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Monsoon Pregnancy Care: गर्भवती महिलाएं मानसून में रखें खास सावधानी, नहीं तो बढ़ सकता है संक्रमण का खतरा
Thu, 23 Jul 2026 11:00 AM IST
Shruti Gaur
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Shruti Gaur
Updated Thu, 23 Jul 2026 11:00 AM IST
सार
Monsoon Pregnancy Tips: अगर आप या आपके घर पर कोई गर्भवती महिला है तो मानसून के मौसम में आपको खास ध्यान रखने की जरूरत है। यहां हम आपको इस बारे में बताएंगे।
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गर्भवती महिलाएं मानसून में रखें खास सावधानी
- फोटो : AI
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Monsoon Pregnancy Tips: मानसून का मौसम गर्मी से राहत तो देता है, लेकिन अपने साथ कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां भी लेकर आता है। इस मौसम में संक्रमण, वायरल बुखार, डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड और पेट से जुड़ी बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है।
गर्भवती महिलाएं मानसून में रखें खास सावधानी
- फोटो : AI
मानसून में गर्भवती महिलाओं को क्यों रखनी चाहिए खास सावधानी?
1. संक्रमण से बचाव करें
मानसून के मौसम में नमी बढ़ने के कारण बैक्टीरिया, वायरस और फंगस तेजी से पनपते हैं। गर्भावस्था के दौरान शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता में बदलाव होने से संक्रमण का खतरा अधिक हो सकता है। इसलिए साबुन से नियमित रूप से हाथ धोएं, बाहर से आने के बाद सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें और भीड़भाड़ वाली जगहों पर मास्क पहनने पर भी विचार करें। यदि परिवार में कोई व्यक्ति बीमार है, तो उससे उचित दूरी बनाए रखें।
2. सिर्फ साफ और उबला हुआ पानी पिएं
बरसात में पानी दूषित होने का खतरा बढ़ जाता है, जिससे डायरिया, टाइफाइड, हैजा और पेट के संक्रमण हो सकते हैं। गर्भवती महिलाओं को हमेशा उबला हुआ या फिल्टर किया हुआ पानी ही पीना चाहिए। बाहर का खुला पानी, बर्फ या बिना साफ किए बने पेय पदार्थों से बचना बेहतर है। पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से शरीर हाइड्रेट भी रहता है।
1. संक्रमण से बचाव करें
मानसून के मौसम में नमी बढ़ने के कारण बैक्टीरिया, वायरस और फंगस तेजी से पनपते हैं। गर्भावस्था के दौरान शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता में बदलाव होने से संक्रमण का खतरा अधिक हो सकता है। इसलिए साबुन से नियमित रूप से हाथ धोएं, बाहर से आने के बाद सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें और भीड़भाड़ वाली जगहों पर मास्क पहनने पर भी विचार करें। यदि परिवार में कोई व्यक्ति बीमार है, तो उससे उचित दूरी बनाए रखें।
2. सिर्फ साफ और उबला हुआ पानी पिएं
बरसात में पानी दूषित होने का खतरा बढ़ जाता है, जिससे डायरिया, टाइफाइड, हैजा और पेट के संक्रमण हो सकते हैं। गर्भवती महिलाओं को हमेशा उबला हुआ या फिल्टर किया हुआ पानी ही पीना चाहिए। बाहर का खुला पानी, बर्फ या बिना साफ किए बने पेय पदार्थों से बचना बेहतर है। पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से शरीर हाइड्रेट भी रहता है।
गर्भवती महिलाएं मानसून में रखें खास सावधानी
- फोटो : AI
3. ताजा और घर का बना खाना खाएं
मानसून में भोजन जल्दी खराब हो सकता है, इसलिए हमेशा ताजा और गर्म भोजन करें। स्ट्रीट फूड, खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थ, कटे हुए फल और बासी भोजन से दूरी बनाएं। भोजन को अच्छी तरह पकाकर खाने से फूड पॉइजनिंग और पेट के संक्रमण का खतरा कम होता है। फल और सब्जियों को इस्तेमाल से पहले अच्छी तरह धोना भी जरूरी है।
4. मच्छरों से बचाव करें
बरसात में डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया फैलाने वाले मच्छरों की संख्या बढ़ जाती है। ये बीमारियां गर्भवती महिलाओं और गर्भ में पल रहे शिशु के लिए गंभीर हो सकती हैं। पूरी बाजू के कपड़े पहनें, मच्छरदानी का इस्तेमाल करें और घर के आसपास पानी जमा न होने दें। डॉक्टर की सलाह के अनुसार सुरक्षित मच्छर रोधी उत्पादों का उपयोग किया जा सकता है।
मानसून में भोजन जल्दी खराब हो सकता है, इसलिए हमेशा ताजा और गर्म भोजन करें। स्ट्रीट फूड, खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थ, कटे हुए फल और बासी भोजन से दूरी बनाएं। भोजन को अच्छी तरह पकाकर खाने से फूड पॉइजनिंग और पेट के संक्रमण का खतरा कम होता है। फल और सब्जियों को इस्तेमाल से पहले अच्छी तरह धोना भी जरूरी है।
4. मच्छरों से बचाव करें
बरसात में डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया फैलाने वाले मच्छरों की संख्या बढ़ जाती है। ये बीमारियां गर्भवती महिलाओं और गर्भ में पल रहे शिशु के लिए गंभीर हो सकती हैं। पूरी बाजू के कपड़े पहनें, मच्छरदानी का इस्तेमाल करें और घर के आसपास पानी जमा न होने दें। डॉक्टर की सलाह के अनुसार सुरक्षित मच्छर रोधी उत्पादों का उपयोग किया जा सकता है।
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गर्भवती महिलाएं मानसून में रखें खास सावधानी
- फोटो : AI
5. फिसलन से रहें सावधान
बारिश के कारण सड़कें, सीढ़ियां और फर्श फिसलन भरे हो जाते हैं, जिससे गिरने का खतरा बढ़ जाता है। गर्भावस्था में गिरने से मां और शिशु दोनों को नुकसान पहुंच सकता है। बाहर निकलते समय एंटी-स्लिप सोल वाले आरामदायक जूते पहनें और गीली जगहों पर धीरे-धीरे चलें। आवश्यकता होने पर किसी का सहारा लें।
6. नियमित प्रेग्नेंसी चेकअप करवाएं
मानसून के दौरान यदि बुखार, उल्टी, दस्त, तेज सिरदर्द, शरीर में दर्द या कमजोरी महसूस हो तो इसे नजरअंदाज न करें। नियमित प्रेग्नेंसी चेकअप कराते रहें और किसी भी असामान्य लक्षण पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। समय पर इलाज से जटिलताओं का खतरा काफी कम किया जा सकता है।
बारिश के कारण सड़कें, सीढ़ियां और फर्श फिसलन भरे हो जाते हैं, जिससे गिरने का खतरा बढ़ जाता है। गर्भावस्था में गिरने से मां और शिशु दोनों को नुकसान पहुंच सकता है। बाहर निकलते समय एंटी-स्लिप सोल वाले आरामदायक जूते पहनें और गीली जगहों पर धीरे-धीरे चलें। आवश्यकता होने पर किसी का सहारा लें।
6. नियमित प्रेग्नेंसी चेकअप करवाएं
मानसून के दौरान यदि बुखार, उल्टी, दस्त, तेज सिरदर्द, शरीर में दर्द या कमजोरी महसूस हो तो इसे नजरअंदाज न करें। नियमित प्रेग्नेंसी चेकअप कराते रहें और किसी भी असामान्य लक्षण पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। समय पर इलाज से जटिलताओं का खतरा काफी कम किया जा सकता है।
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गर्भवती महिलाएं मानसून में रखें खास सावधानी
- फोटो : AI
मानसून में इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें
ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
- तेज बुखार
- लगातार उल्टी या दस्त
- शरीर में अत्यधिक कमजोरी
- पेट में तेज दर्द
- भ्रूण की हलचल में कमी
- योनि से असामान्य रक्तस्राव या पानी आना
- सांस लेने में परेशानी
ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।