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Congress: 'यह कांग्रेस की पुरानी दुविधा है', वंदे मातरम को लेकर भाजपा ने राहुल-सोनिया पर तंज क्यों कसा?
Sat, 15 Aug 2026 02:54 PM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नितिन गौतम
Updated Sat, 15 Aug 2026 02:54 PM IST
सार
भाजपा ने कांग्रेस नेताओं का कथित तौर पर वंदे मातरम गायन के दौरान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया है। भाजपा का दावा है कि वंदे मातरम की कुछ पंक्तियों के बाद ही सोनिया गांधी इसे लेकर असहज दिखाईं दी।
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सोनिया गांधी के साथ राहुल गांधी
- फोटो : एएनआई
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विस्तार
आज 15 अगस्त के मौके पर लाल किले पर पहली बार वंदे मातरम गाया गया। साथ ही स्वतंत्रता दिवस से जुड़े सभी कार्यक्रमों में वंदे मातरम, राष्ट्रगान से पहले गाया गया। इसे लेकर राजनीति भी खूब हुई। दरअसल भाजपा ने कांग्रेस मुख्यालय में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर हुए कार्यक्रम को लेकर कांग्रेस नेतृत्व पर निशाना साधा।
वंदे मातरम गायन के दौरान साझा किया कांग्रेस नेताओं का वीडियो
भाजपा ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर कांग्रेस मुख्यालय में राष्ट्रीय ध्वज फहराने का एक वीडियो साझा किया, जिसमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और सोनिया गांधी, राहुल गांधी दिखाई दे रहे हैं। भाजपा का दावा है कि वंदे मातरम गाए जाने के दौरान सोनिया गांधी और राहुल गांधी असहज दिखाई दिए।
भाजपा ने सोशल मीडिया पोस्ट में क्या लिखा?
भाजपा ने पोस्ट में लिखा, 'सोनिया गांधी को वंदे मातरम की कुछ शुरुआती पंक्तियों के बाद ही इसे लेकर असहजता होने लगी। उन्होंने गीत रोकने का संकेत दिया। राहुल गांधी भी पूरे गायन के दौरान और राष्ट्रगीत समाप्त होने के बाद तक परेशान दिखे। यही कांग्रेस की पुरानी दुविधा है। गांधी परिवार को भारत की सांस्कृतिक चेतना, सभ्यतागत विरासत और राष्ट्रभाव के साथ आखिर इतनी असहजता क्यों है?'
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साल 1875 में बंकिम चंद्र चटर्जी ने वंदे मातरम लिखा था। 1950 में संविधान सभा द्वारा इसे भारत के राष्ट्रीय गीत के रूप में अपनाया गया। नोबेल पुरस्कार विजेता रविंद्रनाथ टैगोर ने 1896 में कलकत्ता में हुए कांग्रेस अधिवेशन में इसे पहली बार गाया था। साल 1905 में बंगाल विभाजन के बाद देशभर में आंदोलन शुरू हुआ, जिसमें वंदे मातरम अंग्रेजों के खिलाफ विरोध का नारा बन गया।
वंदे मातरम को लेकर विवाद कब हुआ?
वंदे मातरम के शुरुआती दो छंदों में मातृभूमि की सुंदरता, हरियाली, पानी, फसल और मां के रूप में स्तुति की गई है। बाद के छंदों में हिंदू देवियों मां दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती का जिक्र आता है। इसी हिस्से पर विवाद हुआ और कुछ मुस्लिम नेताओं और संगठनों ने इस पर आपत्ति जताई। साल 1930 में जब देश में धर्म आधारित राजनीति उभार पर थी तो वंदे मातरम का विरोध शुरू हुआ। विवाद बढ़ता देख कांग्रेस ने वंदे मातरम के सिर्फ दो छंदों को गाने का फैसला किया। इसके बाद 1937 में फैजाबाद अधिवेशन में कांग्रेस ने फैसला किया कि वंदे मातरम के दो ही छंद राष्ट्रीय आयोजनों में गाए जाएंगे।
साल 2026 में गृह मंत्रालय ने राष्ट्रीय गीत के प्रोटोकॉल के लिए दिशा-निर्देश जारी किए। इन दिशा-निर्देशों के तहत राष्ट्रीय कार्यक्रमों में राष्ट्रगान के साथ ही वंदे मातरम भी गाया जाएगा। साथ ही साफ कर दिया कि पहले वंदे मातरम का गायन होगा और उसके बाद राष्ट्रगान का। साथ ही जनवरी 2026 में सरकार की गाइडलाइन के मुताबिक अब पूरा छह छंद वाला गायन करना जरूरी है। जिसकी अवधि 3 मिनट और 10 सेकेंड है।
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वंदे मातरम गायन के दौरान साझा किया कांग्रेस नेताओं का वीडियो
भाजपा ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर कांग्रेस मुख्यालय में राष्ट्रीय ध्वज फहराने का एक वीडियो साझा किया, जिसमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और सोनिया गांधी, राहुल गांधी दिखाई दे रहे हैं। भाजपा का दावा है कि वंदे मातरम गाए जाने के दौरान सोनिया गांधी और राहुल गांधी असहज दिखाई दिए।
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भाजपा ने सोशल मीडिया पोस्ट में क्या लिखा?
भाजपा ने पोस्ट में लिखा, 'सोनिया गांधी को वंदे मातरम की कुछ शुरुआती पंक्तियों के बाद ही इसे लेकर असहजता होने लगी। उन्होंने गीत रोकने का संकेत दिया। राहुल गांधी भी पूरे गायन के दौरान और राष्ट्रगीत समाप्त होने के बाद तक परेशान दिखे। यही कांग्रेस की पुरानी दुविधा है। गांधी परिवार को भारत की सांस्कृतिक चेतना, सभ्यतागत विरासत और राष्ट्रभाव के साथ आखिर इतनी असहजता क्यों है?'
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साल 1875 में बंकिम चंद्र चटर्जी ने वंदे मातरम लिखा था। 1950 में संविधान सभा द्वारा इसे भारत के राष्ट्रीय गीत के रूप में अपनाया गया। नोबेल पुरस्कार विजेता रविंद्रनाथ टैगोर ने 1896 में कलकत्ता में हुए कांग्रेस अधिवेशन में इसे पहली बार गाया था। साल 1905 में बंगाल विभाजन के बाद देशभर में आंदोलन शुरू हुआ, जिसमें वंदे मातरम अंग्रेजों के खिलाफ विरोध का नारा बन गया।
वंदे मातरम को लेकर विवाद कब हुआ?
वंदे मातरम के शुरुआती दो छंदों में मातृभूमि की सुंदरता, हरियाली, पानी, फसल और मां के रूप में स्तुति की गई है। बाद के छंदों में हिंदू देवियों मां दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती का जिक्र आता है। इसी हिस्से पर विवाद हुआ और कुछ मुस्लिम नेताओं और संगठनों ने इस पर आपत्ति जताई। साल 1930 में जब देश में धर्म आधारित राजनीति उभार पर थी तो वंदे मातरम का विरोध शुरू हुआ। विवाद बढ़ता देख कांग्रेस ने वंदे मातरम के सिर्फ दो छंदों को गाने का फैसला किया। इसके बाद 1937 में फैजाबाद अधिवेशन में कांग्रेस ने फैसला किया कि वंदे मातरम के दो ही छंद राष्ट्रीय आयोजनों में गाए जाएंगे।
साल 2026 में गृह मंत्रालय ने राष्ट्रीय गीत के प्रोटोकॉल के लिए दिशा-निर्देश जारी किए। इन दिशा-निर्देशों के तहत राष्ट्रीय कार्यक्रमों में राष्ट्रगान के साथ ही वंदे मातरम भी गाया जाएगा। साथ ही साफ कर दिया कि पहले वंदे मातरम का गायन होगा और उसके बाद राष्ट्रगान का। साथ ही जनवरी 2026 में सरकार की गाइडलाइन के मुताबिक अब पूरा छह छंद वाला गायन करना जरूरी है। जिसकी अवधि 3 मिनट और 10 सेकेंड है।