New Vaccines: चिकनगुनिया और रेबीज समेत पांच नई वैक्सीन को ट्रायल की मंजूरी, क्या अब मिलेगा नया सुरक्षा कवच?
संक्रामक रोगों से बचाव के लिए भारत में वैक्सीन विकास को बड़ी गति मिली है। सीडीएससीओ ने पीला बुखार, रेबीज, चिकनगुनिया, एमएमआर और एमएमआरवी समेत पांच नई वैक्सीनों के क्लीनिकल ट्रायल को मंजूरी दी है। इनमें यलो फीवर, रेबीज और एमएमआर वैक्सीन फेज-3 ट्रायल तक पहुंच चुकी हैं, जबकि चिकनगुनिया और एमएमआरवी का फेज-1 परीक्षण शुरू होगा।
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देश में गंभीर संक्रामक बीमारियों से बचाव के लिए नई वैक्सीन विकसित करने की दिशा में सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने वर्ष 2026 में पांच नई वैक्सीनों के क्लीनिकल ट्रायल को मंजूरी दी है। इनमें पीला बुखार (यलो फीवर), एमएमआर (खसरा, गलसुआ और रूबेला), चिकनगुनिया, रेबीज और एमएमआरवी (खसरा, गलसुआ, रूबेला और चिकनपॉक्स) की वैक्सीन शामिल हैं। इनमें यलो फीवर, एमएमआर और रेबीज की वैक्सीन फेज-3 क्लीनिकल ट्रायल तक पहुंच चुकी हैं।
पीला बुखार की वैक्सीन के ट्रायल में क्या होगा?
सीडीएससीओ ने पीला बुखार (यलो फीवर) की वैक्सीन के लिए सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया को फेज-3 क्लीनिकल ट्रायल की अनुमति दी है। यह अध्ययन कई केंद्रों पर बच्चों में किया जाएगा। ट्रायल के दौरान वैक्सीन की सुरक्षा और शरीर में बनने वाली प्रतिरक्षा (इम्यून रिस्पॉन्स) की तुलना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस्तेमाल की जाने वाली स्टामारिल (Stamaril) वैक्सीन से की जाएगी।
रेबीज की नई वैक्सीन किसके लिए होगी?
कैडिला फार्मास्युटिकल्स की रिकॉम्बिनेंट रेबीज जी-प्रोटीन वैक्सीन 'थ्रैबिस' को बच्चों में फेज-3 ट्रायल की मंजूरी मिली है। इस वैक्सीन का उपयोग कुत्ते या अन्य संक्रमित जानवर के काटने के बाद किया जाएगा। ट्रायल में इसकी सुरक्षा और प्रभावशीलता का विस्तृत आकलन किया जाएगा।
चिकनगुनिया की वैक्सीन किस चरण में पहुंची है?
जायडस की इनएक्टिवेटेड चिकनगुनिया वैक्सीन को फेज-1 क्लीनिकल ट्रायल की अनुमति दी गई है। इस चरण में स्वस्थ वयस्कों पर वैक्सीन की सुरक्षा और शरीर में प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया विकसित करने की क्षमता का परीक्षण किया जाएगा।
एमएमआरवी संयुक्त वैक्सीन क्यों मानी जा रही है अहम?
जायडस की एमएमआरवी (खसरा, गलसुआ, रूबेला और चिकनपॉक्स) संयुक्त वैक्सीन को फेज-1 ट्रायल की मंजूरी मिली है। यह एक ही टीके से चार अलग-अलग बीमारियों से सुरक्षा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है, जिससे भविष्य में टीकाकरण प्रक्रिया और अधिक आसान हो सकती है।
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एमएमआर वैक्सीन को किस स्तर की मंजूरी मिली है?
जायडस लाइफसाइंसेज की एमएमआर (खसरा, गलसुआ और रूबेला) वैक्सीन को भी फेज-3 क्लीनिकल ट्रायल की मंजूरी दी गई है। इस चरण में वैक्सीन की सुरक्षा और प्रभावशीलता का बड़े स्तर पर परीक्षण किया जाएगा, ताकि भविष्य में इसके व्यावसायिक उपयोग का रास्ता साफ हो सके।