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Kissing Disease: क्या है किसिंग डिजीज जिसका 95% अमेरिकी हैं शिकार, इलाज न हुआ तो ब्रेन-स्पाइन को खतरा

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Mon, 13 Apr 2026 01:49 PM IST
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सार

What is Kissing Disease: किसिंग डिजीज को मेडिकल की भाषा में मोनोन्यूक्लिओसिस कहा जाता है। संक्रमित व्यक्ति के सलाइवा के किसी भी तरह के संपर्क से इसका खतरा बढ़ जाता है। इसे किसिंग डिजीज क्यों कहा जाता है, ये कितना खतरनाक है? सबकुछ जानिए।

Mononucleosis Mono or  Kissing Disease causes and risk factor it may causes multiple sclerosis
किसिंग डिजीज के बारे में जानते हैं आप? - फोटो : Amarujala.com
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विस्तार

पिछले एक-दो दशकों में संक्रामक बीमारियों का प्रसार दुनियाभर में तेजी से बढ़ता देखा गया है। पहले की तुलना में वायरल-बैक्टीरियल बीमारियों के साथ नई-नई संक्रमण जनित समस्याएं भी तेजी से लोगों को चपेट में लेती जा रही हैं। डॉक्टरों और वैज्ञानिकों की सबसे बड़ी चिंता उन लोगों को लेकर है जिनकी इम्युनिटी यानी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है, ऐसे लोगों के लिए सामान्य संक्रमण भी गंभीर रूप ले सकता है।

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मेडिकल रिपोर्ट्स ‘किसिंग डिजीज’ के खतरे को लेकर भी लोगों को सचेत कर रही हैं। नाम भले ही थोड़ा अजीब लगे, लेकिन यह बीमारी असल में शरीर पर गहरा असर डाल सकती है। कुछ स्थितियों में तो इससे ब्रेन-स्पाइन तक को गंभीर खतरा हो सकता है।
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इसे किसिंग डिजीज इसलिए कहा जाता है क्योंकि ये संक्रमित व्यक्ति की लार के संपर्क से फैल सकती है। संक्रमित व्यक्ति को किस करने के अलावा उसके लार के संपर्क जैसे एक ही बोतल या बर्तन का इस्तेमाल, छींकने-खांसने या संक्रमित व्यक्ति के बेहद करीब आने से भी इस संक्रमण का खतरा रहता है।

वैसे तो इसके लक्षण हल्के होते हैं पर कुछ लोगों में इसके कारण गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं, यहां तक कि मल्टीपल स्क्लेरोसिस तक होने का खतरा हो सकता है।

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मोनोन्यूक्लिओसिस की समस्या के बारे में जानिए - फोटो : Adobe Stock Photo

पहले किसिंग डिजीज के बारे में जानिए

किसिंग डिजीज को मेडिकल की भाषा में मोनोन्यूक्लिओसिस कहा जाता है, ये आमतौर पर एप्स्टीन-बार वायरस (ईबीवी) के कारण होती है। इसका नाम भले ही किसिंग डिजीज है पर ये केवल किस करने से ही नहीं फैलती है, बल्कि संक्रमित व्यक्ति के सलाइवा के किसी भी तरह के संपर्क से इसका खतरा हो सकता है। यही वजह है कि वैज्ञानिक लोगों को इसे हल्के में न लेने की सलाह दे रहे हैं।
 

  • इस बीमारी की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि शुरुआत में इसके लक्षण सामान्य वायरल फीवर जैसे ही लगते हैं, यही वजह है कि अक्सर लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं।
  • तेज बुखार, लगातार गले में दर्द, लिम्फ नोड्स में सूजन, शरीर में कमजोरी, सिरदर्द होना इसका प्रमुख लक्षण है। 
  • यदि किसी व्यक्ति की इम्युनिटी पहले से कमजोर है तो संक्रमण का असर ज्यादा गंभीर हो सकता है।

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ब्रेन-स्पाइन से संबंधित दिक्कतें - फोटो : Adobe Stock

संक्रमितों में  मल्टीपल स्क्लेरोसिस होने का खतरा

किसिंग डिजीज के कारण होने वाले जोखिमों को लेकर किए गए अध्ययनों से पता चलता है इस संक्रामक रोग के शिकार लोगों में मल्टीपल स्क्लेरोसिस होने का जोखिम तीन गुना से भी ज्यादा हो सकता है। मल्टीपल स्क्लेरोसिस एक बेहद गंभीर ऑटोइम्यून बीमारी है जो हमारे सेंट्रल नर्वस सिस्टम को बुरी तरह से नुकसान पहुंचाती है।

गौरतलब है कि अमेरिका की लगभग 95 प्रतिशत आबादी किसिंग डिजीज का शिकार मानी जा रही है।


अध्ययन में क्या पता चला?

शोधकर्ताओं ने लगभग 19,000 लोगों के डेटा का विश्लेषण किया और पाया कि जिन बच्चों और युवाओं में लैब में ईबीवी की पुष्टि हुई थी और उनमें मल्टीपल स्क्लेरोसिस होने का खतरा अन्य लोगों से कहीं ज्यादा था।
 

  • मल्टीपल स्क्लेरोसिस बीमारी तब होती है जब इम्यून सिस्टम गलती से दिमाग और रीढ़ की हड्डी में मौजूद नसों की सुरक्षात्मक परत पर हमला कर देता है।
  • इससे दिमाग और शरीर के बीच के सिग्नल गड़बड़ा जाते हैं।
  • इसके कारण मांसपेशियों में कमजोरी, आंखों की रोशनी कम होने, हाथ-पैर सुन्न होने, बहुत ज्या दा थकान और संतुलन बनाने में दिक्कत जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं।
  • समय के साथ, ये विकलांगता का कारण बन सकती है।


मल्टीपल स्क्लेरोसिस की समस्या के बारे में विस्तार से जानने के लिए यहां क्लिक करें।

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मल्टीपल स्क्लेरोसिस की समस्या - फोटो : Adobe Stock Photo

मल्टीपल स्क्लेरोसिस के खतरे को जानिए

शोधकर्ता बताते हैं, चूंकि ईबीवी पॉजिटिव लोगों में  मल्टीपल स्क्लेरोसिस होने की आशंका तीन गुना ज्यादा होती है, पर इसका मतलब यह नहीं है कि सभी संक्रमितों को ये समस्या होगी ही।

विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ते संक्रमण के इस दौर में इम्युनिटी को मजबूत रखना बेहद जरूरी है। संतुलित आहार, पर्याप्त नींद, नियमित व्यायाम और साफ-सफाई जैसी आदतें शरीर को संक्रमण से लड़ने में मदद करती हैं। इन खतरों को देखते हुए सभी लोगों को अपनी इम्युनिटी को मजबूत करने पर गंभीरता से ध्यान देते रहने की जरूरत है।





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नोट: 
Risk of Multiple Sclerosis Among Persons With Epstein-Barr Virus–Positive Mononucleosis


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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