?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, धूम्रपान से होने वाले नुकसानों को कम करने के लिए जरूरी है कि इसपर सख्ती से न सिर्फ रोक लगाई जाए, साथ ही इससे होने वाले खतरों को समझते हुए लोग खुद इससे दूर रहें। अगर आप धूम्रपान नहीं करते पर आपका कोई दोस्त धूम्रपान करता है तो इससे भी आपको खतरा हो सकता है। 

लगभग 10-20% लंग्स कैंसर के मरीज ऐसे होते हैं जिन्होंने कभी धूम्रपान नहीं किया। रिसर्च बताती है कि महिलाओं और एशियाई देशों में यह दर अधिक देखी गई है। इसका मुख्य कारण आसपास के लोगों के स्मोकिंग से निकलने वाले धुएं के संपर्क में आना (पैसिव स्मोकिंग) है। पूरी रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।




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स्रोत: 
Tobacco is still one of the world’s top killers – here are the key obstacles to enacting generational smoking bans


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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