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अगर आप सर्वाइकल पेन से जूझ रहे हैं तो ये खबर जरूर पढ़ें
amarujala.com- Presented by :मंजू ममगाईं
Updated Mon, 09 Oct 2017 11:40 AM IST
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लोटा थेरेपी का नाम सुनकर आप थोड़ा चौक जाएंगे। पीठ से कूल्हे तक हर तरह के सर्वाइकल पेन को इस थैरेपी से दूर करने का दावा किया जा रहा है। पिछले 24 सालों में इस के जरिये करीब एक लाख से ज्यादा मरीजों को ठीक भी किया गया है।
cervical pain
थैरेपी के दौरान लोटे में आग डालकर उसे एक खाली बोतल के ढक्कन की सहायता से शरीर पर उल्टा रखा जाता है और फिर नसों की सिकाई होती है। 15 से 20 मिनट के भीतर सात से आठ अलग अलग आकार के लोटों के साथ यह थैरेपी की जाती है।
विशेषज्ञों ने इसका नाम मर्म वैक्यूम थेरेपी रखा है। मर्म शब्द आयुर्वेद से लिया गया है। मुंबई में कई जगह इसे क्लिनिक भी खोले जा चुके हैं। हार्ट केयर फाउंडेशन के परफेक्ट हेल्थ मेले में हर साल आने वाली विशेषज्ञ सुमन श्रीवास्तव ने शनिवार को बताया कि प्राचीन भारत में यह थैरेपी काफी प्रचलित थी।
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cervical pain
वैक्युम जैसा करता है काम
वैक्युम क्लीनर की तरह यह थैरेपी काम करती है। अगर किसी को सर्वाइकल दर्द है तो उसकी पीठ पर और अगर किसी को पेट संबंधी शिकायत है तो उसके पेट पर यह थैरेपी की जाती है। दावा है कि इस थैरेपी के जरिये शरीर की तमाम बीमारियों को ठीक किया जा सकता है। ये नसों के अलावा शरीर के ब्लड सैल पर भी असर डालता है।
वैक्युम क्लीनर की तरह यह थैरेपी काम करती है। अगर किसी को सर्वाइकल दर्द है तो उसकी पीठ पर और अगर किसी को पेट संबंधी शिकायत है तो उसके पेट पर यह थैरेपी की जाती है। दावा है कि इस थैरेपी के जरिये शरीर की तमाम बीमारियों को ठीक किया जा सकता है। ये नसों के अलावा शरीर के ब्लड सैल पर भी असर डालता है।
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cervical pain
अब तक सामने नहीं आया दुष्प्रभाव
सुमन श्रीवास्तव और उनकी टीम ने बताया कि अब तक किसी भी तरह का दुष्प्रभाव इस थैरेपी के जरिये सामने नहीं आया है।
यूपी और हिमाचल तक जाती है टीम
टीम के मुताबिक, मुंबई में इस थैरेपी को लेकर कई जगह पर क्लिनिक खोले जा चुके हैं। लेकिन देश के अन्य शहरों और राज्यों में भी उनकी टीम जाती है। यूपी, बिहार, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में अब तक ये टीम कई शिविर लगा चुकी हैं।
सुमन श्रीवास्तव और उनकी टीम ने बताया कि अब तक किसी भी तरह का दुष्प्रभाव इस थैरेपी के जरिये सामने नहीं आया है।
यूपी और हिमाचल तक जाती है टीम
टीम के मुताबिक, मुंबई में इस थैरेपी को लेकर कई जगह पर क्लिनिक खोले जा चुके हैं। लेकिन देश के अन्य शहरों और राज्यों में भी उनकी टीम जाती है। यूपी, बिहार, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में अब तक ये टीम कई शिविर लगा चुकी हैं।