Monsoon Home Care: पहली बारिश से पहले छत पर कर लें ये काम, सीलन और लीकेज से मिलेगा छुटकारा
Roof Waterproofing Tips: मानसून शुरू होने से पहले छत की दरारों और पानी जमा होने वाले हिस्सों की जांच कर लें। वॉटरप्रूफ कोटिंग या क्रैक फिलर का इस्तेमाल करके छोटी-छोटी दरारों को बंद कर दें। साथ ही छत की पानी निकासी व्यवस्था साफ रखें। ऐसा करने से बारिश का पानी छत में नहीं घुसेगा और घर में सीलन, पपड़ी और लीकेज की समस्या काफी हद तक रोकी जा सकती है।
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Seelan Se Bachne Ke Upay: मानसून का मौसम जहां गर्मी से राहत लेकर आता है, वहीं घरों के लिए कई समस्याएं भी साथ लाता है। पहली बारिश के बाद अक्सर लोगों को दीवारों पर सीलन, पेंट उखड़ने, पपड़ी झड़ने और छत से पानी टपकने जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। खासकर पुराने घरों में यह समस्या और भी ज्यादा देखने को मिलती है। कई लोग तब तक इंतजार करते हैं जब तक दीवारों पर नमी दिखाई न देने लगे, लेकिन तब तक नुकसान काफी बढ़ चुका होता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून शुरू होने से पहले छत की छोटी-सी जांच और कुछ जरूरी मरम्मत घर को बड़े नुकसान से बचा सकती है। अक्सर छत पर मौजूद छोटी दरारें, जाम नालियां और खराब वॉटरप्रूफिंग ही बारिश के पानी को घर के अंदर पहुंचाने का कारण बनती हैं। अच्छी बात यह है कि इन समस्याओं को समय रहते कम खर्च में ठीक किया जा सकता है।
अगर आप चाहते हैं कि इस बार बारिश के मौसम में आपके घर की दीवारें नई जैसी दिखें और सीलन या लीकेज की समस्या न हो, तो मानसून आने से पहले ये जरूरी काम जरूर कर लें।
छत की दरारों की तुरंत जांच करें
- बारिश का पानी सबसे पहले छत की छोटी-छोटी दरारों से अंदर प्रवेश करता है।
- कई बार ये दरारें इतनी बारीक होती हैं कि सामान्य नजर से दिखाई भी नहीं देतीं।
- मानसून से पहले पूरी छत का निरीक्षण करें।
- जहां भी क्रैक दिखाई दे, वहां वॉटरप्रूफ क्रैक फिलर या सीमेंट बेस्ड रिपेयर मटेरियल का इस्तेमाल करें।
- यह छोटा सा कदम भविष्य में होने वाले बड़े नुकसान को रोक सकता है।
छत की वॉटरप्रूफिंग की स्थिति जांचें
- अगर आपकी छत पर पहले से वॉटरप्रूफ कोटिंग की गई है, तो उसकी स्थिति जरूर जांचें।
- समय के साथ यह परत कमजोर हो सकती है।
- जरूरत पड़ने पर नई वॉटरप्रूफ कोटिंग लगवाएं।
- इससे बारिश का पानी सीधे कंक्रीट में नहीं जाएगा और छत की उम्र भी बढ़ेगी।
पानी की निकासी का रास्ता साफ रखें
- कई बार समस्या छत की दरारों से नहीं बल्कि जाम ड्रेनेज पाइप से शुरू होती है।
- सूखे पत्ते, धूल और कचरा पानी के बहाव को रोक देते हैं, जिससे पानी छत पर जमा होने लगता है।
- जमा पानी धीरे-धीरे रिसाव का कारण बन सकता है।
- मानसून से पहले सभी पाइप और नालियों की सफाई जरूर करें।
दीवार और छत के जॉइंट्स पर विशेष ध्यान दें
- छत और दीवार के जोड़ वाले हिस्से सबसे ज्यादा संवेदनशील होते हैं।
- यहां अक्सर पानी रिसने की संभावना रहती है।
- इन हिस्सों पर सीलेंट या वॉटरप्रूफ केमिकल लगाने से पानी अंदर जाने का खतरा काफी कम हो जाता है।
- यह उपाय विशेष रूप से पुराने घरों के लिए फायदेमंद है।
छत पर पानी जमा होने से रोकें
- अगर छत का ढलान सही नहीं है तो बारिश का पानी लंबे समय तक जमा रह सकता है।
- यह स्थिति धीरे-धीरे लीकेज और सीलन का कारण बनती है।
- मानसून से पहले छत पर ऐसे स्थानों की पहचान करें जहां पानी रुकता है।
- उन्हें समतल करवाने या उचित ढलान देने की व्यवस्था करें।