Gen-Z Health: जेन-जी लड़कियों में 10 साल में 70% तक बढ़े डायबिटीज के मामले, आखिर क्या है इसकी वजह?
Diabetes Risk: कम उम्र में होने वाली टाइप-2 डायबिटीज, सामान्य उम्र में होने वाली डायबिटीज की तुलना में अधिक आक्रामक मानी जाती है। पिछले एक दशक में 20 से 29 साल की महिलाओं में टाइप-2 डायबिटीज के मामलों में करीब 70 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। आखिर इसके पीछे की वजह क्या है?
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जेन-जी अपनी आधुनिक सोच और कुछ कर गुजरने की इच्छाशक्ति के लिए काफी चर्चा में रहे हैं। हाल ही में दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन में भी इनका बड़ा रोल रहा है। पर क्या ये लोग अपनी सेहत को लेकर भी उतना ध्यान दे रहे हैं? ये सवाल इसलिए काफी महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि कई अध्ययन लगातार चिंता जताते रहे हैं कि अब कम उम्र के लोगों में भी वह बीमारियां तेजी से बढ़ती जा रही हैं, जो कभी 50-60 साल की उम्र में देखी जाती थीं।
इसी को लेकर हाल में सामने आई रिपोर्ट और भी चिंता बढ़ाने वाली है। इसमें कहा गया है कि पिछले एक दशक में 20 से 29 साल की महिलाओं में टाइप-2 डायबिटीज के मामलों में करीब 70 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
गौरतलब है कि जेनरेशन-जी (जेन-ज़ी) का मतलब उन लोगों से है जिनका जन्म 1997 और 2012 के बीच हुआ था। इस हिसाब से 2026 में उनकी उम्र लगभग 14 से 29 साल होगी। इस आयुवर्ग में डायबिटीज के मामलों में तेज उछाल काफी चिंता बढ़ाने वाला माना जा रहा है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कम उम्र में होने वाली टाइप-2 डायबिटीज, सामान्य उम्र में होने वाली डायबिटीज की तुलना में अधिक आक्रामक मानी जाती है। यानी बीमारी लंबे समय तक शरीर को नुकसान पहुंचाती रहती है जिससे कम उम्र में ही दिल की बीमारी, स्ट्रोक, आंखों की रोशनी कम होने, किडनी खराब होने और यहां तक कि हाथ-पैर काटने जैसी गंभीर नौबत भी आ सकती है।
आखिर इसका कारण है और कहीं आप भी तो इसका शिकार नहीं हैं? आइए इस बारे में विस्तार से जान लेते हैं।
जेन-जी लड़कियों में डायबिटीज के बढ़ते मामले
ये रिपोर्ट द लैंसेट रीजनल हेल्थ में प्रकाशित हुई है। इसमें विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि जेन-जी लड़कियों-महिलाओं में टाइप-2 डायबिटीज के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह इस उम्र वालों में तेजी से बढ़ता मोटापा है।
- रिपोर्ट के मुताबिक इंग्लैंड में पिछले 10 वर्षों के दौरान 20-29 वर्ष की महिलाओं में टाइप-2 डायबिटीज के नए मामलों में लगभग 70 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
- यह बढ़ोतरी इसी उम्र के पुरुषों की तुलना में काफी ज्यादा है। इस आयु वाले पुरुषों में इस बीमारी के मामलों में लगभग 43 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
- दूसरी ओर, 60-79 की उम्र के लोगों में टाइप-2 डायबिटीज के नए मामलों में कमी देखने को मिली। हालांकि, अब भी इसी आयु वर्ग में सबसे अधिक मरीज मौजूद हैं।
डॉक्टर कहते हैं, डायबिटीज के मामलों में बढ़ोतरी संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए मुश्किलें बढ़ाने वाली हो सकती है।
बढ़ता बीएमआई सबसे बड़ा खतरा
विशेषज्ञों ने बताया, बढ़ती बीमारी के पीछे बड़ा हाथ युवाओं की बढ़ती बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) है।
अध्ययन में पाया गया कि साल 2011 के बाद से 30 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं की कमर और शरीर का वजन अन्य सभी समूहों की तुलना में सबसे तेजी से बढ़ा है। लिहाजा डायबिटीज की शिकार 20-29 साल की महिलाओं का औसत बीएमआई 37.7 से बढ़कर 40.7 तक पहुंच गया है।
गौरतलब है कि बॉडी मास इंडेक्स व्यक्ति की लंबाई और वजन के आधार पर निकाला जाने वाला एक पैमाना है, जिससे पता चलता है कि व्यक्ति सामान्य वजन में है, अधिक वजन का है या मोटापे का शिकार है। आमतौर पर 18.5 से 24.9 बीएमआई को सामान्य वजन, 25 से 29.9 को अधिक वजन, 30 या उससे अधिक को मोटापा और 40 या उससे अधिक को खतरनाक स्तर का मोटापा माना जाता है।
इस अध्ययन में शामिल युवा महिलाओं का औसत बीएमआई गंभीर मोटापे की श्रेणी तक पहुंच चुका था।
विशेषज्ञों ने कहा कि यह स्थिति बेहद चिंताजनक है, क्योंकि 40 साल से पहले होने वाली टाइप-2 डायबिटीज आमतौर पर ज्यादा तेजी से शरीर को नुकसान पहुंचाती है। ऐसे मरीजों को भविष्य में गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं होने का खतरा अधिक रहता है।
शोधकर्ताओं का यह भी मानना है कि सरकार द्वारा मोटापा रोकने के लिए जो योजनाएं चलाई जा रही हैं, वे युवाओं तक प्रभावी तरीके से नहीं पहुंच पा रही हैं। इस खतरे को कम करने के लिए कम उम्र से ही लोगों के खानपान में सुधार, नियमित शारीरिक गतिविधि बढ़ाने और मोटापे को कम करने वाले अन्य उपाय करने भी जरूरी हैं।
टाइप-2 डायबिटीज के नए मामलों में वृद्धि
इंपीरियल कॉलेज लंदन के लेखकों ने चेतावनी दी है कि गंभीर मोटापे से निपटने के लिए खान-पान, शारीरिक गतिविधि और मोटापे के अन्य बड़े कारणों पर पहले से ज्यादा गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है।
ब्रिटेन के लोगों पर किए गए इस अध्ययन में वैज्ञानिक समझना चाहते थे कि समय के साथ टाइप-2 डायबिटीज के नए मामलों में किस तरह बदलाव आया है?
इसके लिए उन्होंने 2011 से 2024 के बीच इंग्लैंड में टाइप-2 डायबिटीज से पीड़ित लोगों के रिकॉर्ड का विश्लेषण किया। इसमें उम्र, लिंग और अलग-अलग जातीय समूहों के आधार पर हर साल सामने आने वाले नए मामलों की तुलना की गई। साथ ही यह भी देखा कि मरीजों का डायबिटीज का पता चलने के समय बीएमआई कितना था?
- साल 2011 में 20-29 वर्ष की महिलाओं में हर साल लगभग 1 लाख महिलाओं पर 26 नए मामले सामने आते थे।
- वहीं 2024 तक यह संख्या बढ़कर 1 लाख महिलाओं पर 44 नए मामलों तक पहुंच गई।
- यानी पूरे अध्ययन के दौरान इस आयु वर्ग में करीब 69 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
रिसर्च में यह भी सामने आया कि 30 से 39 वर्ष के पुरुषों और महिलाओं दोनों में टाइप-2 डायबिटीज के नए मामलों में बढ़ोतरी हुई। हालांकि यह बढ़ोतरी 20-29 साल की महिलाओं जितनी तेज नहीं थी।
60 से 79 वर्ष के पुरुषों में टाइप-2 डायबिटीज के नए मामलों में लगभग 7 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। इसी आयु वर्ग की महिलाओं में यह कमी करीब 4 प्रतिशत रही। हालांकि इसके बावजूद 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में ही कुल मिलाकर सबसे ज्यादा मरीज पाए गए।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
- इम्पीरियल कॉलेज लंदन में एसोसिएट प्रोफेसर की डॉ. शिवानी मिश्रा कहती हैं, हमारा मानना है कि कम उम्र में गंभीर मोटापा तेजी से बढ़ रहा है और यही युवाओं में टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बढ़ा रहा है। यह बेहद चिंता की बात है क्योंकि कम उम्र में होने वाली टाइप-2 डायबिटीज का असर स्वास्थ्य पर अधिक गंभीर होता है।
- वहीं डायबिटीज यूके की नीति एवं अभियान प्रमुख हेलेन किर्रेन कहती हैं, टाइप-2 डायबिटीज का कोई भी मामला गंभीर होता है, लेकिन जब यह बीमारी कम उम्र में होती है तो यह ज्यादा तेजी से शरीर को नुकसान पहुंचा सकती है। इससे मरीजों में गंभीर जटिलताओं का खतरा बढ़ जाता है और कई मामलों में यह लोगों की उम्र भी कम कर सकती है।
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स्रोत:
More young adults developing type 2 diabetes and at more severe levels of obesity
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