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Prostate Cancer: 30 साल के अनुभव वाले डॉक्टर भी नहीं पहचान पाए अपना प्रोस्टेट कैंसर, खुद बताई सबसे बड़ी गलती

Mon, 06 Jul 2026 01:57 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Mon, 06 Jul 2026 01:57 PM IST
सार

जैसे-जैसे पुरुषों की उम्र बढ़ती है, प्रोस्टेट ग्रंथि धीरे-धीरे बड़ी होने लगती है। जब इसका आकार बढ़ता है, तो यह मूत्राशय और पेशाब की नली पर दबाव डालती है, जिससे पेशाब से जुड़ी समस्याएं शुरू हो सकती हैं। जानिए कैसे 30 साल के अनुभव वाले डॉक्टर को खुद के लक्षण नहीं चले पता? 

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real story of prostate cancer why it happens what are the main symptoms that usually get ignored
प्रोस्टेट कैंसर का खतरा - फोटो : Amarujala.com/AI

विस्तार

डॉक्टर कहते हैं, शरीर को स्वस्थ और बीमारियों से बचाए रखने के लिए खान-पान और दिनचर्या को ठीक रखना तो जरूरी है ही, साथ ही शरीर के संकेतों पर भी समय रहते ध्यान दिया जाना चाहिए। अगर हम सभी बीमारी के लक्षणों को समय रहते पहचान लें तो इससे कई गंभीर खतरों को टाला जा सकता है।

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कल्पना कीजिए जिस डॉक्टर ने 14 साल मेडिकल की पढ़ाई में लगाए हों, 30 साल से ज्यादा समय तक अस्पताल में गंभीर मरीजों का इलाज किया हो और रोज कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों से जूझ रहे लोगों को देखा हो। ऐसे व्यक्ति से शायद ही कोई उम्मीद करेगा कि वह अपने ही शरीर के खतरे के संकेतों को नजरअंदाज कर देगा। 
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इंग्लैंड के डॉ. स्टीफन एलन के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उन्हें प्रोस्टेट कैंसर का शिकार पाया गया। डॉ बताते हैं, करीब दो साल तक उन्हें प्रोस्टेट की दिक्कत होती रही पर कभी लगा ही नहीं कि ये कैंसर का लक्षण हो सकता है। उन्हें रात में बार-बार पेशाब के लिए उठना पड़ता था। पेशाब करने के बाद भी ऐसा लगता था कि मूत्राशय पूरी तरह खाली नहीं हुआ। उन्होंने सोचा कि उम्र बढ़ने पर पुरुषों में ऐसा होना तो सामान्य है। पर धीरे-धीरे परेशानी इतनी बढ़ गई कि डॉक्टर के पास जाना ही पड़ा, तब जांच में पता चला कि उन्हें प्रोस्टेट कैंसर है।
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डॉ. स्टीफन एलन इलाज के बाद तो कैंसर फ्री हो गए हैं, पर वह कहते हैं काश इसके लक्षणों पर मैंने समय रहते ध्यान दे दिया होता।

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प्रोस्टेट कैंसर का खतरा - फोटो : Adobe stock

शुरुआती लक्षणों को लिया हल्के में, बन गई बड़ी मुसीबत

77 साल के डॉ. स्टीफन अभी स्वस्थ हैं, लेकिन वे अपनी कहानी इसलिए दुनिया को बता रहे हैं ताकि दूसरे पुरुष उनकी गलती न दोहराएं। उनका कहना है कि अगर एक अनुभवी डॉक्टर अपने शरीर के संकेतों को गलत समझ सकता है, तो आम आदमी के लिए यह गलती करना और भी आसान है। 

एनेस्थेटिस्ट डॉक्टर स्टीफन बताते हैं- 

मुझे रात में बार-बार पेशाब के लिए उठना पड़ रहा है। और जब पेशाब करता था, तब भी ऐसा लगता था कि ब्लैडर पूरी तरह खाली नहीं हुआ है। मेडिकल जानकारी होने की वजह से ये तो पता था कि उम्र के बहुत से पुरुषों में ऐसे लक्षण आम होते हैं।

स्टीफन कहते हैं, मुझे लगा कि जो दिक्कतें मुझे हो रही हैं वह कोई गंभीर बीमारी नहीं है। इसलिए मैंने अपने डॉक्टर से भी इसका जिक्र नहीं किया। करीब दो साल तक उन्होंने अपने लक्षणों को नजरअंदाज किया। जब परेशानी काफी ज्यादा बढ़ गई, तब जाकर उन्होंने डॉक्टर को दिखाने का फैसला किया।

जांच शुरू हुई और कुछ ही हफ्तों बाद उन्हें ऐसी खबर मिली जिसने उनकी पूरी जिंदगी बदल दी। उन्हें प्रोस्टेट कैंसर था।

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पुरुषों में बढ़ते प्रोस्टेट कैंसर के मामले - फोटो : Adobe stock photos

कैंसर ने कैसे तबाह कर दी पूरी सेहत?

अब, लगभग 20 साल बाद, 77 वर्षीय स्टीफन कैंसर से पूरी तरह मुक्त हैं। लेकिन बीमारी देर से पकड़ में आने की वजह से उन्हें कई बार सर्जरी करानी पड़ी। कैंसर निकालने के लिए डॉक्टरों को उनका पूरा प्रोस्टेट निकालना पड़ा। इसके बाद उन्हें ऐसी परेशानियों का सामना करना पड़ा जिनका असर आज भी उनकी जिंदगी पर देखा जा सकता है।
 

  • वे लगभग पूरी तरह इनकॉन्टिनेंट हो गए। इसका मतलब है कि उन्हें न चाहते हुए भी पेशाब हो जाता है, ब्लैडर पर कंट्रोल नहीं रहा। 
  • इसके अलावा उन्हें गंभीर यौन कमजोरी का भी सामना करना पड़ा।


डॉ स्टीफन कहते हैं काश मैंने शुरुआत में ही अपने लक्षणों को गंभीरता से लिया होता। मैं खुद डॉक्टर था, फिर भी गलती कर बैठा। सोचिए, आम लोगों के लिए इन संकेतों को पहचानना कितना मुश्किल होगा।

प्रोस्टेट कैंसर का दुनियाभर में बढ़ता खतरा

गौरतलब है कि प्रोस्टेट कैंसर दुनिया भर में पुरुषों में होने वाला दूसरा सबसे आम कैंसर है, जिसके हर साल 14 लाख से ज्यादा नए मामले सामने आते हैं। 185 में से 118 देशों में पुरुषों में सबसे ज्यादा इसी कैंसर का पता चलता है। इसके सबसे ज्यादा मामले अमेरिका, ब्राजील और फ्रांस में देखे जाते हैं। कई बड़े सेलिब्रिटी भी इस कैंसर का शिकार रह चुके हैं।

इसी साल अप्रैल में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बताया कि उन्हें प्रोस्टेट कैंसर का पता चला है। इससे पहले पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और यूके के पूर्व प्रधानमंत्री डेविड कैमरन भी इस कैंसर का शिकार रह चुके हैं। 

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प्रोस्टेट कैंसर के कारण होने वाली दिक्कतें - फोटो : Freepik.com

ऐसे लक्षणों को बिल्कुल न करें इग्नोर

डॉक्टर बताते हैं कि प्रोस्टेट कैंसर अगर शुरुआती अवस्था में ही पकड़ में आ जाए तो इसका इलाज आसान हो जाता है और इसे शरीर के दूसरे हिस्सों में फैलने से भी रोका जा सकता है। यही वजह है कि समय पर जांच और जल्दी पहचान इस बीमारी में सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है।

चूंकि प्रोस्टेट मूत्राशय के ठीक नीचे स्थित होता है और पेशाब की नली को चारों तरफ से घेरे रहता है, इसलिए इसके शुरुआती लक्षण अक्सर पेशाब से जुड़ी समस्याओं के रूप में सामने आते हैं।
 

  • बार-बार पेशाब लगना।
  • अचानक तेज पेशाब आने की इच्छा होना और तुरंत टॉयलेट भागना।
  • पेशाब शुरू करने में दिक्कत होना। इसे मेडिकल भाषा में हेसिटेंसी कहा जाता है।
  • पेशाब करते समय जोर लगाना।
  • मूत्राशय खाली होने में बहुत समय लगना।
  • पेशाब की धार पहले से कमजोर हो जाना।
  • पेशाब के बाद भी ऐसा महसूस होना कि मूत्राशय पूरी तरह खाली नहीं हुआ।


विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी पुरुष में इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई दें, तो उन्हें बिना देर किए डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

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प्रोस्टेट कैंसर के बारे में जानिए - फोटो : Adobe Stock

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

प्रोस्टेट कैंसर यूके की वरिष्ठ विशेषज्ञ नर्स सोफी स्मिथ का कहना है, जब प्रोस्टेट कैंसर थोड़ा और बढ़ जाता है, तब इसके लक्षण अधिक स्पष्ट होने लगते हैं। इनमें पेशाब करने के तरीके में बदलाव, पीठ, कूल्हों या पेल्विस में दर्द शामिल हो सकता है। हालांकि ये सभी लक्षण केवल प्रोस्टेट कैंसर की वजह से ही नहीं होते।

ऐसी परेशानियां दूसरी बीमारियों की वजह से भी हो सकती हैं। लेकिन अगर इस तरह के कोई भी लक्षण दिखाई दें, तो डॉक्टर  से जरूर मिलें। जांच से सही कारण पता चल जाएगा और जरूरत पड़ने पर समय पर इलाज शुरू किया जा सकेगा।"

हाल ही में अमर उजाला में प्रकाशित एक रिपोर्ट में हमने बताया था कि किस तरह से 48 की उम्र में एक व्यक्ति को लास्ट स्टेज कैंसर का पता चला और दो महीने में ही वह मरीज एकदम ठीक हो गया। पूरी रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें 




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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