इंटरनेट और स्मार्टफोन पर हमारी निर्भरता बढ़ती जा रही है। घरों में छोटे-छोटे बच्चे तक स्मार्टफोन की लत के गिरफ्त में हैं। ऐसे में अभिभावकों को अपने बच्चों को इंटरनेट और स्मार्टफोन की इस लत से बचाना जरूरी है ताकि वे अपने बचपन को भरपूर जी सकें। दरअसल, बदलती जीवनशैली और भागदौड़ भरी जिंदगी में ज्यादातर मां-बाप नौकरी में व्यस्त रहते हैं और बच्चों पर ज्यादा ध्यान नहीं दे पाते। ऐसे में बच्चे धीरे-धीरे स्मार्टफोन गेम्स और इंटरनेट की दुनिया में रम जाते हैं, उनका वास्तविक दुनिया से संबंध कटकर आभासी दुनिया के साथ जुड़ जाता है। जो कई लिहाज से बच्चों और अभिभावकों दोनों के लिए घातक है।
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आप ऑफिस और आपके बच्चे स्मार्टफोन और इंटरनेट में तो नहीं उलझे हैं?
Wed, 29 May 2019 08:12 AM IST
ललित फुलारा
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
Published by: ललित फुलारा
Updated Wed, 29 May 2019 08:12 AM IST
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अगर आपके बच्चे भी इंटरनेट और स्मार्टफोन का इस्तेमाल ज्यादा करते हैं तो आपको उनको सावधान करने की जरूरत है। बच्चों को तय वक्त के लिए मोबाइल हाथ में दें और इंटरनेट का भी सीमित इस्तेमाल करने दें। आप ऑफिस में चाहे कितने भी व्यस्त रहें लेकिन अपने बच्चों के क्रियाकलाप पर ध्यान जरूर दें। आपको पता होना चाहिए कि आपके बच्चे घर में क्या कर रहे हैं और कितनी देर मोबाइल और इंटरनेट पर वक्त बिताते हैं।
Smartphone Children Addiction
मोबाइल और इंटरनेट सूचना का भंडार है लेकिन इसके कुछ नकारात्मक पहलू भी हैं। कई बार बच्चे इंटरनेट की दुनिया में ऐसी जगह तक पहुंच बना लेते हैं जो उनकी परवरिश के लिए घातक है। मोबाइल की लत बच्चों को पढ़ाई से दूर तो कर ही देती है, इसके साथ ही उन्हें परिवार और दोस्तों से भी काट देती है। इसलिए आपको अपने बच्चों की डिजिटल व्यवहार को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है।
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smartphone addiction
इंटरनेट में ज्यादा रमे रहने और फोन में चिपके रहने से बच्चों में व्यवहार संबंधी दिक्कतें भी आती हैं। आपका बच्चा ऐसे में समाज के साथ घुल-मिल नहीं पाता और एकाकी होता चले जाता है। आपने अक्सर ऐसे कई बच्चों को देखा होगा जो किसी दूसरे के घर जाने के बाद भी स्मार्टफोन में चिपके रहते हैं, वे अपने हमउम्र बच्चों के साथ खेलते नहीं हैं। इससे बच्चों की शारीरिक खेलों के प्रति रुचि कम हो जाती है जो उनके परवरिश के लिहाज से खतरनाक है। बच्चों को स्मार्टफन और इंटरनेट से ज्यादा शारीरिक खेलों में हिस्सा लेना चाहिए। इससे उनका बौद्धिक और रचनात्मक दोनों तरह का विकास होता है।