why we celebrate ganesh chaturthi 2024: गणेश चतुर्थी हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जिसे पूरे भारत में बड़े धूमधाम और भक्ति भाव से मनाया जाता है। कुछ राज्यों में तो गणेश उत्सव की धूम तो देखते ही बनती है। यह पर्व भगवान गणेश, जिन्हें विघ्नहर्ता और बुद्धि के देवता माना जाता है, की जयंती के रूप में मनाया जाता है। इसके अलावा गणेश चतुर्थी से 10 दिवसीय गणेश उत्सव की शुरुआत हो जाती है। 10वें दिन अनंत चतुर्दशी की तिथि के मौके पर गणपित विसर्जन किया जाता है। गणेश चतुर्थी का महत्व, इसे 10 दिनों तक मनाने के पीछे की कथा, और इससे जुड़ी रोचक जानकारियां जानने योग्य हैं। आइए, इस लेख में हम गणेश चतुर्थी के महत्व और इससे जुड़ी दिलचस्प बातों पर प्रकाश डालते हैं।
Ganesh Chaturthi 2024: 10 दिनों का ही क्यों होता है गणेश उत्सव? जानिए गणेश चतुर्थी मनाने की वजह
गणेश चतुर्थी का महत्व, इसे 10 दिनों तक मनाने के पीछे की कथा, और इससे जुड़ी रोचक जानकारियां जानने योग्य हैं। आइए, इस लेख में हम गणेश चतुर्थी के महत्व और इससे जुड़ी दिलचस्प बातों पर प्रकाश डालते हैं।
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कब है गणेश चतुर्थी 2024
हर साल, यह पर्व भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। इस वर्ष गणेश चतुर्थी 7 सितंबर 2024 को मनाई जा रही है। इस दिन भगवान गणेश की मूर्ति की स्थापना की जाती है और 10 दिनों तक उनकी विधिपूर्वक पूजा की जाती है। अनंत चतुर्दशी के दिन गणपति विसर्जन होता है।
गणेश चतुर्थी का महत्व
भगवान गणेश को प्रथम पूज्य माना जाता है, अर्थात किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत उनसे ही होती है। यह पर्व विशेष रूप से महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में धूमधाम से मनाया जाता है, लेकिन आजकल पूरे भारत में इसका महत्व बढ़ता जा रहा है।
गणेश चतुर्थी क्यों मनाते हैं?
पुराणों में इस दिन को मनाने को लेकर कई कथाएं बताई गई हैं। मान्यता है कि भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को गणेश जी का जन्म हुआ था। इस कारण इस दिन को गणेश चतुर्थी के नाम से जाना जाता है।
10 दिनों तक गणेश उत्सव मनाने की वजह
गणेश चतुर्थी से 10 दिन के गणेश उत्सव की शुरुआत होती है, जिसका समापन अनंत चतुर्दशी को होता है। 10 दिन तक गणेश उत्सव मनाने के पीछे एक प्रचलित कथा है।
कहते हैं कि वेदव्यास जी ने भगवान गणेश से महाभारत ग्रंथ लिखने की प्रार्थना की। इस पर भगवान गणेश ने बिना रुके 10 दिनों तक महाभारत लिखी। एक ही स्थान पर बिना रुके लेखन करने के दौरान गणेश जी के शरीर पर धूल-मिट्टी जम गई। इस कारण 10वें दिन गणेश जी ने सरस्वती नदी में स्नान करके शरीर पर जमी धूल-मिट्टी साफ की।
तब से गणेश चतुर्थी के दिन गणपति जी की मूर्ति स्थापित की जाती है और 9 दिन उनकी पूजा करते हैं। 10वें दिन भक्ति भाव के साथ उनका विसर्जन कर दिया जाता है।